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निगम के सामुदायिक केंद्र बुक करना होगा महंगा
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फरीदाबाद। नगर निगम सामुदायिक केंद्रों को ठेेके पर देने जा रहा है। इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है। ऐसे में निगम के सामुदायिक केंद्र महंगे हो सकते हैं। निगम ने सामुदायिक केंद्रों को तीन ग्रुपों में रखकर आरक्षित बोली (मूल रेट) रखा है। इसकी निविदा 21 जून को खोली जाएगी। ठेकेदार को भी सामुदायिक भवनों के बुकिंग संबंधी कार्य ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा।
निगम अपनी आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए गांवों की जमीनों को पट्टे पर देने और मोबाइल कंपनियों को टावर के लिए जमीन उपलब्ध कराने के अलावा संपत्ति कर वसूली पर जोर दे रहा है। इसी के तहत अब सामुदायिक केंद्र को ठेके पर देने जा रहा है। निगम क्षेत्र में करीब 100 सामुदायिक भवन हैं। अभी कई जगहों पर सामुदायिक भवनों का संचालन आरडब्ल्यूए भी कर रहा है। वहीं, कुुछेेक में पूर्व पार्षदों ने ऑफिस बनाकर कब्जा किया हुआ है। इसी को देखते हुए निगम ने करीब दो माह पहले सामुदायिक केंद्रों को ऑनलाइन बुक कराने की योजना बनाई थी। इसे लेकर सरल पोर्टल पर ब्योरा भी अपलोड कर दिया गया था लेकिन निगम के आलाधिकारी ऑनलाइन करने के बजाय ठेके पर देने का सुझाव दिया।
गांव के सामुदायिक केंद्रों की बोली तीन लाख सालाना
निगम ने गांव के सामुदायिक केंद्रों की आरक्षित बोली तीन लाख सालाना, कॉलोनियों में पांच लाख और सेक्टरों में आठ लाख रुपये सालाना रखा है। हालांकि इसमें एक सभी या अन्य ठेकेदार पांच-छह सामुदायिक भवन भी ले सकते हैं। लोगों का कहना कि जब बोली महंगी होगी तो ठेकेदार कम रेट में कैसे देगा। अधीक्षण अभियंता समेत पांच कार्यकारी अभियंताओं की एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी ने सामुदायिक केंद्रों को ठेके पर दिए जाने संबंधी सभी बातों को ध्यान में रखकर मसौदा तैयार किया। निगम आयुक्त की मंजूरी के बाद अब निविदा जारी कर दी गई है।
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निगम सामुदायिक भवनों को ठेके पर देने जा रहा है। इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है। ठेके पर देने से बुकिंग रेट महंगे नहीं होंगे।
ओमवीर सिंह, अधीक्षण अभियंता नगर निगम
सामुदायिक भवन पहले के रेट पर मिलने चाहिए। निगम को चाहिए कि लोगों को सामुदायिक भवनों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए। ठेके पर देने से लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नीरज शर्मा, विधायक कांग्रेस
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निगम अपनी आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए गांवों की जमीनों को पट्टे पर देने और मोबाइल कंपनियों को टावर के लिए जमीन उपलब्ध कराने के अलावा संपत्ति कर वसूली पर जोर दे रहा है। इसी के तहत अब सामुदायिक केंद्र को ठेके पर देने जा रहा है। निगम क्षेत्र में करीब 100 सामुदायिक भवन हैं। अभी कई जगहों पर सामुदायिक भवनों का संचालन आरडब्ल्यूए भी कर रहा है। वहीं, कुुछेेक में पूर्व पार्षदों ने ऑफिस बनाकर कब्जा किया हुआ है। इसी को देखते हुए निगम ने करीब दो माह पहले सामुदायिक केंद्रों को ऑनलाइन बुक कराने की योजना बनाई थी। इसे लेकर सरल पोर्टल पर ब्योरा भी अपलोड कर दिया गया था लेकिन निगम के आलाधिकारी ऑनलाइन करने के बजाय ठेके पर देने का सुझाव दिया।
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गांव के सामुदायिक केंद्रों की बोली तीन लाख सालाना
निगम ने गांव के सामुदायिक केंद्रों की आरक्षित बोली तीन लाख सालाना, कॉलोनियों में पांच लाख और सेक्टरों में आठ लाख रुपये सालाना रखा है। हालांकि इसमें एक सभी या अन्य ठेकेदार पांच-छह सामुदायिक भवन भी ले सकते हैं। लोगों का कहना कि जब बोली महंगी होगी तो ठेकेदार कम रेट में कैसे देगा। अधीक्षण अभियंता समेत पांच कार्यकारी अभियंताओं की एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी ने सामुदायिक केंद्रों को ठेके पर दिए जाने संबंधी सभी बातों को ध्यान में रखकर मसौदा तैयार किया। निगम आयुक्त की मंजूरी के बाद अब निविदा जारी कर दी गई है।
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निगम सामुदायिक भवनों को ठेके पर देने जा रहा है। इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है। ठेके पर देने से बुकिंग रेट महंगे नहीं होंगे।
ओमवीर सिंह, अधीक्षण अभियंता नगर निगम
सामुदायिक भवन पहले के रेट पर मिलने चाहिए। निगम को चाहिए कि लोगों को सामुदायिक भवनों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराए। ठेके पर देने से लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नीरज शर्मा, विधायक कांग्रेस