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Faridabad News: लड़के की चाहत में मां-बाप ने की नवजात बच्ची से क्रूरता, मौत के बाद केस दर्ज
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- डेढ़ माह पहले हुई थी बच्ची की मौत
- हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर नवजात के माता-पिता को बनाया गया आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सूरजकुंड क्षेत्र में लड़के की चाहत में एक दंपती ने अपनी नवजात बच्ची के साथ इस हद तक क्रूरता की कि उसकी मौत हो गई। पहले तो मां ने बच्ची को अपना दूध नहीं पिलाया और जब स्वास्थ्य परामर्श के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनके घर पहुंचे तो पिता ने प्रवेश नहीं करने दिया। चाइल्ड लाइन के सहयोग से किसी प्रकार बच्ची को बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया तो इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर सूरजकुंड थाना पुलिस ने डेढ़ माह बाद बच्ची के मां-बाप पर नवजात बच्ची से क्रूरता का केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। पुलिस मामले में जल्द मृतक बच्ची के माता-पिता से पूछताछ करेगी।
सेक्टर-39 स्थित एक सरकारी डिलीवरी हट में 16 मई को एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया था। घर में दो बच्ची पहले से होने की वजह से वह तीसरी बच्ची के जन्म से काफी दुखी थी। इस दौरान डॉक्टरों के समझाने के बावजूद उसने नवजात को अपना दूध पिलाने से मना कर दिया। इस कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों को दी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. विनीता ने डॉ. भारती को तुंरत फोन कर बच्ची के परिजनों को समझाने के आदेश दिए। डॉ. विनीता ने डॉ.भारती को बताया कि बच्ची के गले पर चोट के निशान हैं। इससे नवजात की हालत नाजुक बनी हुई है। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारी ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क किया और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या बीके अस्पताल में इलाज के दाखिल कराने के आदेश दिए। इसके बावजूद आरोपी माता-पिता ने डॉक्टर की बात मानने से इंकार कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जब बच्चे के स्वास्थ्य परामर्श के लिए उनके घर पहुंचे तो उन्हें घर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
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चाइल्ड लाइन ने बच्ची को कराया अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की जानकारी 1098 पर फोन करके चाइल्ड लाइन को दी। अधिकारियों के सहयोग से बच्ची को बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 10 जून को मामला हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संज्ञान में आया। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर बच्ची के माता-पिता के खिलाफ क्रूरता की धारा में केस दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मजदूरी करता है पिता
मृत बच्ची का परिवार शिव दुर्गा विहार में रहता है। पिता मजदूरी करता है। आशंका है कि तीसरी बच्ची पैदा होने के बाद लड़के की चाह कर रहे मां-बाप अंधविश्वास में आकर यह कदम उठा बैठे होंगे। वहीं पुलिस को आशंका है कि बच्ची की गला दबाकर हत्या की गई होगी। पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। पुलिस रोहतक पीजीआई की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।
प्रसव के बाद महिलाओं को मनोवैज्ञानिक से लें परामर्श
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अंकुर ने बताया कि मां बनने का अहसास एक औरत के लिए सबसे शानदार अनुभव है। इस दौरान मां को भी उतने ही स्नेह और देखभाल की जरूरत होती है, जितना कि बच्चे को। इस दौरान मां बहुत नाजुक मानसिक स्थिति से गुजरती है। इसमें मां को डिप्रेशन होने लगता है। इसके लक्षण सामान्य डिप्रेशन की तरह ही होते हैं। इसके लक्षण प्रसव के एक माह के अंदर दिखाई देने लगते हैं। मां उदास रहने लगती है। तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्से जैसे बदलाव आते हैं।
