फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Milk and curd food, this is my Haryana

Faridabad News: दूध-दही का खाणा, यो सै म्हारा हरियाणा...वाली कहावत हो रही फेल

Wed, 05 Aug 2026 12:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:15 AM IST
विज्ञापन
Milk and curd food, this is my Haryana
जिले में रोजाना एक बच्चा गंभीर कुपोषण के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र में हो रहा भर्ती
विज्ञापन

368 बच्चे एक साल में इलाज के लिए पहुंचे
साफ पेयजल और पौष्टिक भोजन की कमी के कारण बच्चों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है
राहुल राज

फरीदाबाद। दूध-दही का खाणा, यो सै म्हारा हरियाणा कहावत प्रदेश की पहचान रही है लेकिन जिले में बच्चों की पोषण स्थिति इसके उलट तस्वीर पेश कर रही है। जिले में हर रोज एक बच्चे को गंभीर कुपोषण के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराना पड़ रहा है। बच्चों में एनीमिया, डिहाइड्रेशन, विटामिन-डी की कमी और मरास्मस जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रदेश सरकार की ओर से पोषण अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों और पूरक पोषण योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिले की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार साफ पेयजल और पौष्टिक भोजन की कमी के कारण बच्चों में कुपोषण की समस्या अब भी बनी हुई है।

जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। इस साल अप्रैल 2026 से जून के बीच 100 गंभीर कुपोषित बच्चे भर्ती हो चुके हैं। वहीं, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 368 कुपोषित बच्चों का यहां इलाज किया गया। इनमें अधिकांश बच्चे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों से हैं। अस्पताल में भर्ती बच्चों में खून की कमी (एनीमिया), डिहाइड्रेशन, विटामिन-डी की कमी और मर्समस (गंभीर कुपोषण) जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
विज्ञापन


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साल 2025 के पोषण ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार जिले में बच्चों की पोषण स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। जिले में स्टंटिंग (ठिगनापन) 25 प्रतिशत, अंडरवेट 7 प्रतिशत, वेस्टिंग 3 प्रतिशत और ओवरवेट 3 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यानी जिले में एक ओर बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ बच्चों में मोटापे की समस्या भी सामने आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नीति आयोग की रिपोर्ट में भी दिखा था असर

नीति आयोग की साल 2022 के पोषण रिपोर्ट में जिले की तस्वीर भी चिंताजनक सामने आई थी। आयोग के रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण के मामले में फरीदाबाद हरियाणा में दूसरे स्थान पर था। जिले में 55,028 बच्चे ठिगनेपन (स्टंटिंग) से प्रभावित थे, जबकि 1,17,225 बच्चे एनीमिया से जूझ रहे थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2015-16 की तुलना में जिले में पर्याप्त और विविध आहार पाने वाले बच्चों का प्रतिशत 3.1 प्रतिशत अंक घट गया है।

--

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी है मोटापे का शिकार

जिले में 1,294 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 1,207 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं तक पोषण सेवाएं पहुंचाने का काम कर रही हैं। हालांकि, हाल ही में मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के शहरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर किए गए अध्ययन ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है। अध्ययन के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत कार्यकर्ता अधिक वजन या मोटापे की शिकार हैं। पोषण संबंधी अच्छी जानकारी होने के बावजूद केवल 36 प्रतिशत कार्यकर्ता ही सभी छह अनुशंसित खाद्य समूहों का नियमित सेवन कर रही हैं।

वहीं, लगभग 48 प्रतिशत ने अधिक कार्यभार और समय की कमी को संतुलित भोजन न कर पाने की सबसे बड़ी वजह बताया। वहीं 82.6 प्रतिशत कार्यकर्ता नियमित रूप से नाश्ता छोड़ देती हैं और अधिकांश किसी न किसी पुरानी बीमारी से भी जूझ रही हैं। ऐसे में बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था की अपनी स्वास्थ्य स्थिति भी चिंता का विषय बन गई है।


---

बच्चे के जन्म से तीन वर्ष की आयु तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान ऊर्जा और प्रोटीन युक्त संतुलित आहार देना चाहिए तथा जंक फूड से बचाना जरूरी है। गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कर विशेष उपचार और आहार दिया जाता है। जिले में कुपोषित बच्चों की स्थिति पहले से काफी कम हुई है। - मीनाक्षी चौधरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग






विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article