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Faridabad News: कोयला और लकड़ी की भट्ठियों पर लौटा होटल कारोबार
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कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हो रही सामान्य, मजबूरन पुराने ढर्रे पर लौट रहे होटल संचालक
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकार द्वारा पिछले सप्ताह कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति सामान्य करने की घोषणा की गई थी, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। शहर के अधिकांश ढाबों और रेस्तरां में अब भी चूल्हों में गैस के बजाय कोयला दहक रहा है। आपूर्ति में देरी के कारण व्यापारियों को मजबूरन पुराने ढर्रे पर लौटना पड़ रहा है।
होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि सरकार की घोषणा को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन सिलिंडर की किल्लत जस की तस है। काम प्रभावित न हो इसके लिए कई संचालकों ने आनन-फानन में नई कोयले की भट्ठियां तैयार करवाई हैं। संचालकों का कहना है कि व्यवसाय चालू रखने के लिए मजबूरी में भट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसके अलावा कई ढाबा और रेस्तरां संचालकों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय गैस एजेंसियां कॉमर्शियल सिलिंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं। ऊंचे दामों पर सिलिंडर बेचे जा रहे हैं, जिससे छोटे व्यापारियों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। उन्होंने बताया कि ब्लैक में सिलिंडर पांच से छह हजार में मिल रहा है। इतना महंगे सिलिंडर से बजट बिगड़ जाएगा।
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गैस संकट से उपजी समस्या का सामना पाइप नेचुरल गैस कनेक्शन वाले होटल संचालक भी कर रहे हैं। संचालकों का कहना है कि पीएनजी होने के बावजूद बैकअप के लिए सिलिंडर जरूरी होता है। गैस की भारी कमी को देखते हुए अब उन्होंने अपनी निर्भरता कम कर दी है और वे भी वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।
शहर का खान-पान उद्योग पूरी तरह से कोयले और लकड़ी की भट्टियों के भरोसे है। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। इसके साथ साथ कॉर्मिशियल सिलिंडर की आपूर्ति भी जल्द से जल्द की जाए।
-- -- बातचीत-- -
स्थिति दिन प्रति दिन बिगड़ती जा रही है। काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इसका असर अब आमंदनी पर पड़ रहा है।- संदीप वर्मा
हम लोग इस इंतजार में थे कि कॉमर्शियल सिलिंडर जल्द उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन अब तक इसकी आपूर्ति नहीं हो सकी है।- मदन अरोरा
गैस न होने की वजह से बहुत दिक्कत आ रही है। पहले कॉमर्शियल सिलिंडर सीधे व्यवसाय वालों को मिल जाते थे। सरकार को प्रयास तेज करने चाहिए। -दिनेश शर्मा
काम करने के लिए नई भट्टी बनवाई हैं। अगर जरूरत होगी तो और भट्टी बनवाएंगे। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, भट्ठियों पर ही काम होगा।- ध्रुव
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सरकार द्वारा पिछले सप्ताह कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति सामान्य करने की घोषणा की गई थी, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। शहर के अधिकांश ढाबों और रेस्तरां में अब भी चूल्हों में गैस के बजाय कोयला दहक रहा है। आपूर्ति में देरी के कारण व्यापारियों को मजबूरन पुराने ढर्रे पर लौटना पड़ रहा है।
होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि सरकार की घोषणा को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन सिलिंडर की किल्लत जस की तस है। काम प्रभावित न हो इसके लिए कई संचालकों ने आनन-फानन में नई कोयले की भट्ठियां तैयार करवाई हैं। संचालकों का कहना है कि व्यवसाय चालू रखने के लिए मजबूरी में भट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है।
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इसके अलावा कई ढाबा और रेस्तरां संचालकों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय गैस एजेंसियां कॉमर्शियल सिलिंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं। ऊंचे दामों पर सिलिंडर बेचे जा रहे हैं, जिससे छोटे व्यापारियों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। उन्होंने बताया कि ब्लैक में सिलिंडर पांच से छह हजार में मिल रहा है। इतना महंगे सिलिंडर से बजट बिगड़ जाएगा।
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गैस संकट से उपजी समस्या का सामना पाइप नेचुरल गैस कनेक्शन वाले होटल संचालक भी कर रहे हैं। संचालकों का कहना है कि पीएनजी होने के बावजूद बैकअप के लिए सिलिंडर जरूरी होता है। गैस की भारी कमी को देखते हुए अब उन्होंने अपनी निर्भरता कम कर दी है और वे भी वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।
शहर का खान-पान उद्योग पूरी तरह से कोयले और लकड़ी की भट्टियों के भरोसे है। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। इसके साथ साथ कॉर्मिशियल सिलिंडर की आपूर्ति भी जल्द से जल्द की जाए।
स्थिति दिन प्रति दिन बिगड़ती जा रही है। काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इसका असर अब आमंदनी पर पड़ रहा है।- संदीप वर्मा
हम लोग इस इंतजार में थे कि कॉमर्शियल सिलिंडर जल्द उपलब्ध हो जाएगा, लेकिन अब तक इसकी आपूर्ति नहीं हो सकी है।- मदन अरोरा
गैस न होने की वजह से बहुत दिक्कत आ रही है। पहले कॉमर्शियल सिलिंडर सीधे व्यवसाय वालों को मिल जाते थे। सरकार को प्रयास तेज करने चाहिए। -दिनेश शर्मा
काम करने के लिए नई भट्टी बनवाई हैं। अगर जरूरत होगी तो और भट्टी बनवाएंगे। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, भट्ठियों पर ही काम होगा।- ध्रुव