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बेसहारा मवेशियों का आतंक: दो साल में 15 से अधिक घायल, कागजी दावों और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर

Wed, 12 Aug 2026 01:34 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 01:34 AM IST
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Menace of Stray Cattle: Over 15 Injured in Two Years; Wide Gap Between Official Claims and Ground Reality
बेसहारा मवेशियों का आतंक: दो साल में 15 से अधिक घायल, कागजी दावों और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर-10 हजार लावारिस मवेशियों के भरोसे महज दो गाड़ियां, मवई और सूरजकुंड में जगह कम पड़ने पर मेवात भेजने की तैयारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी की सड़कों पर लावारिस मवेशियों का आतंक शहर के मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों तक घूम रहे मवेशी आम नागरिकों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे रोजाना राहगीर और वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
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शहर की सड़कों पर मवेशियों का आतंक नया नहीं है। अगस्त 2024 में भारत कॉलोनी में सांड के हमले से एक प्रॉपर्टी डीलर की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिस मामले में नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल 2026 को सेक्टर-15ए में एक बेसहारा पशु ने सड़क पर जा रही महिला और उसकी दो मासूम बेटियों पर हमला कर उन्हें पटक-पटक कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके अलावा जुलाई 2025 में एनआईटी-5 और अक्तूबर 2025 में सेक्टर-8 बाईपास पर भी भीषण हादसे हो चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो वर्षों में ही 15 से अधिक लोग इन मवेशियों के कारण अस्पतालों में पहुंच चुके हैं।
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18 सदस्यीय टीम और दो गाड़ियों के भरोसे 10 हजार पशु
वर्तमान में फरीदाबाद की सड़कों पर 10 हजार से अधिक लावारिस मवेशी जमावड़ा लगाए रहते हैं। नीलम-बाटा रोड, सेक्टर-17 चौक, ओल्ड फरीदाबाद और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड इसके मुख्य हॉटस्पॉट बने हुए हैं। इस विशाल समस्या से निपटने के लिए नगर निगम के पास संसाधनों की भारी कमी है। फिलहाल महज 2 कैटल कैचर गाड़ियां और 18 कर्मचारियों की टीम ही पूरे शहर में तैनात है। निगम ने अगले दो महीनों में 2,000 पशुओं को पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। स्थानीय मवई और सूरजकुंड गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशु होने के कारण अब करीब 2,000 मवेशियों को मेवात की गौशालाओं में स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है।


कागजी दावों और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर
नगर निगम का दावा है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच करीब 5,000 पशुओं को पकड़कर श्री गोपाल गौशाला, मवई और अन्य स्थानों पर भेजा गया है। हालांकि, इन दावों के विपरीत मानसून आते ही सड़कों पर मवेशियों की संख्या फिर से बढ़ जाती है। जमीनी हकीकत यह है कि जब तक खुले में मवेशी छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों पर मुकदमों की ठोस कार्रवाई नहीं होती और कैटल कैचर गाड़ियों व कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती, तब तक शहर की सड़कों पर आम नागरिकों का सफर यूं ही जानलेवा बना रहेगा।
पहले हो चुके हादसे:
24 अप्रैल 2026-बाजार जा रही महिला और उनकी दो बेटियों को लावारिस पशुओ ने घायल किया
-05 अगस्त 2025-गुरुग्राम मार्ग पर आवारा पशु के चपेट में आकर इंजीनियर घायल
-06 अगस्त 2025-दयालबाग में आवारा पशु से बचकर निकली महिला को कार ने मारी टक्कर
-02 अगस्त-2024: भारत कॉलोनी में सांड की टक्क से एक प्रॉपर्टी डीलर की मौत
- 07 अप्रैल 2024- सेक्टर-तीन में लावारिश पशु के चपेट में आकर मां-बेटा घायल
-05 अप्रैल-2024- सेक्टर-तीन में लावारिश पशु की चपेट में आकर एक बुजुर्ग घायल
-01 नवंबर 2021- गांव खेड़ी गांव लावारिस पशु की चपेट में आकर बुजुर्ग महिला की मौत
-13 अगस्त-2017- फरीदपुर से खेड़ीकलां सड़क पर लावारिश पशु की चपेट में आकर युवक की मौत
-13 अगस्त-2017- फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर एक सांड़ की टक्कर से युवक की मौत
-20 मई 2017 को बड़खल में सांड़ की टक्कर से सैनिक कॉलोनी निवासी एक महिला की मौत
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सचिन कुमार
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