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Faridabad News: फ्लायर या बॉटम घाटा न सहें इसलिए लगा रहे घटिया निर्माण सामग्री

Sat, 22 Jul 2023 10:19 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Updated Sat, 22 Jul 2023 10:19 PM IST
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In order not to bear the loss, substandard construction materials are being used
कैसे हो विकास: सरकार के रेट इतने कम, ठेकेदार नहीं भर रहे टेंडर
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- सरकार दे रही ईंट का रेट पांच रुपये, बाजार में रेट 8.30 रुपये
- कार्य होने के एक महीने बाद ही टूटकर बिखर जाता है निर्माण


अनूप पाराशर

फरीदाबाद। गांवों में विकास केवल कागजों में हो रहा है, धरातल पर कुछ नहीं है, क्योंकि विकास कार्य के लिए सरकार जो ईं-टेंडर छोड़ रही है, उसमें एक ईंट के पांच रुपये मिलेंगे। जबकि, बाजार में एक ईंट 8.50 रुपये की मिल रही है, इससे ठेकेदार एक ईंट लगाने पर साढ़े 3 रुपये घाटा सहन करेगा। इस तरह का घाटा केवल ईंट पर ही नहीं, क्रशर, रोड़ी, सीमेंट तथा लेबर पर ही सहन करना पड़ रहा है। सरकार के इस नियम के चलते गांवों में विकास कार्य ठप हो गए हैं।



सरकार द्वारा छोड़े जाने वाले ई-टेंडरों को ठेकेदारों ने लेना बंद कर दिया है। ठेकेदार अब ईं-टेंडर के लिए बिट नहीं लगा रहे हैं। इससे गांवों में होने वाले विकास कार्य रुक गए हैं। क्योंकि कार्य के लिए जो रेट निर्माण सामग्री के लिए दिए जा रहे हैं, वे काफी कम हैं। ऐसे में काम लेने पर ठेकेदार पूरी तरह से घाटे में जा रहा है। घाटे को पूरा करने पर इतनी मिलावट की जाती है कि निर्माण ज्यादा दिन नहीं चलता। यही कारण है कि सड़कें बनने के बाद एक से दो महीने ही चलती हैं।
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सरकार ने तय किए हैं ये रेट, बाजार में कीमत यह

प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्य में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री के लिए अपने रेट तय किए हैं। यह रेट पिछले काफी सालों से चले आ रहे हैं। इनमें सरकार द्वारा अब भी इजाफा नहीं किया गया है, जबकि निर्माण सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकार द्वारा ईंट की कीमत प्रति हजार 5100 तय की हुई है। इस तरह से एक ईंट लगाने पर ठेकेदार को पांच रुपये मिलेंगे। बाजार में ईंट की कीमत 8.30 रुपये है। इसी तरह से क्रशर का रेट सरकार द्वारा 48 रुपये फुट दिया जा रहा है। बाजार में क्रशर का रेट 52 से 55 रुपये फुट है। रोड़ी-बजरी का रेट सरकार द्वारा 42 रुपये दिया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 48 से 50 रुपये फुट है। सीमेंट का रेट सरकार द्वारा 315 रुपये दिया जा रहा है, जबकि बाजार में सीमेंट का एक कट्टा 370 से 380 रुपये में मिल रहा है। लेबर का रेट भी सरकार द्वारा काफी कम दिया जा रहा है। मिस्त्री को जहां सरकार द्वारा 643 रुपये प्रति दिन का दिया जा रहा है, वहीं मजदूर को 572 रुपये मिल रहा है। जबकि, ठेकेदार को मिस्त्री 800 रुपये तथा मजदूर 600 रुपये में मिल रहा है। इस तरह से ठेकेदार को सरकार द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य में हर तरह से घाटा सहन करना पड़ रहा है।
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मिल रहा भ्रष्टाचार को बढ़ावा



सरकार द्वारा तय रेट काफी कम देने के कारण ठेकेदार को लाखों रुपये का घाटा होता है। ऐसे में ठेकेदार उस घाटे को पूरा करने के लिए अधिकारियों से साठगांठ कर घटिया निर्माण सामग्री लगाता है। इससे सड़कें, पुल व अन्य निर्माण कार्य एक से दो महीने में ही टूट जाते हैं। सरकार की इस नीति से गांव में विकास कार्य में तो गुणवत्ता रहती ही नहीं है, साथ ही सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले करोड़ों रुपये अधिकारियों व ठेकेदारों की जेब में पहुंच जाते हैं।


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काफी सरपंच मुझसे इस समस्या को लेकर मिले हैं। उनकी समस्या जायज है। मैंने इस बारे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बात की है। मेरा प्रयास हैं कि ऐसा नियम बनाया जाए, जिससे विकास कार्य के लिए लगने वाले टेंडर ठेकेदार लें। गुणवत्ता युक्त निर्माण सामग्री लगे और किसी को घाटा न हो।

- कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय राज्यमंत्री
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