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Faridabad News: कम उम्र में भी घुटने दे रहे जवाब
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युवाओं में भी बढ़ रही घुटनों के दर्द की समस्या, बीके अस्पताल में रोज पहुंच रहे 20 मरीज
45 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज भी करा रहे घुटना प्रत्यारोपण
अस्पताल में हर महीने करीब 10 सर्जरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली, बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण घुटनों के दर्द की समस्या बढ़ रही है। अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि कम उम्र के लोग भी घुटनों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति गंभीर होने पर कुछ मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण तक कराना पड़ रहा है।
बीके नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20 मरीज घुटनों की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल में हर महीने करीब 10 घुटनों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, घुटनों के जोड़ में घिसाव, मोटापा, चोट और नियमित व्यायाम की कमी समस्या को बढ़ा सकती है। कई मरीज 45 वर्ष से अधिक उम्र में ही घुटनों में गंभीर दर्द और चलने-फिरने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। हालांकि, घुटनों में दर्द होने वाले प्रत्येक मरीज को प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं होती। जांच के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, व्यायाम और अन्य उपचार से भी राहत दिलाने का प्रयास किया जाता है।
हर मरीज के लिए सर्जरी जरूरी नहीं
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि शंकर गौर ने बताया कि घुटनों की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या अधिक है। मरीजों को उपचार के साथ काउंसलिंग भी दी जाती है। जिन मरीजों को दवा और नियमित व्यायाम से आराम मिल सकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से घुटना प्रत्यारोपण कराने की सलाह नहीं दी जाती। अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार किया जाता है। प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में करीब पांच दिन का समय लग सकता है।
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मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली भी कारण
डॉ. रवि शंकर गौर के अनुसार, बढ़ता वजन घुटनों के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठना, नियमित व्यायाम नहीं करना, चोट लगना और उम्र के साथ जोड़ों में होने वाला प्राकृतिक घिसाव भी दर्द का कारण बन सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी घुटनों में घिसाव जल्दी शुरू हो सकता है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, वजन नियंत्रित रखना, नियमित पैदल चलना और चिकित्सक की सलाह से मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करना जरूरी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें और घुटनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। यदि लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो खुद से दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर उपचार मिलने से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत भी टल सकती है।
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45 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज भी करा रहे घुटना प्रत्यारोपण
अस्पताल में हर महीने करीब 10 सर्जरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली, बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण घुटनों के दर्द की समस्या बढ़ रही है। अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि कम उम्र के लोग भी घुटनों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति गंभीर होने पर कुछ मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण तक कराना पड़ रहा है।
बीके नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 20 मरीज घुटनों की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल में हर महीने करीब 10 घुटनों का प्रत्यारोपण किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, घुटनों के जोड़ में घिसाव, मोटापा, चोट और नियमित व्यायाम की कमी समस्या को बढ़ा सकती है। कई मरीज 45 वर्ष से अधिक उम्र में ही घुटनों में गंभीर दर्द और चलने-फिरने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। हालांकि, घुटनों में दर्द होने वाले प्रत्येक मरीज को प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं होती। जांच के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, व्यायाम और अन्य उपचार से भी राहत दिलाने का प्रयास किया जाता है।
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हर मरीज के लिए सर्जरी जरूरी नहीं
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि शंकर गौर ने बताया कि घुटनों की समस्या लेकर आने वाले मरीजों में 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या अधिक है। मरीजों को उपचार के साथ काउंसलिंग भी दी जाती है। जिन मरीजों को दवा और नियमित व्यायाम से आराम मिल सकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से घुटना प्रत्यारोपण कराने की सलाह नहीं दी जाती। अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार किया जाता है। प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में करीब पांच दिन का समय लग सकता है।
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मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली भी कारण
डॉ. रवि शंकर गौर के अनुसार, बढ़ता वजन घुटनों के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठना, नियमित व्यायाम नहीं करना, चोट लगना और उम्र के साथ जोड़ों में होने वाला प्राकृतिक घिसाव भी दर्द का कारण बन सकता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से भी घुटनों में घिसाव जल्दी शुरू हो सकता है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, वजन नियंत्रित रखना, नियमित पैदल चलना और चिकित्सक की सलाह से मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करना जरूरी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें और घुटनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। यदि लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी हो तो खुद से दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर उपचार मिलने से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत भी टल सकती है।