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अवैध रूप से गर्भपात करने वाले केंद्र का भंडाफोड़
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फरीदाबाद। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन दिन की कड़ी मेहनत के बाद नंगला एंक्लेव में अवैध रूप से चल रहे गर्भपात केंद्र का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि महिला सहित दो अन्य आरोपी फरार हो गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया है। दोनों आरोपी पति-पत्नी बताए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को पिछले काफी समय से सूचना मिल रही थी कि नंगला एंक्लेव पार्ट-एक में करीब आठ साल से सत्यपाल सिंह अपनी पत्नी धर्मवती के साथ अवैध रूप से गर्भपात व मेडिकल प्रैक्टिस कर रहा है। सूचना थी कि वह छह माह तक की गर्भवती महिलाओं का भी गर्भपात करता है। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीश आर्य, एसएमओ खेड़ी कलां डॉ. हरजिंद्र, एमओ तिगांव डॉ. राखी, ड्रग कंट्रोल अधिकारी संदीप गहलावत की एक टीम का गठन किया।
डॉ. हरीश आर्य ने बताया कि 15 दिसंबर को एक महिला को फर्जी तरीके से 14 सप्ताह की गर्भवती बनाकर गर्भपात के लिए भेजा गया, मगर आरोपी इतने शातिर थे कि पहले दिन उन्होंने ग्राहक को करीब तीन घंटे बिठाए रखा। उसके बाद वापस लौटा दिया और अगले दिन बुलाया। इस दौरान आरोपी चारों तरफ नजर बनाए हुए थे। अगले दिन गर्भवती को एक निजी अस्पताल भेज दिया। जिस अस्पताल में भेजा वहां अवैध गर्भपात होता नहीं था। तीसरे दिन बृहस्पतिवार अल सुबह गर्भवती महिला को फिर आरोपियों के क्लीनिक पर भेजा गया।
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इस बार आरोपी चाल में फंस गए। केंद्र में जब महिला के गर्भपात की तैयारी की जा रही थी तो टीम ने तुरंत छापा मार दिया। इस दौरान आरोपी महिला फरार हो गई। जबकि एक डॉक्टर मौके पर नहीं मिला। मौके से फरार हुई महिला का पति गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में सभी के खिलाफ थाना सारन में एमटीपी एक्ट, आईएमसी एक्ट, डीएंडसी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
12वीं फेल सत्यपाल सिंह ने लिखता था एमबीबीएस
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया व टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. हरीश आर्य ने बताया कि जब टीम ने मौके पर छापा मारा तो देखा कि वहां ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम सहित पूरा अस्पताल तैयार कर रखा था। पूछताछ करने पर पता चला कि डॉ. कृष्ण कुमार प्रैक्टिस करता है। यहां डॉ. कृष्ण कुमार के नाम से मोहर, लैटर पैड व कुछ अन्य सामग्री भी मिली, मगर डॉ. कृष्ण कुमार मौजूद नहीं थे। इसके बाद टीम यह देखकर अचंभित हो गई कि यहां मौजूद सत्यपाल सिंह खुद ही महिला का गर्भपात करने वाला था। उन्हें यहां से एक विजिटिंग कार्ड भी मिला जिस पर लिखा था डॉ. सत्यपाल सिंह एमबीबीएस। वह यहां आने वाले लोगों को भी स्वयं को एमबीबीएस डॉक्टर ही बताता था। उन्होंने बताया कि यहां इस अवैध गर्भपात केंद्र की छत खाली ग्लूकोज की बोतलें, सिरिंज और बायोमैडिकल वेस्ट से पटी पड़ी थी।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को पिछले काफी समय से सूचना मिल रही थी कि नंगला एंक्लेव पार्ट-एक में करीब आठ साल से सत्यपाल सिंह अपनी पत्नी धर्मवती के साथ अवैध रूप से गर्भपात व मेडिकल प्रैक्टिस कर रहा है। सूचना थी कि वह छह माह तक की गर्भवती महिलाओं का भी गर्भपात करता है। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीश आर्य, एसएमओ खेड़ी कलां डॉ. हरजिंद्र, एमओ तिगांव डॉ. राखी, ड्रग कंट्रोल अधिकारी संदीप गहलावत की एक टीम का गठन किया।
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डॉ. हरीश आर्य ने बताया कि 15 दिसंबर को एक महिला को फर्जी तरीके से 14 सप्ताह की गर्भवती बनाकर गर्भपात के लिए भेजा गया, मगर आरोपी इतने शातिर थे कि पहले दिन उन्होंने ग्राहक को करीब तीन घंटे बिठाए रखा। उसके बाद वापस लौटा दिया और अगले दिन बुलाया। इस दौरान आरोपी चारों तरफ नजर बनाए हुए थे। अगले दिन गर्भवती को एक निजी अस्पताल भेज दिया। जिस अस्पताल में भेजा वहां अवैध गर्भपात होता नहीं था। तीसरे दिन बृहस्पतिवार अल सुबह गर्भवती महिला को फिर आरोपियों के क्लीनिक पर भेजा गया।
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इस बार आरोपी चाल में फंस गए। केंद्र में जब महिला के गर्भपात की तैयारी की जा रही थी तो टीम ने तुरंत छापा मार दिया। इस दौरान आरोपी महिला फरार हो गई। जबकि एक डॉक्टर मौके पर नहीं मिला। मौके से फरार हुई महिला का पति गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में सभी के खिलाफ थाना सारन में एमटीपी एक्ट, आईएमसी एक्ट, डीएंडसी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
12वीं फेल सत्यपाल सिंह ने लिखता था एमबीबीएस
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया व टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. हरीश आर्य ने बताया कि जब टीम ने मौके पर छापा मारा तो देखा कि वहां ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम सहित पूरा अस्पताल तैयार कर रखा था। पूछताछ करने पर पता चला कि डॉ. कृष्ण कुमार प्रैक्टिस करता है। यहां डॉ. कृष्ण कुमार के नाम से मोहर, लैटर पैड व कुछ अन्य सामग्री भी मिली, मगर डॉ. कृष्ण कुमार मौजूद नहीं थे। इसके बाद टीम यह देखकर अचंभित हो गई कि यहां मौजूद सत्यपाल सिंह खुद ही महिला का गर्भपात करने वाला था। उन्हें यहां से एक विजिटिंग कार्ड भी मिला जिस पर लिखा था डॉ. सत्यपाल सिंह एमबीबीएस। वह यहां आने वाले लोगों को भी स्वयं को एमबीबीएस डॉक्टर ही बताता था। उन्होंने बताया कि यहां इस अवैध गर्भपात केंद्र की छत खाली ग्लूकोज की बोतलें, सिरिंज और बायोमैडिकल वेस्ट से पटी पड़ी थी।