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विद्यार्थी कर रहे कोरोना जांच में मदद, स्वास्थ्य कर्मी बोले स्टाफ कम
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health worker takes student help in corona checkup
बल्लभगढ़। राजकीय विद्यालय में शुक्रवार को कोरोना जांच शिविर लगाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मी निश्चिंत बैठे रहे और छात्र खुद ही कोरोना की जांच करते दिखे। जब इस तरह की लापरवाही के बारे में बात की गई तो कर्मियों ने कहा कि स्टाफ कम है, इसलिए छात्रों का सहारा लिया जा रहा है। इसकी अनुमति विभागीय अधिकारियों से भी ले ली है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया ने मामले की जानकारी से इंकार किया।
आंबेडकर चौक स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को कोविड-19 महामारी की जांच के लिए शिविर लगाया गया। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की भारी खामी नजर आई। यहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी छात्रों की मदद लेकर कोविड जांच शिविर संपन्न करने में जुटे थे। मौजूदा स्टाफ का कहना है कि उनके पास स्टाफ की कमी है। इस कारण विद्यार्थियों को सैंपल पर मार्क (नाम लिखने) और ऑनलाइन काम के लिए मदद के रूप में सहयोग लिया जा रहा है। विडंबना तो यह भी थी कि इस दौरान जांच में कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं था। मामले में स्कूल प्रधानाचार्य धर्मवीर यादव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन बंद मिला।
625 विद्यार्थियों की जांच
शिविर में 625 विद्यार्थियों की जांच की गई। इस विद्यालय में करीब 1591 विद्यार्थी पढ़ते हैं लेकिन इतनी बढ़ी तादाद में बच्चों की जांच एक दिन में संभव नहीं थी।
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आंबेडकर चौक स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को कोविड-19 महामारी की जांच के लिए शिविर लगाया गया। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की भारी खामी नजर आई। यहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी छात्रों की मदद लेकर कोविड जांच शिविर संपन्न करने में जुटे थे। मौजूदा स्टाफ का कहना है कि उनके पास स्टाफ की कमी है। इस कारण विद्यार्थियों को सैंपल पर मार्क (नाम लिखने) और ऑनलाइन काम के लिए मदद के रूप में सहयोग लिया जा रहा है। विडंबना तो यह भी थी कि इस दौरान जांच में कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं था। मामले में स्कूल प्रधानाचार्य धर्मवीर यादव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन बंद मिला।
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625 विद्यार्थियों की जांच
शिविर में 625 विद्यार्थियों की जांच की गई। इस विद्यालय में करीब 1591 विद्यार्थी पढ़ते हैं लेकिन इतनी बढ़ी तादाद में बच्चों की जांच एक दिन में संभव नहीं थी।
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