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फरीदाबाद: लगभग हर अस्पताल में एक दिन में 10 से ज्यादा संक्रमितों की हो रही मौत

Thu, 29 Apr 2021 05:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, फरीदाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 29 Apr 2021 05:27 PM IST
सार

फरीदाबाद में भी कोरोना का नया स्ट्रेन और दूसरी लहर हावी है। लोग मर रहे हैं। आलम यह है कि आंकड़ें चाहे कुछ कहें, सरकारी निजी अस्पताल में हर दिन लगभग 10 लोगों की मौत हो रही है।

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faridabad almost in every hospital daily around 10 deaths happening
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

फरीदाबाद में भी कोरोना का नया स्ट्रेन और दूसरी लहर हावी है। लोग मर रहे हैं। आलम यह है कि आंकड़ें चाहे कुछ कहें, सरकारी निजी अस्पताल में हर दिन लगभग 10 लोगों की मौत हो रही है। सर्वोदय अस्पताल की इमरजेंसी में सेवा दे रहे डॉ. मोहित ने इसे लेकर फेसबुक पोस्ट डाली है।

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वह लिखते हैं कि बीते तीन दिन में उन्होंने जितने लोगों की मौत होते देखा वह बीते दो साल में हुई मौतों से ज्यादा है। उनसे बात करने पर पता चला कि 24 घंटों में लगभग दस लोगों की मौत सामान्य हो गई है। हालांकि, इसमें से कुछ उपचाराधीन होते हैं तो कुछ अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि मेडिकल सेवाएं नाकाफी हो गए हैं।
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बीते 24 घंटों में उनके सामने 30 वर्षीय कोरोना संक्रमित की मौत हो गई। उसकी तीन माह पहले ही साल की शुरुआत में शादी हुई थी। परिवार को यह बताते हुए कि उनके परिवार का नौजवान नहीं रहा। डॉ मोहित खुद कई बार टूटे।
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वह लिखते हैं कि इस घटना को वो जिंदगी भर भूल नहीं पाएंगे। इसी तरह दो अन्य निजी अस्पतालों के इमरजेंसी में कोविड ड्यूटी दे रहे डॉक्टरों ने भी नाम न बताने की एवज में बताया कि लगभग 24 घंटों में दस मरीज दम तोड़ रहे हैं।

यह आंकड़ा दोनों तरह के मरीजों का है जो भर्ती हो रहे हैं और जो इलाज के लिए अस्पताल गेट पर दम तोड़ रहे हैं। वहीं, बीके सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भी इसी तरह मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते 24 घंटों में अस्पताल में करीब सात लोगों की मौत हो गई। इसमें भी दोनों तरह के आंकड़े शामिल हैं। कुछ लोग अस्पताल आने तक मर गए तो कुछ लोग इलाज के दौरान हार गए।

अब संक्रमण नहीं बदहाल सरकारी व्यवस्था ले रही जान 

सरकारी सेवाएं किस कदर बदहाल है, इसकी हकीकत अस्पताल गेट पर दम तोड़ रहे लोगों के परिजनों की हालत खुद बता रही है। बीते पांच दिन में अकेले बीपीटीपी एरिया में तीन मौत हो गई है। तीन में से दो मौत अस्पताल के चक्कर काटने में ही हो गई। वहीं, इस क्षेत्र के लगभग 35 लोग संक्रमण की चपेट में हैं। ऐसे में लोगों को टेंशन है कि इस तरह बदइंतजामी हावी रहेगी तो लोग उपचार के अभाव में ही मारे जाते रहेंगे। 

बीपीटीपी एरिया की तरीब 25 सोसायटी के कन्विनर रमेश गुलिया बताते हैं कि बीपीटीपी पार्क-2 में बीते तीन दिन में तीन मौतें हुई हैं। इसमें से दो की मौत इलाज के अभाव में तड़प कर हुई है। ओमेक्स, पुरी, आरपी सवाना सहित कई बिल्डर की सोसायटी हैं। प्रिंसिस पार्क, प्राइड सोसायटी हैं। एक वेल्फेयर कमेटी सेक्टर-75 से 80 के बीच में करीब 26 से 27 एसोसिएसन हैं।

केस-1, सतेंद्र शर्मा 58 को तीन सरकारी संस्थानों ने लौटाया..हो गई मौत 
बीपीटीपी पार्क फ्लोर-2 में सतेंद्र शर्मा (58) की तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ी। वह संक्रमित थे। आनन-फानन में एंबुलेंस को कॉल कर मदद मांगी गई। एंबुलेंस पहुंचती, इससे पहले सोसायटी के लोगों ने गाड़ी से उन्हें सीएचसी खेड़ी कलां में ऑक्सीजन बेड दिलाने की कोशिश की। वहां, प्रभारी ने यह कह दिया कि उनका ऑक्सीजन स्तर 68 हो चुका है। बुखार अधिक है। बिना वेंटिलेटर या आईसीयू के जान नहीं बचेगी। इसे वापस ले जाओ। भर्ती नहीं कर सकते। 

रात को उन्हें वापस घर लाया गया तो एंबुलेंस मिली। सीएचसी तिगांव लेकर गए तो वहां बेड फुल थे। एंबुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि बीके अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश करते हैं। फिर इमरजेंसी एरिया में बिना बेड ही कुछ देर ऑक्सीजन दिया। एक दिन बिना भर्ती किए बिना ही रखा। फिर वापस भेज दिया। परसों दोपहर घर पर छोड़ गए। अलवर के लिए शाम चार बजे किसी निजी अस्पताल में लेकर गए। वहां वेटिलेटर मिलता इससे पहले उनकी मौत हो गई।

केस-2, सुरेंद्र सूरी (33) पलवल तक वेंटिलेटर के लिए भटके..आखिर में मौत
हिमाचल निवासी  सुरेद्र सूरी (33) की संक्रमण के कारण मौत हो गई। चार साल का बच्चा और पत्नी पार्क फ्लोर 2, में टावर नंबर 33 में अकेले पड़ गए तो वह अपने मूल निवास हिमाचल लौट गए। सूरी संक्रमण से ज्यादा बीमार व्यवस्था के शिकार हुए। बीपीटीपी निवासी राहुल बताते हैं कि पांच दिन पहले 23 अप्रैल को उन्हें फोन आया कि सुरेंद्र की हालत नाजुक है। उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत है। उनका ऑक्सीजन स्तर 80 से नीचे था। ग्रेटर फरीदाबाद में कई जगह मदद के लिए घूमे। पुलिस चौकी के पास क्लिनिक में गए तो ऑक्सीजन नहीं मिला। एक एंबुलेंस सहायक की मदद से पलवल में किसी से बात की। सर्वोदय में कोशिश की कि बेड मिले। वहां से आकर डॉक्टर ने घर पर जांच की, लेकिन बेड नहीं मिला। इस दौरान पलवल निजी अस्पताल, गुरुनाक अस्पताल में लेकर गए। कहीं ऑक्सीजन नहीं तो कहीं वेंटिलेटर नहीं मिला। इसी बीच इलाज के लिए भटकते हुए 33 वर्षीय सुरेंद्र सूरी की मौत हो गई। वह  केपीएमजी में ऑडिटर थे।

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