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Faridabad News: महाराष्ट्र से मिट्टी लाकर गणपति की मूर्तियां बनाते हैं कई परिवार
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पीढ़ियों से चली आ रही है परंपरा, लोगों ने कहा, संस्कृति से जुड़ाव महसूस होता है
हेमलता
फरीदाबाद। गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू होते ही शहर में रह रहे मराठी परिवारों के घरों में भी उत्साह बढ़ गया है। महाराष्ट्र से दूर रहने के बावजूद इन परिवारों ने अपनी परंपराओं को आज भी संजोकर रखा है। गणेश चतुर्थी के लिए कई मराठी परिवार महाराष्ट्र से मिट्टी मंगवाकर या अपने साथ लाकर भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। ऐसी ही एक संस्था है महाराष्ट्र मित्र मंडल फरीदाबाद जो हर साल महाराष्ट्र से मिट्टी मंगवाती है और सभी सदस्य गणेश की प्रतिमा बनाते हैं। इन लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र की मिट्टी से बनी गणपति की प्रतिमा में उन्हें अपने घर-गांव और संस्कृति से जुड़ाव महसूस होता है।
मराठी परिवारों के अनुसार गणेशोत्सव उनके लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला पर्व है। कई परिवार गणेश चतुर्थी से पहले ही प्रतिमा की तैयारी शुरू कर देते हैं। कुछ परिवार मूर्तिकार से प्रतिमा बनवाते हैं, जबकि कुछ लोग अपने स्तर पर मिट्टी को आकार देने की कोशिश करते हैं। प्रतिमा को तैयार करने के बाद प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता है, ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे।
महाराष्ट्र से आई है मिट्टी
महाराष्ट्र मित्र मंडल फरीदाबाद के अध्यक्ष राजेंद्र पांचाल ने बताया कि उनकी ओर से पिछले दो साल से करीब 100 किलो से अधिक मिट्टी महाराष्ट्र से लाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि उनके मंडल की प्रतिमा लक्ष्मण अपने हाथों से बनाते हैं। वह कोई मूर्तिकार नहीं हैं। वह सिर्फ गणेश उत्सव के दौरान मंडल के लिए प्रतिमा बनाते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल वह जुलाई में महाराष्ट्र गए थे। उसी दौरान वह वहां से 5 से 6 कट्टे करीब 100 किलो मिट्टी लाए थे और उसी मिट्टी से गणेश की मूर्ति बनाई थी। इस बार भी महाराष्ट्र से मिट्टी मंगाई है लेकिन इस बार 5 किलो के करीब आई है। जिसको आस्था और श्रद्धा के तौर पर जिले की मिट्टी में मिलाकर मूर्ति बनाई जा रही है। उनका कहना है कि इस बार किसी का महाराष्ट्र जाना नहीं हुआ इसलिए थोड़ी सी मिट्टी मंगाई है।
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लोगों से बात
बच्चों को भी मूर्ति बनाने और सजाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, जिससे उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है।- राजेंद्र पांचाल
प्रतिमा चाहे फरीदाबाद में तैयार हो, लेकिन उसमें महाराष्ट्र की मिट्टी का इस्तेमाल होने से त्योहार का भावनात्मक जुड़ाव और भी मजबूत हो जाता है।- विकास शेवाले
गणेशोत्सव के दौरान पूजा, आरती, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। जिसे पूरे उत्साह के साथ किया जाता है। - रविंद्र
गणेशोत्सव में आसपास रहने वाले अन्य परिवारों को भी आमंत्रित किया जाता है। इस तरह महाराष्ट्र की परंपरा फरीदाबाद में भी जीवंत रहती है और नई पीढ़ी तक पहुंचती है। - पौर्णिमा
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हेमलता
फरीदाबाद। गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू होते ही शहर में रह रहे मराठी परिवारों के घरों में भी उत्साह बढ़ गया है। महाराष्ट्र से दूर रहने के बावजूद इन परिवारों ने अपनी परंपराओं को आज भी संजोकर रखा है। गणेश चतुर्थी के लिए कई मराठी परिवार महाराष्ट्र से मिट्टी मंगवाकर या अपने साथ लाकर भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। ऐसी ही एक संस्था है महाराष्ट्र मित्र मंडल फरीदाबाद जो हर साल महाराष्ट्र से मिट्टी मंगवाती है और सभी सदस्य गणेश की प्रतिमा बनाते हैं। इन लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र की मिट्टी से बनी गणपति की प्रतिमा में उन्हें अपने घर-गांव और संस्कृति से जुड़ाव महसूस होता है।
मराठी परिवारों के अनुसार गणेशोत्सव उनके लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला पर्व है। कई परिवार गणेश चतुर्थी से पहले ही प्रतिमा की तैयारी शुरू कर देते हैं। कुछ परिवार मूर्तिकार से प्रतिमा बनवाते हैं, जबकि कुछ लोग अपने स्तर पर मिट्टी को आकार देने की कोशिश करते हैं। प्रतिमा को तैयार करने के बाद प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता है, ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे।
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महाराष्ट्र से आई है मिट्टी
महाराष्ट्र मित्र मंडल फरीदाबाद के अध्यक्ष राजेंद्र पांचाल ने बताया कि उनकी ओर से पिछले दो साल से करीब 100 किलो से अधिक मिट्टी महाराष्ट्र से लाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि उनके मंडल की प्रतिमा लक्ष्मण अपने हाथों से बनाते हैं। वह कोई मूर्तिकार नहीं हैं। वह सिर्फ गणेश उत्सव के दौरान मंडल के लिए प्रतिमा बनाते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल वह जुलाई में महाराष्ट्र गए थे। उसी दौरान वह वहां से 5 से 6 कट्टे करीब 100 किलो मिट्टी लाए थे और उसी मिट्टी से गणेश की मूर्ति बनाई थी। इस बार भी महाराष्ट्र से मिट्टी मंगाई है लेकिन इस बार 5 किलो के करीब आई है। जिसको आस्था और श्रद्धा के तौर पर जिले की मिट्टी में मिलाकर मूर्ति बनाई जा रही है। उनका कहना है कि इस बार किसी का महाराष्ट्र जाना नहीं हुआ इसलिए थोड़ी सी मिट्टी मंगाई है।
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लोगों से बात
बच्चों को भी मूर्ति बनाने और सजाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, जिससे उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है।- राजेंद्र पांचाल
प्रतिमा चाहे फरीदाबाद में तैयार हो, लेकिन उसमें महाराष्ट्र की मिट्टी का इस्तेमाल होने से त्योहार का भावनात्मक जुड़ाव और भी मजबूत हो जाता है।- विकास शेवाले
गणेशोत्सव के दौरान पूजा, आरती, प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। जिसे पूरे उत्साह के साथ किया जाता है। - रविंद्र
गणेशोत्सव में आसपास रहने वाले अन्य परिवारों को भी आमंत्रित किया जाता है। इस तरह महाराष्ट्र की परंपरा फरीदाबाद में भी जीवंत रहती है और नई पीढ़ी तक पहुंचती है। - पौर्णिमा