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Faridabad News: अरावली वन क्षेत्र में पांच मोबाइल टावर ढहाए
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कई बार नोटिस जारी करने के बावजूद कंपनियों ने कोई कार्रवाई नहीं की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में बिना अनुमति के मोबाइल टावर स्थापित कर टेलीकॉम कंपनियां नियमों को खुली चुनौती दे रही हैं। वन विभाग की ओर से कई बार नोटिस जारी करने और स्वयं टावर हटाने के निर्देश देने के बावजूद कंपनियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद विभाग को बुलडोजर चलाकर अवैध टावरों को हटाने की कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को पुलिस बल की मौजूदगी में वन विभाग ने पांच मोबाइल टावरों को ध्वस्त कर दिया, जबकि देर शाम तक अन्य टावरों पर कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। विभाग का दावा है कि कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त दो टावरों को छोड़कर सभी 10 अवैध टावरों को हटाया जाएगा।
नोटिस के बावजूद नहीं हटाए टावर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अरावली क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर निजी कंपनियों के 12 मोबाइल टावर बिना अनुमति के लगाए गए थे। नवंबर माह में विभाग ने एक टावर को हटाने के बाद शेष टावरों को हटाने के लिए संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया था। इसके बाद भी कंपनियों ने न तो टावर हटाए और न ही विभाग के निर्देशों का पालन किया। कई बार चेतावनी देने के बाद आखिरकार विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी।
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दस टावरों को हटाने की कार्रवाई
वन विभाग को कुल 12 मोबाइल टावर हटाने हैं। इनमें से दो टावरों पर न्यायालय से स्थगन आदेश मिला हुआ है। ऐसे में फिलहाल 10 टावरों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता जतिन बरवाला को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। मौके पर स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम मौजूद रही।
टावर टूटने से प्रभावित हुई नेटवर्क सेवाएं
सूरजकुंड-पाली रोड स्थित एक टावर को हटाने की कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क प्रभावित हो गया। इससे स्थानीय लोगों को फोन कॉल, इंटरनेट सेवा और ऑनलाइन कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने जल्द नेटवर्क सेवाएं बहाल करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वन क्षेत्र में लगे मोबाइल टावरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कई बार कंपनियों को नोटिस देकर टावर हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन किसी भी कंपनी की ओर से टावर नहीं हटाया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की है।
-झलकार उयके, जिला वन अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में बिना अनुमति के मोबाइल टावर स्थापित कर टेलीकॉम कंपनियां नियमों को खुली चुनौती दे रही हैं। वन विभाग की ओर से कई बार नोटिस जारी करने और स्वयं टावर हटाने के निर्देश देने के बावजूद कंपनियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद विभाग को बुलडोजर चलाकर अवैध टावरों को हटाने की कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।
बृहस्पतिवार को पुलिस बल की मौजूदगी में वन विभाग ने पांच मोबाइल टावरों को ध्वस्त कर दिया, जबकि देर शाम तक अन्य टावरों पर कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। विभाग का दावा है कि कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त दो टावरों को छोड़कर सभी 10 अवैध टावरों को हटाया जाएगा।
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नोटिस के बावजूद नहीं हटाए टावर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अरावली क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर निजी कंपनियों के 12 मोबाइल टावर बिना अनुमति के लगाए गए थे। नवंबर माह में विभाग ने एक टावर को हटाने के बाद शेष टावरों को हटाने के लिए संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया था। इसके बाद भी कंपनियों ने न तो टावर हटाए और न ही विभाग के निर्देशों का पालन किया। कई बार चेतावनी देने के बाद आखिरकार विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी।
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दस टावरों को हटाने की कार्रवाई
वन विभाग को कुल 12 मोबाइल टावर हटाने हैं। इनमें से दो टावरों पर न्यायालय से स्थगन आदेश मिला हुआ है। ऐसे में फिलहाल 10 टावरों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता जतिन बरवाला को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। मौके पर स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम मौजूद रही।
टावर टूटने से प्रभावित हुई नेटवर्क सेवाएं
सूरजकुंड-पाली रोड स्थित एक टावर को हटाने की कार्रवाई के दौरान आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क प्रभावित हो गया। इससे स्थानीय लोगों को फोन कॉल, इंटरनेट सेवा और ऑनलाइन कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने जल्द नेटवर्क सेवाएं बहाल करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वन क्षेत्र में लगे मोबाइल टावरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कई बार कंपनियों को नोटिस देकर टावर हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन किसी भी कंपनी की ओर से टावर नहीं हटाया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू की है।
-झलकार उयके, जिला वन अधिकारी