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Faridabad News: बुढ़ापा आने से पहले ही घिस रहे घुटने
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बीके अस्पताल में रोजाना करीब 20 मरीज घुटने की समस्या लेकर पहुंच रहे
हर महीने करीब 10 मरीजों का होता है घुटना प्रत्यारोपण
भारती दुबे
फरीदाबाद। बढ़ती उम्र के साथ होने वाली घुटनों की समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। शहर के अस्पतालों में 50 वर्ष की उम्र के आसपास के मरीज भी घुटनों में अधिक दर्द, चलने-फिरने में परेशानी और घिसाव की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
स्थिति गंभीर होने पर कुछ मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण तक कराना पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में हर रोज 30 से ज्यादा मरीज घुटने बदलवाने के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली, बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और घुटनों पर लगातार पड़ने वाला दबाव कम उम्र में ही समस्या बढ़ने के प्रमुख कारण हो सकते हैं। बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20 मरीज घुटने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब दो मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, सभी मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। चिकित्सकों की ओर से मरीज की जांच के बाद उसकी स्थिति के अनुसार दवा, व्यायाम और अन्य उपचार की सलाह दी जाती है। अस्पताल में हर महीने करीब 10 घुटनों का प्रत्यारोपण किया जाता है। कुछ मरीज आयुष्मान योजना के तहत मंजूरी मिलने के बाद भी उपचार कराते हैं। अस्पताल में प्रक्रिया पूरी होने में करीब पांच दिन का समय लग जाता है। कई मरीज निजी अस्पतालों में भी अपना उपचार कराते हैं।
50 से 80 वर्ष तक के मरीज अधिक
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि शंकर गौर ने बताया कि घुटने की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में सबसे अधिक संख्या 50 से 80 वर्ष की आयु वर्ग की है। मरीजों के उपचार के साथ उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। जिन मरीजों को दवा और नियमित व्यायाम से आराम मिलने की संभावना होती है, उन्हें अनावश्यक रूप से घुटना प्रत्यारोपण कराने की सलाह नहीं दी जाती। ऐसे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार व्यायाम भी बताया जाता है।
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वजन बढ़ना और गलत जीवनशैली भी कारण
डॉ. रवि शंकर के अनुसार, घुटनों में समस्या होने के कई कारण हो सकते हैं। बढ़ता वजन घुटनों के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर रहना, नियमित व्यायाम न करना, गलत तरीके से सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, चोट लगना और उम्र के साथ जोड़ में होने वाला प्राकृतिक घिसाव भी समस्या को बढ़ा सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी घुटनों का घिसाव अपेक्षाकृत जल्दी शुरू हो सकता है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। नियमित रूप से हल्का व्यायाम, पैदल चलना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत करनी चाहिए। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए। सीढ़ियों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और घुटनों पर अत्यधिक दबाव डालने वाली गतिविधियों से भी बचें। घुटने में लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो खुद से दर्द निवारक दवा लेने के बजाय समय पर ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से कई मरीजों को सर्जरी से बचाया जा सकता है। वहीं, सेक्टर-8 स्थित निजी अस्पताल में एमआईएस हिप और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के डायरेक्टर डॉ. पंकज वलेचा ने बताया कि अस्पताल में एक माह में करीब 500 मरीज घुटनों से संबंधित परेशानी लेकर पहुंचते हैं। इसमें करीब 125 मरीजों के घुटनों का प्रत्यारोपण किया जाता है। बाकी मरीजों को दवाई और थेरेपी देकर उपचार किया जाता है।
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हर महीने करीब 10 मरीजों का होता है घुटना प्रत्यारोपण
भारती दुबे
फरीदाबाद। बढ़ती उम्र के साथ होने वाली घुटनों की समस्या अब बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। शहर के अस्पतालों में 50 वर्ष की उम्र के आसपास के मरीज भी घुटनों में अधिक दर्द, चलने-फिरने में परेशानी और घिसाव की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
स्थिति गंभीर होने पर कुछ मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण तक कराना पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में हर रोज 30 से ज्यादा मरीज घुटने बदलवाने के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली, बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और घुटनों पर लगातार पड़ने वाला दबाव कम उम्र में ही समस्या बढ़ने के प्रमुख कारण हो सकते हैं। बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20 मरीज घुटने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब दो मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, सभी मरीजों को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। चिकित्सकों की ओर से मरीज की जांच के बाद उसकी स्थिति के अनुसार दवा, व्यायाम और अन्य उपचार की सलाह दी जाती है। अस्पताल में हर महीने करीब 10 घुटनों का प्रत्यारोपण किया जाता है। कुछ मरीज आयुष्मान योजना के तहत मंजूरी मिलने के बाद भी उपचार कराते हैं। अस्पताल में प्रक्रिया पूरी होने में करीब पांच दिन का समय लग जाता है। कई मरीज निजी अस्पतालों में भी अपना उपचार कराते हैं।
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50 से 80 वर्ष तक के मरीज अधिक
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि शंकर गौर ने बताया कि घुटने की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में सबसे अधिक संख्या 50 से 80 वर्ष की आयु वर्ग की है। मरीजों के उपचार के साथ उनकी काउंसलिंग भी की जाती है। जिन मरीजों को दवा और नियमित व्यायाम से आराम मिलने की संभावना होती है, उन्हें अनावश्यक रूप से घुटना प्रत्यारोपण कराने की सलाह नहीं दी जाती। ऐसे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार व्यायाम भी बताया जाता है।
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वजन बढ़ना और गलत जीवनशैली भी कारण
डॉ. रवि शंकर के अनुसार, घुटनों में समस्या होने के कई कारण हो सकते हैं। बढ़ता वजन घुटनों के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर रहना, नियमित व्यायाम न करना, गलत तरीके से सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, चोट लगना और उम्र के साथ जोड़ में होने वाला प्राकृतिक घिसाव भी समस्या को बढ़ा सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी घुटनों का घिसाव अपेक्षाकृत जल्दी शुरू हो सकता है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। नियमित रूप से हल्का व्यायाम, पैदल चलना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली कसरत करनी चाहिए। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना चाहिए। सीढ़ियों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और घुटनों पर अत्यधिक दबाव डालने वाली गतिविधियों से भी बचें। घुटने में लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो खुद से दर्द निवारक दवा लेने के बजाय समय पर ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से कई मरीजों को सर्जरी से बचाया जा सकता है। वहीं, सेक्टर-8 स्थित निजी अस्पताल में एमआईएस हिप और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के डायरेक्टर डॉ. पंकज वलेचा ने बताया कि अस्पताल में एक माह में करीब 500 मरीज घुटनों से संबंधित परेशानी लेकर पहुंचते हैं। इसमें करीब 125 मरीजों के घुटनों का प्रत्यारोपण किया जाता है। बाकी मरीजों को दवाई और थेरेपी देकर उपचार किया जाता है।