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Faridabad News: जमीन अधिग्रहित किए बिना एचएसवीपी ने बेच दिया प्लॉट

Tue, 16 Jun 2026 12:32 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:32 AM IST
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HSVP sold the plot without acquiring the land.
पूरी रकम लेने के डेढ़ साल बाद एचएसवीपी को पता चली अपनी लापरवाही
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एचएसवीपी की लापरवाही का खामियाजा खरीदार क्यों भुगते : हाई कोर्ट
आवंटी को वैकल्पिक प्लॉट देने का आदेश

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक से प्लॉट की पूरी कीमत वसूलने के बाद यह कहना कि जिस जमीन पर प्लॉट था वह अधिग्रहित ही नहीं थी, पूरी तरह मनमाना और अस्वीकार्य है। अदालत ने एचएसवीपी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित आवंटी को तीन महीने के भीतर उसी क्षेत्र में या समकक्ष स्थान पर वैकल्पिक प्लॉट उपलब्ध कराए। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने मनीष की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

मनीष ने 2022 में हुई ई-नीलामी में फरीदाबाद के सेक्टर-77 में प्लॉट नंबर 142-जीपी के लिए सफल बोली लगाई थी। उन्होंने प्लॉट की पूरी कीमत जमा कर दी थी। इसके बाद जुलाई 2022 में लेटर ऑफ इंटेंट और दिसंबर 2022 में आवंटन पत्र जारी कर दिया गया। एचएसवीपी ने उन्हें कब्जा देने की पेशकश भी कर दी थी।
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जब मनीष मौके पर पहुंचे तो पता चला कि प्लॉट पर पहले से किसी अन्य व्यक्ति का निर्माण है। बाद में एचएसवीपी ने स्वयं स्वीकार किया कि जिस भूमि पर प्लॉट था वह वास्तव में अधिग्रहित ही नहीं की गई थी। प्राधिकरण ने प्लाट रद्द करने और जमा राशि वापस करने का प्रस्ताव दे दिया।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि गलती पूरी तरह एचएसवीपी की थी। नीलामी से पहले भूमि का सत्यापन नहीं किया गया और डेढ़ साल बाद यह तथ्य सामने आया कि जमीन प्राधिकरण की ही नहीं थी। ऐसे में केवल पैसा वापस करना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि इस दौरान संपत्तियों की कीमतों में भारी वृद्धि हो चुकी है। एचएसवीपी ने दलील दी कि ई-नीलामी नीति के अनुसार यदि किसी कारणवश कब्जा नहीं दिया जा सकता तो आवंटी केवल जमा राशि और 5.5 प्रतिशत ब्याज का ही हकदार है। वैकल्पिक प्लॉट देने का प्रावधान नहीं है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला किसी प्राकृतिक आपदा या प्राधिकरण के नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति का नहीं है। यहां समस्या एचएसवीपी की लापरवाही और उचित जांच-पड़ताल न करने के कारण पैदा हुई।
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