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जेईई एडवांस: ऑल इंडिया रैंक हासिल कर टॉप-200 में शहर के तीन युवा
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रमनीत । ऑल इंडिया में 146वां रैंक ।
- फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद। ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस के शुक्रवार को जारी परीक्षा परिणाम में मॉर्डन विद्या निकेतन (एमवीएन) के तीन छात्रों ने ऑल इंडिया रैंक में टॉप-200 में जगह बनाई है। इसमें यूपीएसईई में टॉप-3 रैंक हासिल कर चुके धैर्य गुप्ता ने ऑल इंडिया 141वीं रैंक हासिल की है। रमणीत सिंह ने ऑल इंडिया 146वीं और निकेत जैन ने 175वीं रैंक हासिल की है। तीनों ही युवा आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग कर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं।
कम से कम दो से तीन वर्षों की कोचिंग और सोशल मीडिया से दूरी के बाद शहर के तीन युवा जेईई के टॉप-200 में जगह बना सके हैं। इस दौरान विषय विशेष में संदेह को दूर करने के लिए दोस्तों, अध्यापकों व कोचिंग से जुड़े वॉट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया था। सफलता की कहानी साझा करते हुए तीनों मेधावियों ने कोचिंग के अलावा सेल्फ स्टडी को सफलता का श्रेय दिया है। यह मेधावी मानते हैं कि एनसीईआरटी किताबें आधारभूत समझ के लिए काफी मायने रखती हैं। एनसीईआरटी आधारित किताबों की समझ रखने वाला विद्यार्थी सफलता के पायदान पर आसानी से चढ़ सकता है। 16 जून से शुरू होने वाली दाखिला काउंसलिंग में तीनों मेधावी आईआईटी दिल्ली के बाद आईआईटी-कानपुर, खड़गपुर और मद्रास को वरीयता देना चाहते हैं।
धैर्य गुप्ता ने दिल्ली आईआईटी दाखिले के लिए की कड़ी मेहनत
चार्मवुड विलेज में रहने वाले धैर्य गुप्ता ने जेईई एडवांस में 372 में से 263 अंक हासिल कर एआईआर-141 में जगह बनाई है। जेईई मेंस में उन्होंने 66वीं रैंक हासिल की थी। जबकि यूपीएसईई-2019 परिणाम में ऑल इंडिया तीसरा रैंक हासिल किया था। धैर्य के पिता अमित कुमार और मां लीना दोनों ही पेशे से इंजीनियर हैं। धैर्य बताते हैं कि उनके माता-पिता भी टॉपर रहे हैं। परिवार की इस मेधावी रीत को ही धैर्य आगे बढ़ा रहे हैं। धैर्य के पिता अमित ने बेटे की टॉप-200 रैंक के लिए स्कूल और बेटे की कड़ी मेहनत को श्रेय दिया है।
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रमणीत ने सोशल मीडिया से रहे काफी दूर
सोशल मीडिया से दूरी और किताबों से प्यार ही रमणीत की सफलता का मूल मंत्र है। सेक्टर-14 में रहने वाली रमणीत सिंह ने जेईई एडवांस में 146वां रैंक हासिल किया है। जबकि मेंस में वह 113वें स्थान पर थे। रमणीत के पिता संदीप सिंह भी पेशे से इंजीनियर हैं और मां रशिका गृहणी हैं। रमणीत गणित में अभ्यास, भौतिक विज्ञान की अवधारणा (कांस्पेट) और रसायन शास्त्र में एनसीईआरटी की पढ़ाई को अहम मानते हैं। रमणीत ने लगातार दो साल कोचिंग और कम से कम 6 घंटे सेल्फ स्टडी के बाद यह सफलता हासिल की है।
निकेत जैन ने कमजोरी को बनाया ताकत
