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इमरजेंसी में नहीं मिला बेड तो स्ट्रेचर पर इलाज
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फरीदाबाद। बीके अस्पताल में हर रोज सैकड़ों की संख्या में वायरल और डेंगू के मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन अस्पताल की स्थिति ऐसी है कि इमरजेंसी में कोई भी बेड खाली नहीं है। इस कारण इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर और बेंच पर ही उपचार हो रहा है। वहीं कुछ मरीज ऐसे हैं भी जिन्हें स्ट्रेचर भी नसीब नहीं हो रहा। इससे मरीज इलाज के अभाव में सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।
बीके अस्पताल में रोजाना करीब दो हजार मरीज ओपीडी में उपचार के लिए आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल और डेंगू के बताए जा रहे हैं। मंगलवार को उपचार करने आई मरीज चंचल ने बताया कि उनको पिछले कुछ दिनों से बुखार और उल्टी दस्त हो रही है, लेकिन इमरजेंसी में कोई भी बेड खाली नहीं होने की वजह से उनका उपचार बेंच पर किया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कुछ दवा भी मौजूद नहीं है। इसी वजह से उनके पिता के द्वारा एक दवाई बाहर प्राइवेट से मंगवाई गई। इसकी कीमत 50 रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा फरीदाबाद के रहने वाले बृजलाल की पत्नी ने बताया कि पति के शरीर में पानी भर गया है। इसलिए उनको उपचार के लिए बीके अस्पताल लेकर आई थी। बीके अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया है। करीब 2 घंटे हो चुके हैं, लेकिन उनको बेड नहीं मिला है। इसलिए वह स्ट्रेचर पर ही एंबुलेंस का इंतजार कर रही है। लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों के द्वारा कोई सुध नहीं ली गई।
बेड नहीं मिला तो बेटी को गोद में उठाकर ले गए प्राइवेट अस्पताल
अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर पिता अपनी बेटी बेटी को गोद में उठाकर वापस निजी अस्पताल ले गए। कुछ समय के बाद जब मरीज चला गया तो इमरजेंसी में तैनात डॉ. मनीष ने उनके बारे में पूछा तो स्टाफ ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल ले गए हैं, क्योंकि इमरजेंसी में उसको बेड नहीं मिला था।
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इन दिनों वायरल के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसलिए ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों की भीड़ हैं। इमरजेंसी में मरीजों को कोई परेशानी न हो इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ को भी लगाया गया है। कई बार इमरजेंसी में बेड खाली नहीं होते हैं। इसलिए मरीजों का उपचार स्ट्रेचर व बेंच पर किया जाता है। इससे उन्हें समय रहते उपचार मिल सके।
-डॉ. सविता यादव, पीएमओ, बीके अस्पताल
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बीके अस्पताल में रोजाना करीब दो हजार मरीज ओपीडी में उपचार के लिए आते हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल और डेंगू के बताए जा रहे हैं। मंगलवार को उपचार करने आई मरीज चंचल ने बताया कि उनको पिछले कुछ दिनों से बुखार और उल्टी दस्त हो रही है, लेकिन इमरजेंसी में कोई भी बेड खाली नहीं होने की वजह से उनका उपचार बेंच पर किया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कुछ दवा भी मौजूद नहीं है। इसी वजह से उनके पिता के द्वारा एक दवाई बाहर प्राइवेट से मंगवाई गई। इसकी कीमत 50 रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा फरीदाबाद के रहने वाले बृजलाल की पत्नी ने बताया कि पति के शरीर में पानी भर गया है। इसलिए उनको उपचार के लिए बीके अस्पताल लेकर आई थी। बीके अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया है। करीब 2 घंटे हो चुके हैं, लेकिन उनको बेड नहीं मिला है। इसलिए वह स्ट्रेचर पर ही एंबुलेंस का इंतजार कर रही है। लेकिन डॉक्टर और कर्मचारियों के द्वारा कोई सुध नहीं ली गई।
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बेड नहीं मिला तो बेटी को गोद में उठाकर ले गए प्राइवेट अस्पताल
अस्पताल में बेड नहीं मिलने पर पिता अपनी बेटी बेटी को गोद में उठाकर वापस निजी अस्पताल ले गए। कुछ समय के बाद जब मरीज चला गया तो इमरजेंसी में तैनात डॉ. मनीष ने उनके बारे में पूछा तो स्टाफ ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल ले गए हैं, क्योंकि इमरजेंसी में उसको बेड नहीं मिला था।
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इन दिनों वायरल के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसलिए ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों की भीड़ हैं। इमरजेंसी में मरीजों को कोई परेशानी न हो इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ को भी लगाया गया है। कई बार इमरजेंसी में बेड खाली नहीं होते हैं। इसलिए मरीजों का उपचार स्ट्रेचर व बेंच पर किया जाता है। इससे उन्हें समय रहते उपचार मिल सके।
-डॉ. सविता यादव, पीएमओ, बीके अस्पताल