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Faridabad News: बीके अस्पताल की ओपीडी में फॉल सीलिंग बनी मरीजों की परेशानी का कारण
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आधे से ज्यादा लाइट और पंखे बंद, गर्मी-अंधेरे में इलाज कराने को मजबूर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य के कारण ओपीडी में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फॉल सीलिंग लगाने के कारण ओपीडी हॉल की आधे से ज्यादा लाइटें और पंखे बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों को गर्मी और अंधेरे में बैठकर इलाज कराना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में बिना पंखे और रोशनी के अस्पताल की ओपीडी में बैठना मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को हो रही है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि सौंदर्यीकरण का कार्य अस्पताल की मूल सुविधाओं को प्रभावित नहीं करना चाहिए। जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के दावे कर रही है वहीं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि जब तक काम पूरा नहीं होता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। सीमा देवी, मरीज की तीमारदार ने बताया कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में लगी हुई हैं, न पंखा चल रहा है और न ही लाइट है। बच्चा गर्मी से परेशान हो गया है लेकिन डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में खड़े रहना भी मजबूरी है। वहीं, दवा लेने आए एक बुजुर्ग राजेश कुमार ने बताया कि इतनी उमस में बैठना मुश्किल है। सौंदर्यीकरण जरूरी है लेकिन मरीजों को कई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य के कारण ओपीडी में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फॉल सीलिंग लगाने के कारण ओपीडी हॉल की आधे से ज्यादा लाइटें और पंखे बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों को गर्मी और अंधेरे में बैठकर इलाज कराना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी में बिना पंखे और रोशनी के अस्पताल की ओपीडी में बैठना मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को हो रही है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि सौंदर्यीकरण का कार्य अस्पताल की मूल सुविधाओं को प्रभावित नहीं करना चाहिए। जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के दावे कर रही है वहीं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
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स्थानीय लोगों और मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि जब तक काम पूरा नहीं होता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। सीमा देवी, मरीज की तीमारदार ने बताया कि वह सुबह नौ बजे से लाइन में लगी हुई हैं, न पंखा चल रहा है और न ही लाइट है। बच्चा गर्मी से परेशान हो गया है लेकिन डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में खड़े रहना भी मजबूरी है। वहीं, दवा लेने आए एक बुजुर्ग राजेश कुमार ने बताया कि इतनी उमस में बैठना मुश्किल है। सौंदर्यीकरण जरूरी है लेकिन मरीजों को कई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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