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Faridabad News: दिवाली पर पटाखे जलाते समय बरतें सावधानी
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चिंगारी से आंखों में चोट और तेज धमाकों से सुनने की क्षमता हो सकती है प्रभावित
डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दिवाली पर रोशनी और आतिशबाजी के बीच जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। पटाखों से निकलने वाली चिंगारी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं तेज धमाकों की आवाज सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा पटाखों से जलने की घटनाएं भी सामने आती हैं।
ऐसे में त्योहार के दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बीके अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. योगेश गुप्ता ने लोगों को पटाखे जलाते समय सुरक्षा नियमों का पालन करने और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार देने की सलाह दी है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता ने बताया कि दिवाली पर पटाखे जलाते समय आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए चश्मा या सुरक्षात्मक गॉगल्स पहनना फायदेमंद है। इससे पटाखों की चिंगारी, धूल और प्रदूषण से आंखों को बचाने में मदद मिलती है। आतिशबाजी करते समय पटाखों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। पटाखे जलाते समय आंखों को सीधे उनकी ओर ले जाने से बचना चाहिए।
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वहीं, दूसरी ओर पटाखों के तेज धमाकों का असर कानों पर पड़ सकता है। अधिक शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होने और कान में घंटी बजने जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए आतिशबाजी से उचित दूरी बनाए रखें। बच्चों और बुजुर्गों को तेज आवाज वाले पटाखों से विशेष रूप से दूर रखना चाहिए।
जलने पर तुरंत करें ये उपाय
पटाखे या दीये से जलने पर प्रभावित हिस्से को नल के ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट रखें।
जले हुए हिस्से पर तेल, घी, टूथपेस्ट, हल्दी, नमक या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
जले हुए स्थान को साफ, सूखे और बिना रोएं वाले कपड़े या साफ ड्रेसिंग से ढकें।
जले हुए हिस्से पर बर्फ का इस्तेमाल न करें और फफोलों को न फोड़ें।
आंख में पटाखे की चिंगारी या कण चले जाने पर आंख न रगड़ें और तुरंत अस्पताल जाएं।
गंभीर रूप से जलने, चेहरे या आंखों के आसपास चोट लगने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं।
पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या फुलझड़ी का इस्तेमाल करें, हाथ में पकड़कर पटाखा न जलाएं।
पटाखा नहीं जलने पर उसके पास दोबारा न जाएं और न ही उसे दोबारा जलाने का प्रयास करें।
आतिशबाजी देखते समय भी सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
पटाखे जलाते समय ढीले और सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें।
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डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दिवाली पर रोशनी और आतिशबाजी के बीच जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। पटाखों से निकलने वाली चिंगारी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है, वहीं तेज धमाकों की आवाज सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा पटाखों से जलने की घटनाएं भी सामने आती हैं।
ऐसे में त्योहार के दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बीके अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. योगेश गुप्ता ने लोगों को पटाखे जलाते समय सुरक्षा नियमों का पालन करने और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार देने की सलाह दी है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता ने बताया कि दिवाली पर पटाखे जलाते समय आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए चश्मा या सुरक्षात्मक गॉगल्स पहनना फायदेमंद है। इससे पटाखों की चिंगारी, धूल और प्रदूषण से आंखों को बचाने में मदद मिलती है। आतिशबाजी करते समय पटाखों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। पटाखे जलाते समय आंखों को सीधे उनकी ओर ले जाने से बचना चाहिए।
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वहीं, दूसरी ओर पटाखों के तेज धमाकों का असर कानों पर पड़ सकता है। अधिक शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होने और कान में घंटी बजने जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए आतिशबाजी से उचित दूरी बनाए रखें। बच्चों और बुजुर्गों को तेज आवाज वाले पटाखों से विशेष रूप से दूर रखना चाहिए।
जलने पर तुरंत करें ये उपाय
पटाखे या दीये से जलने पर प्रभावित हिस्से को नल के ठंडे बहते पानी के नीचे करीब 20 मिनट रखें।
जले हुए हिस्से पर तेल, घी, टूथपेस्ट, हल्दी, नमक या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
जले हुए स्थान को साफ, सूखे और बिना रोएं वाले कपड़े या साफ ड्रेसिंग से ढकें।
जले हुए हिस्से पर बर्फ का इस्तेमाल न करें और फफोलों को न फोड़ें।
आंख में पटाखे की चिंगारी या कण चले जाने पर आंख न रगड़ें और तुरंत अस्पताल जाएं।
गंभीर रूप से जलने, चेहरे या आंखों के आसपास चोट लगने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं।
पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या फुलझड़ी का इस्तेमाल करें, हाथ में पकड़कर पटाखा न जलाएं।
पटाखा नहीं जलने पर उसके पास दोबारा न जाएं और न ही उसे दोबारा जलाने का प्रयास करें।
आतिशबाजी देखते समय भी सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
पटाखे जलाते समय ढीले और सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें।