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Faridabad News: ग्रैप लागू, फिर भी शहर में जमकर उड़ रहीं पर्यावरण मानकों की धज्जियां
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सेक्टर-11 में बहुत खराब श्रेणी में 302 तक पहुंचा वायु प्रदूषण सूचकांक, लंबे समय तक रहने पर हो सकती है सांस की बीमारी
फरीदाबाद में कुल चार केंद्रों पर औसत 198 पर पहुंची वायु गुणवत्ता, पीएम-2.5 और पीएम-10 का बढ़ा स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) की पाबंदियां लागू होने के बाद भी पर्यावरण मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके चलते शहर के सेक्टर-11 में प्रदूषण का स्तर (वायु गुणवत्ता सूचकांक) बेहद खराब की श्रेणी में 302 दर्ज किया गया। मंगलवार को टूटी सड़कों पर धूल और मिट्टी उड़ती रही, कई स्थानों पर कूड़ा भी जलता मिला। इस दौरान निर्माण सामग्री सड़क पर खुले में हवा के साथ जहर घोल रही है। शहर के चार प्रदूषण जांच केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक कुल औसत 198 दर्ज किया गया। इस दौरान पीएम-2.5 और पीएम-10 का बढ़ा मिला है।
एक ओर जहां पराली के धुएं के कण शहर की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग पर्यावरण मानकों का जमकर उल्लंघन करने में लगे हैं। मंगलवार को बाटा चौक के पास पड़े कूड़े के ढेर में किसी ने आग लगा दी। यहां पास में एक दुकानदार कैलाश प्रजापति ने आरोप लगाया कि अक्सर यहां कूड़ा का उठान नहीं होता है। कई बार कूड़ा उठाने के जिम्मेदार कर्मी ही इसमें आग लगा देते हैं। इससे यहां आस-पास रहने वालों को धुएं से घुटन का सामना करना पड़ता है।
दूसरी ओर, शहर की टूटी सड़कों से उड़ती मिट्टी और धूल भी हवा में जहर घोल रही है। एनआईटी-2 में टूटी सड़क पर वाहनों के आने-जाने से धूल और मिट्टी का गुबार यहां के निवासियों को ही नहीं वाहन चालकों के फेफड़े खराब कर रहा है। एनआईटी-2 निवासी जगपाल शर्मा ने बताया कि जिम्मेदार एजेंसियां न तो यहां पर सड़क बना रही हैं और न ही इन स्थानों पर पानी की बौछारें डालकर धूल-मिट्टी के गुबार बनने से रोक रही हैं।
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ईएसआईसी चौक के पास मिट्टी का ढेर पड़ा हुआ है। यहां से समय-समय पर वाहनों के निकलने और हवा के झोंकों से मिट्टी उड़ रही है। एनआईटी-5 में भी एक मकान के निर्माण के दौरान सड़क पर ही रेत पड़ी हुई है। हर तरफ नियमों का उल्लंघन होते हुए भी शहर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शहर में उल्लंघन नजर नहीं आ रहा है।
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198 पहुंचा शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक
शहर के चार केंद्रों का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार शाम तक 198 पहुंच गया। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेक्टर-11 केंद्र पर वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में 302 दर्ज किया गया। केंद्र पर पीएम-2.5 (पर्टिकुलेट मैटर) का स्तर 333 दर्ज किया गया। यह वाहनों, उद्योगों और कूड़े के ढेर को जलाने पर निकलने वाले धुएं से निकलता है और फेफड़ों के लिए घातक होता है। इसके अलावा पीएम-10 का स्तर यहां पर 273 दर्ज किया गया। यह धूल, मिट्टी निर्माण सामग्री से होने वाला प्रदूषण है। लंबे समय तक इस स्तर पर प्रदूषण रहने से लोगों को सांस की बीमारी हो जाती है।
इसके अलावा सेक्टर-30 में वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में 263 और एनआईटी में 163 दर्ज किया गया। वहीं, सेक्टर-16ए केंद्र पर आबोहवा ग्रीन श्रेणी में 64 दर्ज की गई है।
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नमी और तेज हवा न चलने से पर्यावरण में बैठ रहे धूल-धुएं के कण बना रहे गैस चेंबर
अक्तूबर से नवंबर माह के बीच मौसम में हल्की नमी रहती है। इस दौरान तेज हवा न चलने से हमारे पर्यावरण में धूल और धुएं के कण कम ऊंचाई पर ही ठहर जाते हैं। ऐसे में धूल और धुएं के कण धीरे-धीरे शहर के निचले पर्यावरण पर एक गैस चेंबर सा बना लेते हैं। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है और अधिक समय तक इसके रहने से लोग फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
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वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर जाने पर लागू होते हैं ग्रैप के नियम
पहला चरण एक्यूआई 201 से 300 यानी खराब होने पर लागू किया जाता है। दूसरा चरण एक्यूआई 301-400 (बहुत खराब) होने पर, तीसरा चरण एक्यूआई 401-450 (गंभीर) होने पर और चौथा चरण एक्यूआई 450 से अधिक (गंभीर से ज्यादा) होने पर लागू किया जाता है।
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तीन टीमें शहर में कर रही कार्रवाई
