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Faridabad News: हाइब्रिड एपीसी तकनीक से किया कैंसर का सफल इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। निजी अस्पताल में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जीआई रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और उन्नत तकनीकों से उपचार पर चर्चा की।
कार्यक्रम में दो दुर्लभ और जटिल मामलों को साझा किया गया, जिनका सफल उपचार अस्पताल की टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों से किया। अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा ने बताया कि 70 वर्षीय एक मरीज को लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स की शिकायत थी। जांच में बैरेट्स इसोफेगस विद लो-ग्रेड डिसप्लेसिया पाया गया, जो फूड पाइप का एक प्री-कैंसरस स्टेज होता है।
इलाज के दौरान फूडपाइप में विशेष डाई डाली गई, जिससे प्री-कैंसरस सेल्स को चिन्हित कर आर्गन गैस से नष्ट किया गया। मरीज को चार घंटे में ही बिना दर्द के डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, दूसरा केस 33 वर्षीय महिला का था, जो तेज पेट दर्द, मतली और उल्टी की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचीं। इसी प्रक्रिया से इलाज किया गया। अब महिला बिल्कुल स्वस्थ है।
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फरीदाबाद। निजी अस्पताल में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जीआई रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और उन्नत तकनीकों से उपचार पर चर्चा की।
कार्यक्रम में दो दुर्लभ और जटिल मामलों को साझा किया गया, जिनका सफल उपचार अस्पताल की टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों से किया। अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा ने बताया कि 70 वर्षीय एक मरीज को लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स की शिकायत थी। जांच में बैरेट्स इसोफेगस विद लो-ग्रेड डिसप्लेसिया पाया गया, जो फूड पाइप का एक प्री-कैंसरस स्टेज होता है।
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इलाज के दौरान फूडपाइप में विशेष डाई डाली गई, जिससे प्री-कैंसरस सेल्स को चिन्हित कर आर्गन गैस से नष्ट किया गया। मरीज को चार घंटे में ही बिना दर्द के डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, दूसरा केस 33 वर्षीय महिला का था, जो तेज पेट दर्द, मतली और उल्टी की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचीं। इसी प्रक्रिया से इलाज किया गया। अब महिला बिल्कुल स्वस्थ है।
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