फरीदाबाद में बुखार का कहर: डेढ़ लाख मरीज जांच के दायरे में, बीके अस्पताल की OPD में रोज आ रहे 100 से अधिक रोगी
बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मलेरिया और डेंगू का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की रक्त जांच कराई जा रही है। बदलते मौसम और बारिश के कारण कई घरों में एक साथ दो-दो लोग बुखार की चपेट में हैं।
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विस्तार
बारिश और बदलते मौसम के बीच शहर में बुखार का असर बढ़ता जा रहा है। कई घरों में एक साथ दो-दो लोग बुखार की चपेट में हैं। बीके अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज बुखार और इससे जुड़े लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। डेंगू , मलेरिया और स्वाइन फ्लू का पता लगाने के लिए डेढ़ लाख मरीजों के रक्त की जांच करवाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों की जांच रिपोर्ट पर नजर रखे हुए है।
इसके साथ ही शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया और डेंगू की निगरानी भी तेज कर दी है। विभाग के अनुसार जिले में अब तक करीब डेढ़ लाख बुखार के मरीजों की रक्त जांच की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वहीं, बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मलेरिया और डेंगू का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की आवश्यकता के अनुसार रक्त जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
सामान्य बुखार समझकर न करें नजरअंदाज
बीके अस्पताल में आने वाले कई मरीजों का कहना है कि बुखार उतरने के बाद दोबारा हो रहा है। कुछ मरीजों में सात से 10 दिन बाद भी कमजोरी और बदन दर्द बना हुआ है। चिकित्सकों के अनुसार केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज को सामान्य वायरल बुखार है या मलेरिया-डेंगू। इसलिए लगातार बुखार रहने पर जांच कराना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की फील्ड टीमें भी सक्रिय हैं। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव और बुखार के लक्षणों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनकी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की जा रही है।
इन लक्षणों पर रहें सावधान
तेज बुखार के साथ सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी या ठंड लगने जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से सलाह लेने की जरूरत है। लगातार बुखार रहने पर रक्त जांच कराना जरूरी है। चिकित्सकों की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं लेने से बचना चाहिए।
स्वाइन फ्लू में भी तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
इन चीजों का रखें ख्याल
फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकें और हाथों की सफाई का ध्यान रखें। सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार या हालत बिगड़ने पर तुरंत अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लें।
शहर में अब तक डेंगू के सात, मलेरिया के तीन और स्वाइन फ्लू के 10 मरीज हैं। उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि डेंगू एडिज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है, जबकि मलेरिया एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। मानसून के दौरान जगह-जगह जलभराव होने से मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। इसी मौसम में डेंगू, मलेरिया समेत कई जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
03 हजार से अधिक लोगों को नोटिस
वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच भी की जा रही है। जांच के दौरान जहां लार्वा मिला, वहां संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए। विभाग के अनुसार, अब तक 3000 से अधिक लोगों को लार्वा मिलने पर नोटिस दिया जा चुका है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि नोटिस की स्थिति आने से पहले ही घरों और आसपास के स्थानों पर पानी जमा न होने दें।
बरतें सावधानी
-सप्ताह में एक दिन कूलरों को साफ कर सूखाएं
-घर व आसपास कहीं भी पानी इकट्ठा न होने दें
-घरों व अपने आसपास सफाई रखें
-मास्क पहनें और हाथ को बार- बार धोएं
-बाहर का भोजन न करें, घर का ताजा भोजन खाएं
अब तक सामने आ चुके मरीज
07- मरीज आ चुके हैं डेंगू
03- मरीज आ चुके हैं मलेरिया के
10- मरीजों में हो चुकी है स्वाइन फ्लू की पुष्टि