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IRS रिश्वतखोरी मामला: सरकार में अच्छी पैठ होने के कारण दोनों अधिकारी करते थे खुलेआम रिश्वतखोरी

Tue, 21 Feb 2023 10:33 AM IST
पूजा त्रिपाठी धनंजय चौहान, अमर उजाला, फरीदाबाद
धनंजय चौहान, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 21 Feb 2023 10:33 AM IST
सार

एंटी करप्शन ब्यूरो की गिरफ्त में आए आबकारी एवं कराधान विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त धीरज गर्ग की गिरफ्तारी के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। रविवार को उसे पलवल कोर्ट में पेश कर एसीबी ने तीन दिन की रिमांड पर लिया है। उससे पूछताछ जारी है।

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IRS dheeraj garg bribery case one other officer name comes in case had good reputation in government so openly
मास्क में आईआरएस आरोपी धीरज गर्ग, अधिकारियों की गिरफ्त में - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद में आईआरएस धीरज गर्ग के रिश्वतखोरी मामले में दो अन्य अधिकारियों का भी नाम सामने आ रहा है। सूत्रों ने बताया कि दोनों अधिकारियों का सरकार में अच्छा दबदबा है। फिलहाल एक गुरुग्राम में तैनात है तो दूसरा पंचकूला में है। दोनों अधिकारियों के बलबूते ही आरोपी धीरज प्रदेशभर में ट्रांसपोर्टर्स पर अपनी धौंस जमाता था।

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ठेकेदार के इशारे पर ट्रांसपोर्टर्स पर कार्रवाई होती थी। एक मामले में रिश्वत न देने पर ट्रांसपोर्टर अमरीश चौधरी के रिश्तेदार का ट्रक सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद भी पांच दिन तक अधिकारियों ने अपने कब्जे में रखा था। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।
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एंटी करप्शन ब्यूरो की गिरफ्त में आए आबकारी एवं कराधान विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त धीरज गर्ग की गिरफ्तारी के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। रविवार को उसे पलवल कोर्ट में पेश कर एसीबी ने तीन दिन की रिमांड पर लिया है। उससे पूछताछ जारी है।
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उक्त अधिकारी से इस गोरखधंधे में शामिल लोगों की लिस्ट खंगाली जा रही है। ट्रांसपोर्टर अमरीश चौधरी ने बताया कि दो साल पहले फरीदाबाद जीएसटी विभाग में तैनात उच्च अधिकारियों का काफी दबदबा था। इनमें से एक अधिकारी की सरकार में एक मंत्री के साथ अच्छी पैठ है।

उन्होंने ही आरोपी धीरज की ऊपर सेटिंग कराई थी। इसके आधार पर ही आरोपी गर्ग फरीदाबाद-पलवल के ट्रांसपोर्टरों से करोड़ों की वसूली करता था। इसके लिए बाकायदा पलवल और गाजियाबाद के दो ट्रांसपोर्टर ठेकेदार बने हुए थे। दिल्ली से निकलने वाले सभी ट्रकों को पास कराने के लिए ये ठेकेदार लाखों की मंथली वसूलते थे।

75 चहेते ठेकेदारों की बनाई थी लिस्ट

इसके लिए बाकायदा 75 ट्रांसपोर्टर्स की लिस्ट तैयार की गई थी, जो दो नंबर की थी। इसमें गुटका, पान मसाला वाले करीब पांच लाख रुपये महीना रिश्वत देते थे, किराना वाले करीब डेढ़ लाख रुपये, स्क्रैप से जुड़े ट्रांसपोर्टर करीब पांच लाख रुपये, सुपारी और तांबा वाले ट्रांसपोर्टर्स सात से आठ लाख रुपये देते थे।

इस तरह हर माह करीब 4.50 करोड़ रुपये की उगाही की जाती थी। इसमें से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये तीन अधिकारियों में बंटते थे। बाकी ठेकेदार खुद रखता था। ठेकेदार ही लिस्ट में शामिल गाड़ियों को ही बॉर्डर तक पास कराते थे। ट्रांसपोर्टरों से वसूली गई रकम को ये ठेकेदार अधिकारियों तक पहुंचाते थे। एसीबी अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने में जुटी है।

पांच दिन गाड़ी को रखा था कब्जे में

अमरीश चौधरी ने बताया कि दो साल पहले ठेकेदारों ने उनके रिश्तेदार की गाड़ी को रोड साइड जांच के दौरान पकड़ लिया था। उनसे मंथली बांधने और रिश्वत देने की बात करने लगे। उनके इन्कार करने पर ठेकेदार के इशारे पर अधिकारियों ने गाड़ी को कब्जे में ले लिया और पांच दिन तक कब्जे में रखा, पैसों की डिमांड करते रहे। अंत में पैसे नहीं मिलने पर छोड़ दिया।

दिल्ली से लोड गाड़ियों को होडल तक कराते थे पास

सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद जब व्यापारियों पर शिकंजा कसना शुरू हुआ तो उसमें आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी अवसर तलाशने लगे। दिल्ली स्थित ट्रांसपोर्ट नगर, संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर और लाहौरी गेट से सैकड़ों की संख्या में ट्रकों में परचून और पान मसाला आदि का सामान लोड होता था। इन ट्रकों को बिना किसी रोक टोक के होडल बार्डर तक पास कराने का ठेका गाजियाबाद और पलवल के दो ट्रांसपोर्टर लेते थे। जो भी गाड़ियां दिल्ली से निकलती थीं, उन ट्रांसपोर्टरों की लिस्ट फरीदाबाद और पलवल में चेकिंग करने वाले आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों के पास होती थी। चेकिंग करने वाले अधिकारी लिस्ट के अनुसार गाड़ियों को बिना चेकिंग के ही आगे जाने देते थे।

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