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Faridabad News: टूटी कुर्सियां, मधुमक्खी का खतरा और खुले में कूड़ा, कब सुधरेंगे हालात
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राहुल राज
पलवल। लघु सचिवालय, जो जिले का प्रशासनिक दिल माना जाता है, आज अव्यवस्थाओं की चपेट में है। यह वह स्थान है, जहां लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन बदले में उन्हें निराशा, असुविधा और लापरवाही का सामना करना पड़ता है। लिफ्ट से लेकर शौचालयों तक, कूड़े के ढेर से लेकर टूटी कुर्सियों तक, हर कोना प्रशासन की उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है। यह हालात न केवल आम जनता को परेशान कर रहा हैं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन जैसे सरकारी दावों की पोल भी खोल रहा हैं।
बुजुर्गं, दिव्यांग परेशान
सचिवालय में सबसे बड़ी समस्या खराब लिफ्ट की है। कई महीनों से यह बंद है, जिसके कारण बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। खासकर दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक है। प्रशासन की ओर से लिफ्ट की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। दिव्यांगजनों के लिए सचिवालय में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। गंदगी और दुर्गंध ने इनका उपयोग असंभव बना दिया है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए शौचालय बंद पड़े हैं और उनकी सफाई महीनों से नहीं हुई है।
टूटा है कूड़ादान, खुले में फेंक रहे हैं कचरा
सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने कूड़े का ढेर और जर्जर स्थिति में पड़ा कूड़ेदान बदहाली का जीता-जागता सबूत हैं। टूटे हुए कूड़ेदान के कारण लोग कचरा खुले में फेंकने को मजबूर हैं। मानसून के महीने में जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सचिवालय भवन के अंदर बनी कूड़ेदान रखने का स्थान खाली पड़ा हुआ है। कूड़ेदान रखने के लिए बनाया गया स्टैंड लंबे अरसे से कूड़ेदान आने के इंतजार में है। भवन में लगे कई वाटर कूलर खराब पड़े हुए हैं या जर्जर हालत में है। कई वाटर कूलर के नल खराब हो रखे है। जिसे प्लास्टिक के मदद से बांध कर रखा गया है।
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कूड़े की दुर्गंध पूरे सचिवालय परिसर में फैल रही है, जो फरियादियों के लिए असहनीय है। सचिवालय के पार्किंग में जलभराव हो रखा है। जिससे आने-जाने वालों को काफी समस्या हो रही है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। सचिवालय को देखकर स्वच्छ भारत मिशन की बातें सिर्फ कागजी लगती हैं।
फरियादियों की सुविधा के लिए लगाई गई कुर्सियां भी टूटी पड़ी हैं। इसके अलावा, सचिवालय भवन में मधुमक्खियों ने अपना घर बना लिया है। मधुमक्खियों ने कई छत्ते बना रखे हैं। जो फरियादियों के लिए हर समय खतरे का कारण बना रहता है। लोगों ने इसकी शिकायत कई बार की, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।
लघु सचिवालय में मरम्मत कार्य प्रगति पर है। आगामी 15 दिनों के भीतर सभी अव्यवस्थाओं को दुरुस्त कर दिया जाएगा। कूड़ेदान जल्द बदले जाएंगे और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है।
- डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त
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पलवल। लघु सचिवालय, जो जिले का प्रशासनिक दिल माना जाता है, आज अव्यवस्थाओं की चपेट में है। यह वह स्थान है, जहां लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन बदले में उन्हें निराशा, असुविधा और लापरवाही का सामना करना पड़ता है। लिफ्ट से लेकर शौचालयों तक, कूड़े के ढेर से लेकर टूटी कुर्सियों तक, हर कोना प्रशासन की उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है। यह हालात न केवल आम जनता को परेशान कर रहा हैं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन जैसे सरकारी दावों की पोल भी खोल रहा हैं।
बुजुर्गं, दिव्यांग परेशान
सचिवालय में सबसे बड़ी समस्या खराब लिफ्ट की है। कई महीनों से यह बंद है, जिसके कारण बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। खासकर दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक है। प्रशासन की ओर से लिफ्ट की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। दिव्यांगजनों के लिए सचिवालय में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। गंदगी और दुर्गंध ने इनका उपयोग असंभव बना दिया है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए शौचालय बंद पड़े हैं और उनकी सफाई महीनों से नहीं हुई है।
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टूटा है कूड़ादान, खुले में फेंक रहे हैं कचरा
सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने कूड़े का ढेर और जर्जर स्थिति में पड़ा कूड़ेदान बदहाली का जीता-जागता सबूत हैं। टूटे हुए कूड़ेदान के कारण लोग कचरा खुले में फेंकने को मजबूर हैं। मानसून के महीने में जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। सचिवालय भवन के अंदर बनी कूड़ेदान रखने का स्थान खाली पड़ा हुआ है। कूड़ेदान रखने के लिए बनाया गया स्टैंड लंबे अरसे से कूड़ेदान आने के इंतजार में है। भवन में लगे कई वाटर कूलर खराब पड़े हुए हैं या जर्जर हालत में है। कई वाटर कूलर के नल खराब हो रखे है। जिसे प्लास्टिक के मदद से बांध कर रखा गया है।
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कूड़े की दुर्गंध पूरे सचिवालय परिसर में फैल रही है, जो फरियादियों के लिए असहनीय है। सचिवालय के पार्किंग में जलभराव हो रखा है। जिससे आने-जाने वालों को काफी समस्या हो रही है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। सचिवालय को देखकर स्वच्छ भारत मिशन की बातें सिर्फ कागजी लगती हैं।
फरियादियों की सुविधा के लिए लगाई गई कुर्सियां भी टूटी पड़ी हैं। इसके अलावा, सचिवालय भवन में मधुमक्खियों ने अपना घर बना लिया है। मधुमक्खियों ने कई छत्ते बना रखे हैं। जो फरियादियों के लिए हर समय खतरे का कारण बना रहता है। लोगों ने इसकी शिकायत कई बार की, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है।
लघु सचिवालय में मरम्मत कार्य प्रगति पर है। आगामी 15 दिनों के भीतर सभी अव्यवस्थाओं को दुरुस्त कर दिया जाएगा। कूड़ेदान जल्द बदले जाएंगे और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है।
- डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त