372 में से 258 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 175वीं रैंक हासिल करने वाले निकेत जैन का कहना है कि उन्होंने लगातार तीन साल अपनी कमजोरी पर काम किया है। इसमें रसायन शास्त्र में इनओर्गेनिक खंड, भौतिक विज्ञान में ध्वनि व तरंग के बारे में परीक्षा के वक्त तक काफी ध्यान से पढ़ना पड़ा। 175वीं रैंक हासिल करने में निकेत के अध्यापक माता पिता ने काफी सहयोग दिया। निकेत के पिता मनोज कुमार जैन कंप्यूटर साइंस के लेक्चरार हैं और मां निधि कुमार जैन सेक्टर-17 स्थित मॉर्डन स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाती हैं।
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कम से कम दो से तीन वर्षों की कोचिंग और सोशल मीडिया से दूरी के बाद शहर के तीन युवा जेईई के टॉप-200 में जगह बना सके हैं। इस दौरान विषय विशेष में संदेह को दूर करने के लिए दोस्तों, अध्यापकों व कोचिंग से जुड़े वॉट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया था। सफलता की कहानी साझा करते हुए तीनों मेधावियों ने कोचिंग के अलावा सेल्फ स्टडी को सफलता का श्रेय दिया है। यह मेधावी मानते हैं कि एनसीईआरटी किताबें आधारभूत समझ के लिए काफी मायने रखती हैं। एनसीईआरटी आधारित किताबों की समझ रखने वाला विद्यार्थी सफलता के पायदान पर आसानी से चढ़ सकता है। 16 जून से शुरू होने वाली दाखिला काउंसलिंग में तीनों मेधावी आईआईटी दिल्ली के बाद आईआईटी-कानपुर, खड़गपुर और मद्रास को वरीयता देना चाहते हैं।
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धैर्य गुप्ता ने दिल्ली आईआईटी दाखिले के लिए की कड़ी मेहनत
चार्मवुड विलेज में रहने वाले धैर्य गुप्ता ने जेईई एडवांस में 372 में से 263 अंक हासिल कर एआईआर-141 में जगह बनाई है। जेईई मेंस में उन्होंने 66वीं रैंक हासिल की थी। जबकि यूपीएसईई-2019 परिणाम में ऑल इंडिया तीसरा रैंक हासिल किया था। धैर्य के पिता अमित कुमार और मां लीना दोनों ही पेशे से इंजीनियर हैं। धैर्य बताते हैं कि उनके माता-पिता भी टॉपर रहे हैं। परिवार की इस मेधावी रीत को ही धैर्य आगे बढ़ा रहे हैं। धैर्य के पिता अमित ने बेटे की टॉप-200 रैंक के लिए स्कूल और बेटे की कड़ी मेहनत को श्रेय दिया है।
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रमणीत ने सोशल मीडिया से रहे काफी दूर
सोशल मीडिया से दूरी और किताबों से प्यार ही रमणीत की सफलता का मूल मंत्र है। सेक्टर-14 में रहने वाली रमणीत सिंह ने जेईई एडवांस में 146वां रैंक हासिल किया है। जबकि मेंस में वह 113वें स्थान पर थे। रमणीत के पिता संदीप सिंह भी पेशे से इंजीनियर हैं और मां रशिका गृहणी हैं। रमणीत गणित में अभ्यास, भौतिक विज्ञान की अवधारणा (कांस्पेट) और रसायन शास्त्र में एनसीईआरटी की पढ़ाई को अहम मानते हैं। रमणीत ने लगातार दो साल कोचिंग और कम से कम 6 घंटे सेल्फ स्टडी के बाद यह सफलता हासिल की है।
निकेत जैन ने कमजोरी को बनाया ताकत
372 में से 258 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 175वीं रैंक हासिल करने वाले निकेत जैन का कहना है कि उन्होंने लगातार तीन साल अपनी कमजोरी पर काम किया है। इसमें रसायन शास्त्र में इनओर्गेनिक खंड, भौतिक विज्ञान में ध्वनि व तरंग के बारे में परीक्षा के वक्त तक काफी ध्यान से पढ़ना पड़ा। 175वीं रैंक हासिल करने में निकेत के अध्यापक माता पिता ने काफी सहयोग दिया। निकेत के पिता मनोज कुमार जैन कंप्यूटर साइंस के लेक्चरार हैं और मां निधि कुमार जैन सेक्टर-17 स्थित मॉर्डन स्कूल में गणित और विज्ञान पढ़ाती हैं।

धैर्य गुप्ता । ऑल इंडिया 141वां रैंक ।- फोटो : Faridabad

निकेत जैन । ऑल इंडिया में 175 वां रैंक ।- फोटो : Faridabad