अमूमन यह बीमारी पकड़ में नहीं आती है। घरवाले सोचते हैं कि शायद कमजोरी हो गई है, इसलिए एनर्जी लेवल कम हो गया है। इसी के साथ पोस्टमार्टम साइकोसिस यह अत्यंत खतरनाक बीमारी है। इसमें मां बच्चे की हत्या तक कर सकती है। ज्यादातर यह उन मरीजों को होता है जिन्हें पहले भी किसी प्रकार का डिप्रेशन हो। ये परिवार के दबाव के अलावा अन्य कारणों से भी हो सकता है, इसलिए प्रसव के बाद मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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- हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर नवजात के माता-पिता को बनाया गया आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सूरजकुंड क्षेत्र में लड़के की चाहत में एक दंपती ने अपनी नवजात बच्ची के साथ इस हद तक क्रूरता की कि उसकी मौत हो गई। पहले तो मां ने बच्ची को अपना दूध नहीं पिलाया और जब स्वास्थ्य परामर्श के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनके घर पहुंचे तो पिता ने प्रवेश नहीं करने दिया। चाइल्ड लाइन के सहयोग से किसी प्रकार बच्ची को बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया तो इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर सूरजकुंड थाना पुलिस ने डेढ़ माह बाद बच्ची के मां-बाप पर नवजात बच्ची से क्रूरता का केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। पुलिस मामले में जल्द मृतक बच्ची के माता-पिता से पूछताछ करेगी।
सेक्टर-39 स्थित एक सरकारी डिलीवरी हट में 16 मई को एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया था। घर में दो बच्ची पहले से होने की वजह से वह तीसरी बच्ची के जन्म से काफी दुखी थी। इस दौरान डॉक्टरों के समझाने के बावजूद उसने नवजात को अपना दूध पिलाने से मना कर दिया। इस कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों को दी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. विनीता ने डॉ. भारती को तुंरत फोन कर बच्ची के परिजनों को समझाने के आदेश दिए। डॉ. विनीता ने डॉ.भारती को बताया कि बच्ची के गले पर चोट के निशान हैं। इससे नवजात की हालत नाजुक बनी हुई है। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारी ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क किया और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या बीके अस्पताल में इलाज के दाखिल कराने के आदेश दिए। इसके बावजूद आरोपी माता-पिता ने डॉक्टर की बात मानने से इंकार कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जब बच्चे के स्वास्थ्य परामर्श के लिए उनके घर पहुंचे तो उन्हें घर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
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चाइल्ड लाइन ने बच्ची को कराया अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की जानकारी 1098 पर फोन करके चाइल्ड लाइन को दी। अधिकारियों के सहयोग से बच्ची को बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 10 जून को मामला हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संज्ञान में आया। आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर बच्ची के माता-पिता के खिलाफ क्रूरता की धारा में केस दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मजदूरी करता है पिता
मृत बच्ची का परिवार शिव दुर्गा विहार में रहता है। पिता मजदूरी करता है। आशंका है कि तीसरी बच्ची पैदा होने के बाद लड़के की चाह कर रहे मां-बाप अंधविश्वास में आकर यह कदम उठा बैठे होंगे। वहीं पुलिस को आशंका है कि बच्ची की गला दबाकर हत्या की गई होगी। पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। पुलिस रोहतक पीजीआई की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।
प्रसव के बाद महिलाओं को मनोवैज्ञानिक से लें परामर्श
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अंकुर ने बताया कि मां बनने का अहसास एक औरत के लिए सबसे शानदार अनुभव है। इस दौरान मां को भी उतने ही स्नेह और देखभाल की जरूरत होती है, जितना कि बच्चे को। इस दौरान मां बहुत नाजुक मानसिक स्थिति से गुजरती है। इसमें मां को डिप्रेशन होने लगता है। इसके लक्षण सामान्य डिप्रेशन की तरह ही होते हैं। इसके लक्षण प्रसव के एक माह के अंदर दिखाई देने लगते हैं। मां उदास रहने लगती है। तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्से जैसे बदलाव आते हैं।
अमूमन यह बीमारी पकड़ में नहीं आती है। घरवाले सोचते हैं कि शायद कमजोरी हो गई है, इसलिए एनर्जी लेवल कम हो गया है। इसी के साथ पोस्टमार्टम साइकोसिस यह अत्यंत खतरनाक बीमारी है। इसमें मां बच्चे की हत्या तक कर सकती है। ज्यादातर यह उन मरीजों को होता है जिन्हें पहले भी किसी प्रकार का डिप्रेशन हो। ये परिवार के दबाव के अलावा अन्य कारणों से भी हो सकता है, इसलिए प्रसव के बाद मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।