जिले में तीन टीमें नियमों की पालना कराने में लगी हैं। टीमें पहले से ही कूड़ा जलाने, निर्माण सामग्री सड़क पर रखने और अन्य नियमों की पालना न करने पर कार्रवाई करती आ रही हैं। अब ग्रैप लागू होने के बाद से टीमों ने अधिक चौकन्नी होकर कार्रवाई शुरू कर दी है। नियमों को तोड़ने पर विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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फरीदाबाद में कुल चार केंद्रों पर औसत 198 पर पहुंची वायु गुणवत्ता, पीएम-2.5 और पीएम-10 का बढ़ा स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) की पाबंदियां लागू होने के बाद भी पर्यावरण मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके चलते शहर के सेक्टर-11 में प्रदूषण का स्तर (वायु गुणवत्ता सूचकांक) बेहद खराब की श्रेणी में 302 दर्ज किया गया। मंगलवार को टूटी सड़कों पर धूल और मिट्टी उड़ती रही, कई स्थानों पर कूड़ा भी जलता मिला। इस दौरान निर्माण सामग्री सड़क पर खुले में हवा के साथ जहर घोल रही है। शहर के चार प्रदूषण जांच केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक कुल औसत 198 दर्ज किया गया। इस दौरान पीएम-2.5 और पीएम-10 का बढ़ा मिला है।
एक ओर जहां पराली के धुएं के कण शहर की आबोहवा में जहर घोल रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग पर्यावरण मानकों का जमकर उल्लंघन करने में लगे हैं। मंगलवार को बाटा चौक के पास पड़े कूड़े के ढेर में किसी ने आग लगा दी। यहां पास में एक दुकानदार कैलाश प्रजापति ने आरोप लगाया कि अक्सर यहां कूड़ा का उठान नहीं होता है। कई बार कूड़ा उठाने के जिम्मेदार कर्मी ही इसमें आग लगा देते हैं। इससे यहां आस-पास रहने वालों को धुएं से घुटन का सामना करना पड़ता है।
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दूसरी ओर, शहर की टूटी सड़कों से उड़ती मिट्टी और धूल भी हवा में जहर घोल रही है। एनआईटी-2 में टूटी सड़क पर वाहनों के आने-जाने से धूल और मिट्टी का गुबार यहां के निवासियों को ही नहीं वाहन चालकों के फेफड़े खराब कर रहा है। एनआईटी-2 निवासी जगपाल शर्मा ने बताया कि जिम्मेदार एजेंसियां न तो यहां पर सड़क बना रही हैं और न ही इन स्थानों पर पानी की बौछारें डालकर धूल-मिट्टी के गुबार बनने से रोक रही हैं।
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ईएसआईसी चौक के पास मिट्टी का ढेर पड़ा हुआ है। यहां से समय-समय पर वाहनों के निकलने और हवा के झोंकों से मिट्टी उड़ रही है। एनआईटी-5 में भी एक मकान के निर्माण के दौरान सड़क पर ही रेत पड़ी हुई है। हर तरफ नियमों का उल्लंघन होते हुए भी शहर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शहर में उल्लंघन नजर नहीं आ रहा है।
198 पहुंचा शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक
शहर के चार केंद्रों का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार शाम तक 198 पहुंच गया। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेक्टर-11 केंद्र पर वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में 302 दर्ज किया गया। केंद्र पर पीएम-2.5 (पर्टिकुलेट मैटर) का स्तर 333 दर्ज किया गया। यह वाहनों, उद्योगों और कूड़े के ढेर को जलाने पर निकलने वाले धुएं से निकलता है और फेफड़ों के लिए घातक होता है। इसके अलावा पीएम-10 का स्तर यहां पर 273 दर्ज किया गया। यह धूल, मिट्टी निर्माण सामग्री से होने वाला प्रदूषण है। लंबे समय तक इस स्तर पर प्रदूषण रहने से लोगों को सांस की बीमारी हो जाती है।
इसके अलावा सेक्टर-30 में वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में 263 और एनआईटी में 163 दर्ज किया गया। वहीं, सेक्टर-16ए केंद्र पर आबोहवा ग्रीन श्रेणी में 64 दर्ज की गई है।
नमी और तेज हवा न चलने से पर्यावरण में बैठ रहे धूल-धुएं के कण बना रहे गैस चेंबर
अक्तूबर से नवंबर माह के बीच मौसम में हल्की नमी रहती है। इस दौरान तेज हवा न चलने से हमारे पर्यावरण में धूल और धुएं के कण कम ऊंचाई पर ही ठहर जाते हैं। ऐसे में धूल और धुएं के कण धीरे-धीरे शहर के निचले पर्यावरण पर एक गैस चेंबर सा बना लेते हैं। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है और अधिक समय तक इसके रहने से लोग फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर जाने पर लागू होते हैं ग्रैप के नियम
पहला चरण एक्यूआई 201 से 300 यानी खराब होने पर लागू किया जाता है। दूसरा चरण एक्यूआई 301-400 (बहुत खराब) होने पर, तीसरा चरण एक्यूआई 401-450 (गंभीर) होने पर और चौथा चरण एक्यूआई 450 से अधिक (गंभीर से ज्यादा) होने पर लागू किया जाता है।
तीन टीमें शहर में कर रही कार्रवाई
जिले में तीन टीमें नियमों की पालना कराने में लगी हैं। टीमें पहले से ही कूड़ा जलाने, निर्माण सामग्री सड़क पर रखने और अन्य नियमों की पालना न करने पर कार्रवाई करती आ रही हैं। अब ग्रैप लागू होने के बाद से टीमों ने अधिक चौकन्नी होकर कार्रवाई शुरू कर दी है। नियमों को तोड़ने पर विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड