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Faridabad News: मंजूरी के डेढ़ साल बाद भी फाइलों में एफएनजी एक्सप्रेसवे परियोजना
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सेक्टर-88 से लालपुर तक जमीन का फंसा पेंच, सेक्टर-88 से खेड़ी कलां और लालपुर होते हुए यमुना तक बननी है करीब नौ किलोमीटर सड़क
जुलाई में मुख्यमंत्री ने तेजी से प्रक्रिया पूरी करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-88 के पास से नोएडा जाने के लिए सीधी सड़क तलाशने वाले वाहन चालकों को अभी भी दिल्ली की ओर घूमकर कालिंदी कुंज जाना पड़ता है। नक्शे पर फरीदाबाद और नोएडा के बीच यमुना की दूरी ज्यादा नहीं दिखती लेकिन सड़क का सीधा रास्ता नहीं होने से रोजाना हजारों वाहन लंबा चक्कर काटते हैं। करीब तीन दशक से प्रस्तावित फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेसवे इसी परेशानी को खत्म करने के लिए है। मार्च 2025 में हरियाणा सरकार की मंजूरी के बाद उम्मीद जगी थी कि अब काम जमीन पर दिखाई देगा लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी फरीदाबाद के हिस्से में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को फिर अधिकारियों को शेष जमीन जल्द लेने के निर्देश देने पड़े।
फरीदाबाद में एफएनजी का रास्ता ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-88 के पास से शुरू होकर खेड़ी कलां क्षेत्र से होते हुए लालपुर तक जाने का प्रस्ताव है। इसके बाद सड़क यमुना किनारे पहुंचेगी और करीब 550 से 600 मीटर लंबे पुल से नोएडा के चक मंगरोला और सेक्टर-168 की तरफ जुड़ेगी। फरीदाबाद को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब नौ किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित है।
यही वह हिस्सा है जहां अभी कागजी प्रक्रिया सबसे अहम है। जानकारी के अनुसार हरियाणा के हिस्से में करीब आठ गांवों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ जमीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बाकी जमीन लेने का काम आगे बढ़ रहा है। परियोजना को ई-भूमि पोर्टल पर भी दर्ज किया गया है।
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यमुना किनारे जमीन का मामला और पेचीदा
एफएनजी में जमीन का सवाल केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। लालपुर के पास यमुना किनारे प्रस्तावित पुल की जमीन और नदी के आसपास के क्षेत्र में हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े पुराने विवाद भी चुनौती रहे हैं। यमुना की धारा बदलने से नदी किनारे जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों राज्यों के किसानों और प्रशासन के बीच विवाद होते रहे हैं। ऐसे में सड़क बनाना सिर्फ जमीन का टुकड़ा लेने का काम नहीं बल्कि सीमा, स्वामित्व और तकनीकी पहलुओं को भी साफ करने की प्रक्रिया है।
मार्च 2025 में हरियाणा सरकार ने यमुना पर पुल बनाने की मंजूरी दी थी। पुल की लागत करीब 460 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसका खर्च हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश को साझा करना है। लेकिन पुल तभी उपयोगी होगा जब दोनों तरफ की पहुंच सड़क तैयार हो। यही वजह है कि फरीदाबाद में जमीन अधिग्रहण को इस पूरी कड़ी की पहली बड़ी शर्त माना जा रहा है।
अभी नोएडा जाना मतलब दिल्ली का चक्कर
फरीदाबाद से नोएडा जाने वाले लोगों के लिए आज सबसे बड़ी परेशानी यही है कि दोनों शहर आमने-सामने होने के बावजूद सीधा सड़क संपर्क नहीं है। वाहन चालकों को कालिंदी कुंज और नोएडा की तरफ से लंबा रास्ता लेना पड़ता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब एक लाख लोग रोजाना फरीदाबाद और नोएडा के बीच आवागमन करते हैं। मौजूदा रास्ते में करीब 32 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी जुड़ने की बात सामने आई है। एफएनजी बनने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा समय एक घंटे से अधिक से घटकर करीब 30 मिनट तक आने का अनुमान बताया गया है।
56 किलोमीटर की पूरी परियोजना में अभी कई जगह अधूरा काम
एफएनजी की कुल लंबाई करीब 56 किलोमीटर और चौड़ाई छह लेन प्रस्तावित है। लेकिन समस्या केवल फरीदाबाद में नहीं है। नोएडा के अधिकार क्षेत्र में करीब 23 किलोमीटर हिस्सा है जिसमें अभी 11.6 किलोमीटर ही तैयार हुआ है। छिजारसी गांव में करीब 650 मीटर एलिवेटेड रोड का काम बाकी है। सॉरखा के पास एक लेन और सेक्टर-143 के पास करीब 200 मीटर हिस्सा जमीन विवाद के कारण अधूरा है। हिंडन नदी के ऊपर प्रस्तावित हिस्से को भी विभागीय मंजूरी का इंतजार है। जुलाई में नोएडा प्राधिकरण ने अलग-अलग कार्य क्षेत्रों से प्रगति और अड़चनों की रिपोर्ट मांगी है। इसका सीधा मतलब है कि फरीदाबाद में सड़क और यमुना पुल तैयार हो भी जाए तो पूरी एफएनजी तभी उपयोगी होगी जब नोएडा और गाजियाबाद की अधूरी कड़ियां भी जुड़ें।
900 करोड़ का पुराना अनुमान अब बदल सकता है
फरीदाबाद हिस्से में जमीन अधिग्रहण और निर्माण पर नवंबर 2024 में करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था लेकिन अब जमीन की कीमत, निर्माण लागत और पुल समेत परियोजना के मौजूदा स्वरूप को देखते हुए यह राशि अब काफी बढ़ जाएगी। काम में हो रही देरी के कारण लगातार इसकी लागत बढ़ने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं जानकारों का कहना है कि अंतिम लागत नए आकलन और ऑडिट के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस परियोजना को लेकर पीडब्ल्यूडी की तरफ से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। समय-समय पर रिपोर्ट अधिकारियों को दी जा रही है।- प्रकाश लाल, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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जुलाई में मुख्यमंत्री ने तेजी से प्रक्रिया पूरी करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-88 के पास से नोएडा जाने के लिए सीधी सड़क तलाशने वाले वाहन चालकों को अभी भी दिल्ली की ओर घूमकर कालिंदी कुंज जाना पड़ता है। नक्शे पर फरीदाबाद और नोएडा के बीच यमुना की दूरी ज्यादा नहीं दिखती लेकिन सड़क का सीधा रास्ता नहीं होने से रोजाना हजारों वाहन लंबा चक्कर काटते हैं। करीब तीन दशक से प्रस्तावित फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेसवे इसी परेशानी को खत्म करने के लिए है। मार्च 2025 में हरियाणा सरकार की मंजूरी के बाद उम्मीद जगी थी कि अब काम जमीन पर दिखाई देगा लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी फरीदाबाद के हिस्से में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को फिर अधिकारियों को शेष जमीन जल्द लेने के निर्देश देने पड़े।
फरीदाबाद में एफएनजी का रास्ता ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-88 के पास से शुरू होकर खेड़ी कलां क्षेत्र से होते हुए लालपुर तक जाने का प्रस्ताव है। इसके बाद सड़क यमुना किनारे पहुंचेगी और करीब 550 से 600 मीटर लंबे पुल से नोएडा के चक मंगरोला और सेक्टर-168 की तरफ जुड़ेगी। फरीदाबाद को इस एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब नौ किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित है।
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यही वह हिस्सा है जहां अभी कागजी प्रक्रिया सबसे अहम है। जानकारी के अनुसार हरियाणा के हिस्से में करीब आठ गांवों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ जमीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बाकी जमीन लेने का काम आगे बढ़ रहा है। परियोजना को ई-भूमि पोर्टल पर भी दर्ज किया गया है।
