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Faridabad News: डेरा मंडी की चार एकड़ जमीन दिलाने के नाम पर 10.80 करोड़ की ठगी

Sat, 25 Jul 2026 10:38 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 10:38 PM IST
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Fraud committed under the pretext of securing four acres of Dera Mandi land.
कंपनी और पूर्व निदेशकों समेत 14 पर प्राथमिकी दर्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। 10.80 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीद-फरोख्त के मामले में धोखाधड़ी के आरोप में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने जेसीटी लिमिटेड, फीनिक्स एआरसी प्राइवेट लिमिटेड व दोनों कंपनियों के पूर्व निदेशकों व पदाधिकारियों समेत 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) एनआईटी की जांच रिपोर्ट और डीसीपी मुख्यालय के आदेश के बाद की गई।

शिकायतकर्ता सेक्टर-20ए निवासी हरदीप सिंह बंगा ने आरोप लगाया कि दिल्ली के डेरा मंडी स्थित चार एकड़ जमीन का स्वामित्व और बिना किसी बाधा के हस्तांतरण का भरोसा देकर उनसे 10.80 करोड़ रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने यह राशि वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के नाम पर नो-लीन शर्त के साथ जमा कराई, लेकिन बाद में न तो संपत्ति का हस्तांतरण किया गया और न ही रकम लौटाई गई। मामले में जिन आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें जेसीटी लिमिटेड, उसके पूर्व निदेशक समीर थापर, ममता कुमारी, मुकुलिका सिन्हा और रॉनी बाठ शामिल हैं। इसके अलावा फीनिक्स एआरसी प्राइवेट लिमिटेड, उसके प्रबंध निदेशक एवं सीईओ संजय कुमार ओमप्रकाश टिबरेवाला, निदेशक केकी मंचेरसा एलाविया, वेंकट्टू श्रीनिवासन, ज्योति अमित अग्रवाल, बालन वासुदेव, भरत दामोदर वासानी, मुख्य वित्त अधिकारी गौरी चैतन्य भाटकल व कंपनी सचिव कमलेश तुलसीदास राणे को भी आरोपी बनाया गया है।
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शिकायत में आरोप है कि आरोपियों ने संपत्ति का सौदा कराने और ओटीएस स्वीकृत होने का भरोसा दिलाकर रकम जमा कराई, जबकि उस समय कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया (आईबीसी) चल रही थी और अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया जा चुका था। यह तथ्य शिकायतकर्ता से छिपाया गया। बाद में आरोपियों ने न तो संपत्ति का पंजीकरण कराया और न ही जमा राशि वापस की। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट के आधार पर सेक्टर-17 थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 316(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामले की आगे की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) एनआईटी फरीदाबाद को सौंपी गई है।
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