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Faridabad News: गला दबाकर पत्नी की हत्या, आत्महत्या का रूप देने वाले पति को उम्रकैद
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पोस्टमार्टम में फांसी से नहीं, गला दबाने से मौत की पुष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दो साल पहले बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र में पत्नी मीना की गला दबाकर हत्या कर शव को फंदे पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने दोषी पति प्रमोद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रमोद को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ था कि मीना की मौत फांसी लगाने से नहीं, बल्कि गला दबाने (एंटी-मॉर्टम स्ट्रैंगुलेशन) से हुई थी। अभियोजन के अनुसार, नौ फरवरी 2024 को मृतका मीना के भाई विकास की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विकास ने पुलिस को बताया था कि उसकी बहन मीना की शादी करीब तीन वर्ष पहले प्रमोद से हुई थी। आठ फरवरी की रात परिवार को सूचना मिली कि मीना ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलने के बाद विकास और अन्य परिजन मीना के ससुराल पहुंचे। वहां मीना के शरीर पर चोटों के निशान देखकर उन्हें मौत के कारण पर संदेह हुआ।
विकास ने आरोप लगाया था कि प्रमोद ने पहले मीना की गला दबाकर हत्या की और इसके बाद शव को फंदे पर लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान कराए गए पोस्टमार्टम में मीना की मौत का कारण गला दबाना सामने आया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम स्ट्रैंगुलेशन का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गला दबाने की प्रक्रिया मृत्यु से पहले हुई थी। यानी मीना की मौत फंदे पर लटकने के कारण नहीं हुई थी। शरीर पर मिले चोटों के निशान भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। अधिवक्ता रविंदर गुप्ता ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा हटाकर हत्या की धारा जोड़ी। इसके साथ ही शव को फंदे पर लटकाकर हत्या के साक्ष्य मिटाने और घटना को आत्महत्या का रूप देने के प्रयास के संबंध में भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। इन साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने तीन अगस्त को प्रमोद को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दो साल पहले बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र में पत्नी मीना की गला दबाकर हत्या कर शव को फंदे पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने दोषी पति प्रमोद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रमोद को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ था कि मीना की मौत फांसी लगाने से नहीं, बल्कि गला दबाने (एंटी-मॉर्टम स्ट्रैंगुलेशन) से हुई थी। अभियोजन के अनुसार, नौ फरवरी 2024 को मृतका मीना के भाई विकास की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विकास ने पुलिस को बताया था कि उसकी बहन मीना की शादी करीब तीन वर्ष पहले प्रमोद से हुई थी। आठ फरवरी की रात परिवार को सूचना मिली कि मीना ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलने के बाद विकास और अन्य परिजन मीना के ससुराल पहुंचे। वहां मीना के शरीर पर चोटों के निशान देखकर उन्हें मौत के कारण पर संदेह हुआ।
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विकास ने आरोप लगाया था कि प्रमोद ने पहले मीना की गला दबाकर हत्या की और इसके बाद शव को फंदे पर लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान कराए गए पोस्टमार्टम में मीना की मौत का कारण गला दबाना सामने आया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम स्ट्रैंगुलेशन का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गला दबाने की प्रक्रिया मृत्यु से पहले हुई थी। यानी मीना की मौत फंदे पर लटकने के कारण नहीं हुई थी। शरीर पर मिले चोटों के निशान भी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बने। अधिवक्ता रविंदर गुप्ता ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा हटाकर हत्या की धारा जोड़ी। इसके साथ ही शव को फंदे पर लटकाकर हत्या के साक्ष्य मिटाने और घटना को आत्महत्या का रूप देने के प्रयास के संबंध में भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। इन साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने तीन अगस्त को प्रमोद को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई थी।