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यमुना किनारे जमीन का मामला और पेचीदा
एफएनजी में जमीन का सवाल केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। लालपुर के पास यमुना किनारे प्रस्तावित पुल की जमीन और नदी के आसपास के क्षेत्र में हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े पुराने विवाद भी चुनौती रहे हैं। यमुना की धारा बदलने से नदी किनारे जमीन के स्वामित्व को लेकर दोनों राज्यों के किसानों और प्रशासन के बीच विवाद होते रहे हैं। ऐसे में सड़क बनाना सिर्फ जमीन का टुकड़ा लेने का काम नहीं बल्कि सीमा, स्वामित्व और तकनीकी पहलुओं को भी साफ करने की प्रक्रिया है।
मार्च 2025 में हरियाणा सरकार ने यमुना पर पुल बनाने की मंजूरी दी थी। पुल की लागत करीब 460 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसका खर्च हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश को साझा करना है। लेकिन पुल तभी उपयोगी होगा जब दोनों तरफ की पहुंच सड़क तैयार हो। यही वजह है कि फरीदाबाद में जमीन अधिग्रहण को इस पूरी कड़ी की पहली बड़ी शर्त माना जा रहा है।
अभी नोएडा जाना मतलब दिल्ली का चक्कर
फरीदाबाद से नोएडा जाने वाले लोगों के लिए आज सबसे बड़ी परेशानी यही है कि दोनों शहर आमने-सामने होने के बावजूद सीधा सड़क संपर्क नहीं है। वाहन चालकों को कालिंदी कुंज और नोएडा की तरफ से लंबा रास्ता लेना पड़ता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब एक लाख लोग रोजाना फरीदाबाद और नोएडा के बीच आवागमन करते हैं। मौजूदा रास्ते में करीब 32 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी जुड़ने की बात सामने आई है। एफएनजी बनने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा समय एक घंटे से अधिक से घटकर करीब 30 मिनट तक आने का अनुमान बताया गया है।
56 किलोमीटर की पूरी परियोजना में अभी कई जगह अधूरा काम
एफएनजी की कुल लंबाई करीब 56 किलोमीटर और चौड़ाई छह लेन प्रस्तावित है। लेकिन समस्या केवल फरीदाबाद में नहीं है। नोएडा के अधिकार क्षेत्र में करीब 23 किलोमीटर हिस्सा है जिसमें अभी 11.6 किलोमीटर ही तैयार हुआ है। छिजारसी गांव में करीब 650 मीटर एलिवेटेड रोड का काम बाकी है। सॉरखा के पास एक लेन और सेक्टर-143 के पास करीब 200 मीटर हिस्सा जमीन विवाद के कारण अधूरा है। हिंडन नदी के ऊपर प्रस्तावित हिस्से को भी विभागीय मंजूरी का इंतजार है। जुलाई में नोएडा प्राधिकरण ने अलग-अलग कार्य क्षेत्रों से प्रगति और अड़चनों की रिपोर्ट मांगी है। इसका सीधा मतलब है कि फरीदाबाद में सड़क और यमुना पुल तैयार हो भी जाए तो पूरी एफएनजी तभी उपयोगी होगी जब नोएडा और गाजियाबाद की अधूरी कड़ियां भी जुड़ें।
900 करोड़ का पुराना अनुमान अब बदल सकता है
फरीदाबाद हिस्से में जमीन अधिग्रहण और निर्माण पर नवंबर 2024 में करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था लेकिन अब जमीन की कीमत, निर्माण लागत और पुल समेत परियोजना के मौजूदा स्वरूप को देखते हुए यह राशि अब काफी बढ़ जाएगी। काम में हो रही देरी के कारण लगातार इसकी लागत बढ़ने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं जानकारों का कहना है कि अंतिम लागत नए आकलन और ऑडिट के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस परियोजना को लेकर पीडब्ल्यूडी की तरफ से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। समय-समय पर रिपोर्ट अधिकारियों को दी जा रही है।- प्रकाश लाल, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी