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बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले धरे
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फरीदाबाद। बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए साइबर थाना की टीम ने पांच आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार किया है। आरोपी लैप्स हो चुकी पॉलिसी पर अच्छा मुनाफा दिलवाने का लालच देकर पॉलिसी धारकों के साथ लाखों की ठगी करते थे। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने तीन मोबाइल फोन व 9 लाख 60 हजार रुपये बरामद किए हैं। आरोपियों की पहचान शुभम, दीपक, राज प्रताप, संजीव और अनुराग के रूप में हुई है। आरोपियों को पुलिस ने 19 मार्च 2021 को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान आरोपियों ने करोड़ों रुपये की ठगी की वारदात कबूली हैं।
आरोपियों के बैंक खाते में रखे 2 लाख 45 हजार रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। डॉ. अर्पित जैन ने बताया कि आरोपी लोगों को अपने चंगुल में फंसाकर उनसे पैसे एंठते थे। आरोपियों ने फरीदाबाद के सेक्टर 29 के रहने वाले नेत्रपाल सिंह को अपना शिकार बनाकर उनके साथ 14 लाख 40 हजार 710 रुपये की धोखाधड़ी की थी। पीड़ित नेत्रपाल ने 18 मार्च 2021 को साइबर थाने में इसकी शिकायत दी थी। साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बसंत की अगुवाई में आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीम का गठन किया गया जिसमें उप निरीक्षक राजेश कुमार, सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र, बाबूराम, प्रमोद, महिला एएसआई गीता, हवलदार दिनेश, नरेश, लोकेश, वीरपाल, कृष्ण, सिपाही बिजेंदर, अंशुल कुमार, अमित और कर्मवीर शामिल थे। साइबर थाना टीम की मेहनत रंग लाई और आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों का एक अन्य साथी अभी फरार चल रहा है, जिसकी पुलिस द्वारा तलाश की जा रही है। आरोपी शुभम सिंह व दीपक गाजियाबाद के रहने वाले हैं। राज प्रताप सिंह व संजीव दिल्ली जबकि अनुराग नोएडा का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया जबकि इनके अन्य साथी की तलाश की जा रही है।
आरोपियों ने बना रखा था गिरोह
आरोपियों ने साइबर तरीके से धोखाधड़ी करने के लिए एक पूरा गिरोह बनाया हुआ था और फर्जी सिम कार्ड के साथ-साथ फर्जी बैंक अकाउंट खोल रखे थे। जिन पॉलिसी धारकों की इंश्योरेंस पॉलिसी पूरी हो जाती थी या पूरी होने के कगार पर होती थी। उन्हें आरोपियों द्वारा फोन किया जाता था और उन्हें उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी को सरेंडर करवाकर उनकी पॉलिसी के पैसों के साथ-साथ ज्यादा फायदे दिलवाने का लालच दिया जाता था। इसके बाद आरोपी पॉलिसी धारकों के पैसे अपने द्वारा बनवाए गए फर्जी बैंक खाते में ट्रांसफर करवाने की बात कहते थे। पॉलिसी धारक आरोपियों द्वारा दिए गए लालच में आ जाते थे और अपने पैसे आरोपियों द्वारा बताए गए फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पैसा मिलते ही आरोपी अपना नंबर बंद करके सारी धनराशि हड़प लेते थे।
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आरोपियों के बैंक खाते में रखे 2 लाख 45 हजार रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। डॉ. अर्पित जैन ने बताया कि आरोपी लोगों को अपने चंगुल में फंसाकर उनसे पैसे एंठते थे। आरोपियों ने फरीदाबाद के सेक्टर 29 के रहने वाले नेत्रपाल सिंह को अपना शिकार बनाकर उनके साथ 14 लाख 40 हजार 710 रुपये की धोखाधड़ी की थी। पीड़ित नेत्रपाल ने 18 मार्च 2021 को साइबर थाने में इसकी शिकायत दी थी। साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बसंत की अगुवाई में आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीम का गठन किया गया जिसमें उप निरीक्षक राजेश कुमार, सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र, बाबूराम, प्रमोद, महिला एएसआई गीता, हवलदार दिनेश, नरेश, लोकेश, वीरपाल, कृष्ण, सिपाही बिजेंदर, अंशुल कुमार, अमित और कर्मवीर शामिल थे। साइबर थाना टीम की मेहनत रंग लाई और आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों का एक अन्य साथी अभी फरार चल रहा है, जिसकी पुलिस द्वारा तलाश की जा रही है। आरोपी शुभम सिंह व दीपक गाजियाबाद के रहने वाले हैं। राज प्रताप सिंह व संजीव दिल्ली जबकि अनुराग नोएडा का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया जबकि इनके अन्य साथी की तलाश की जा रही है।
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आरोपियों ने बना रखा था गिरोह
आरोपियों ने साइबर तरीके से धोखाधड़ी करने के लिए एक पूरा गिरोह बनाया हुआ था और फर्जी सिम कार्ड के साथ-साथ फर्जी बैंक अकाउंट खोल रखे थे। जिन पॉलिसी धारकों की इंश्योरेंस पॉलिसी पूरी हो जाती थी या पूरी होने के कगार पर होती थी। उन्हें आरोपियों द्वारा फोन किया जाता था और उन्हें उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी को सरेंडर करवाकर उनकी पॉलिसी के पैसों के साथ-साथ ज्यादा फायदे दिलवाने का लालच दिया जाता था। इसके बाद आरोपी पॉलिसी धारकों के पैसे अपने द्वारा बनवाए गए फर्जी बैंक खाते में ट्रांसफर करवाने की बात कहते थे। पॉलिसी धारक आरोपियों द्वारा दिए गए लालच में आ जाते थे और अपने पैसे आरोपियों द्वारा बताए गए फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पैसा मिलते ही आरोपी अपना नंबर बंद करके सारी धनराशि हड़प लेते थे।
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