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Faridabad News: 500 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन
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दोपहर में महिलाएं करेंगी पूजा-पाठ, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। शहर में 500 से अधिक स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं दोपहर के समय रीति रिवाज के साथ पूजा-पाठ करेंगी। रात को जगह-जगह शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी में रविवार को कई जगहों पर होली डांडा रख दिए गए थे। सोमवार को महिलाएं पूजा करेंगी। वहीं शाम को होलिका दहन की पूजा के लिए सबसे पहले जातकों को होलिका के पास जाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। इसके बाद पूजन सामग्री जिसमें कि जल, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, हल्दी साबुत, मूंग, गुलाल और बताशे के साथ ही नई फसल यानी कि गेहूं और चने की पकी बालियां ले लें। इसके बाद होलिका के पास ही गाय के गोबर से बनी बुरकलियां की माला रखते हैं। इसके बाद कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटकर, प्रथम पूज्य भगवान गणेशजी का ध्यान करते हुए होलिका और भक्त प्रह्लाद की सभी चीजें अर्पित कर पूजा की जाती है। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को प्रणाम करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। होलिका दहन के बाद अग्नि को जल अर्घ्य देते हैं और अग्निदेव को प्रणाम कर परिक्रमा करते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। शहर में 500 से अधिक स्थानों पर सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं दोपहर के समय रीति रिवाज के साथ पूजा-पाठ करेंगी। रात को जगह-जगह शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी में रविवार को कई जगहों पर होली डांडा रख दिए गए थे। सोमवार को महिलाएं पूजा करेंगी। वहीं शाम को होलिका दहन की पूजा के लिए सबसे पहले जातकों को होलिका के पास जाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। इसके बाद पूजन सामग्री जिसमें कि जल, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, हल्दी साबुत, मूंग, गुलाल और बताशे के साथ ही नई फसल यानी कि गेहूं और चने की पकी बालियां ले लें। इसके बाद होलिका के पास ही गाय के गोबर से बनी बुरकलियां की माला रखते हैं। इसके बाद कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटकर, प्रथम पूज्य भगवान गणेशजी का ध्यान करते हुए होलिका और भक्त प्रह्लाद की सभी चीजें अर्पित कर पूजा की जाती है। भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को प्रणाम करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। होलिका दहन के बाद अग्नि को जल अर्घ्य देते हैं और अग्निदेव को प्रणाम कर परिक्रमा करते हैं।
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