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Faridabad News: प्रदूषण से जूझ रहे जिले में ग्रीन बेल्ट को सुरक्षा कवच, सेक्टर-8 में बनेगी चहारदीवारी
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परियोजना के तहत ग्रीन बेल्ट के चारों ओर आठ फीट ऊंची चहारदीवारी, आरसीसी जाली और चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच नगर निगम ने सेक्टर-8 स्थित ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित करने की दिशा में नई पहल की है। परियोजना के तहत ग्रीन बेल्ट के चारों ओर आठ फीट ऊंची चहारदीवारी, आरसीसी जाली और चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य को 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
फरीदाबाद लंबे समय से एनसीआर के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) से जुड़ी रिपोर्टों में भी शहर को उन नगरों में रखा गया है जहां पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से अधिक दर्ज होता है। ऐसे में शहर के पार्कों और ग्रीन बेल्ट को केवल सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं बल्कि प्रदूषण कम करने वाली प्राकृतिक ढाल माना जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क किनारे विकसित हरित पट्टियां धूल को रोकने, तापमान कम करने और वायु की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ग्रीन बेल्ट पर बढ़ता दबाव बना चुनौती
जमीन पर स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। शहर के कई इलाकों में ग्रीन बेल्ट पर निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) मलबा डालना आम बात है। कई स्थानों पर लोग घरेलू कचरा भी फेंक देते हैं, जिससे हरित क्षेत्र धीरे-धीरे डंपिंग स्थल में बदलने लगते हैं। नगर निगम को समय-समय पर ऐसे स्थानों से मलबा हटाने के लिए अभियान चलाना पड़ता है। इसके अलावा कई जगह ग्रीन बेल्ट पर अस्थायी अतिक्रमण, वाहन खड़े करने और निर्माण सामग्री रखने की शिकायतें भी लगातार मिलती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुला क्षेत्र होने के कारण रात के समय कई लोग यहां मलबा डाल जाते हैं। चहारदीवारी नहीं होने से निगरानी भी मुश्किल हो जाती है। यही वजह है कि ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
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लावारिस पशुओं से भी पौधों को होता है नुकसान
बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहर में पौधरोपण के बाद सबसे बड़ी चुनौती इनकी सुरक्षा होती है। खुले ग्रीन बेल्ट में घूमने वाले लावारिस पशु नई पौध और झाड़ियों को नुकसान पहुंचा देते हैं। कई बार पौधरोपण के कुछ ही दिनों बाद बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो जाते हैं जिससे दोबारा रोपण करना पड़ता है। चहारदीवारी बनने के बाद ऐसे नुकसान में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही ग्रीन बेल्ट के रखरखाव, सिंचाई और सफाई कार्य भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेंगे। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट सुरक्षित रहने से भविष्य में यहां पौधरोपण और लैंडस्केपिंग के कार्य भी बेहतर ढंग से किए जा सकेंगे। इससे आसपास रहने वाले लोगों को भी स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
नगर निगम की तरफ से शहर को स्वच्छ बनाने के साथ हरियाली बढ़ाने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच नगर निगम ने सेक्टर-8 स्थित ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित करने की दिशा में नई पहल की है। परियोजना के तहत ग्रीन बेल्ट के चारों ओर आठ फीट ऊंची चहारदीवारी, आरसीसी जाली और चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य को 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
फरीदाबाद लंबे समय से एनसीआर के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) से जुड़ी रिपोर्टों में भी शहर को उन नगरों में रखा गया है जहां पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से अधिक दर्ज होता है। ऐसे में शहर के पार्कों और ग्रीन बेल्ट को केवल सौंदर्यीकरण का हिस्सा नहीं बल्कि प्रदूषण कम करने वाली प्राकृतिक ढाल माना जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क किनारे विकसित हरित पट्टियां धूल को रोकने, तापमान कम करने और वायु की गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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ग्रीन बेल्ट पर बढ़ता दबाव बना चुनौती
जमीन पर स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। शहर के कई इलाकों में ग्रीन बेल्ट पर निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) मलबा डालना आम बात है। कई स्थानों पर लोग घरेलू कचरा भी फेंक देते हैं, जिससे हरित क्षेत्र धीरे-धीरे डंपिंग स्थल में बदलने लगते हैं। नगर निगम को समय-समय पर ऐसे स्थानों से मलबा हटाने के लिए अभियान चलाना पड़ता है। इसके अलावा कई जगह ग्रीन बेल्ट पर अस्थायी अतिक्रमण, वाहन खड़े करने और निर्माण सामग्री रखने की शिकायतें भी लगातार मिलती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खुला क्षेत्र होने के कारण रात के समय कई लोग यहां मलबा डाल जाते हैं। चहारदीवारी नहीं होने से निगरानी भी मुश्किल हो जाती है। यही वजह है कि ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
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लावारिस पशुओं से भी पौधों को होता है नुकसान
बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहर में पौधरोपण के बाद सबसे बड़ी चुनौती इनकी सुरक्षा होती है। खुले ग्रीन बेल्ट में घूमने वाले लावारिस पशु नई पौध और झाड़ियों को नुकसान पहुंचा देते हैं। कई बार पौधरोपण के कुछ ही दिनों बाद बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो जाते हैं जिससे दोबारा रोपण करना पड़ता है। चहारदीवारी बनने के बाद ऐसे नुकसान में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही ग्रीन बेल्ट के रखरखाव, सिंचाई और सफाई कार्य भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेंगे। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट सुरक्षित रहने से भविष्य में यहां पौधरोपण और लैंडस्केपिंग के कार्य भी बेहतर ढंग से किए जा सकेंगे। इससे आसपास रहने वाले लोगों को भी स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
नगर निगम की तरफ से शहर को स्वच्छ बनाने के साथ हरियाली बढ़ाने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त