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मालखाना हथियार चोरी मामला : 14 में से 13 आरोपितों की जमानत खारिज
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अदालत ने कहा-संगठित अपराध, गंभीर प्रकृति का केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सेक्टर-8 थाना मालखाने से 32 हथियार चोरी के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 14 आरोपितों में से 13 की जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं केवल एक आरोपित पवन कुमार को राहत मिली है। पुलिस जांच के अनुसार सेक्टर-8 थाना में अप्रेंटिसशिप के आईटीआई छात्र मोनू ने मालखाने से 32 हथियार चोरी किए थे। इनमें से अधिकांश हथियार आगे अलग-अलग लोगों को बेचे गए और इस पूरे नेटवर्क में कई नाम सामने आए। अदालत में पुलिस ने दलील दी कि यह कोई साधारण अपराध नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया गया गंभीर अपराध है, जिसमें हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त शामिल है।
अदालत ने पवन कुमार को इस आधार पर राहत दी कि अन्य आरोपियों के बयानों में उसका प्रत्यक्ष नाम नहीं आया और उसके खिलाफ ठोस बरामदगी भी सीमित पाई गई। वहीं अन्य आरोपियों ने यह तर्क दिया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और हथियारों की अवैध बिक्री के नेटवर्क को देखते हुए सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला संगठित अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सेक्टर-8 थाना मालखाने से 32 हथियार चोरी के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए 14 आरोपितों में से 13 की जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं केवल एक आरोपित पवन कुमार को राहत मिली है। पुलिस जांच के अनुसार सेक्टर-8 थाना में अप्रेंटिसशिप के आईटीआई छात्र मोनू ने मालखाने से 32 हथियार चोरी किए थे। इनमें से अधिकांश हथियार आगे अलग-अलग लोगों को बेचे गए और इस पूरे नेटवर्क में कई नाम सामने आए। अदालत में पुलिस ने दलील दी कि यह कोई साधारण अपराध नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया गया गंभीर अपराध है, जिसमें हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त शामिल है।
अदालत ने पवन कुमार को इस आधार पर राहत दी कि अन्य आरोपियों के बयानों में उसका प्रत्यक्ष नाम नहीं आया और उसके खिलाफ ठोस बरामदगी भी सीमित पाई गई। वहीं अन्य आरोपियों ने यह तर्क दिया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और हथियारों की अवैध बिक्री के नेटवर्क को देखते हुए सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला संगठित अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।
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