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Faridabad News: अरावली में दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्ली के प्रजनन का मिला प्रमाण

Fri, 08 May 2026 12:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 12:48 AM IST
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Evidence of breeding of world's smallest wild cat found in Aravalli
फरीदाबादा कोट गांव के पास अरावली में दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्ली के प्रजनन का पहला प्रमाण।
कोट गांव में एक वयस्क मादा बिल्ली अपने बच्चे के साथ कैमरे में कैद हुई
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संवाद न्यूज एजेंसी


फरीदाबाद। अरावली के जंगलों में दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में गिनी जाने वाली रस्टी-स्पॉटेड कैट (प्रियोनाइलुरस रुबिगिनोसस) के प्रजनन का पहली बार पुख्ता फोटो ग्राफिक प्रमाण मिला है। फरीदाबाद के कोट गांव में एक वयस्क मादा बिल्ली अपने बच्चे के साथ कैमरे में कैद हुई है। इस खोज ने अरावली वन क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति की स्थायी मौजूदगी और प्रजनन की पुष्टि कर दी है।



यह महत्वपूर्ण अध्ययन हाल ही में पीयर-रिव्यू जर्नल जूज प्रिंट में प्रकाशित हुआ है। शोध कार्य रेवाड़ी के अमित कुमार, फरीदाबाद के तेजवीर मावी और गुरुग्राम के यतिन वर्मा की टीम ने किया। तीनों शोधकर्ता इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के प्राणी विज्ञान विभाग से जुड़े हैं।
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शोधकर्ताओं के अनुसार, कोट गांव में रस्टी-स्पॉटेड कैट अपने आश्रित बच्चे के साथ केवल 10 से 15 सेकंड के लिए दिखाई दी। हालांकि यह छोटा सा दृश्य वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि इससे पहली बार यह प्रमाणित हुआ कि अरावली क्षेत्र में यह दुर्लभ प्रजाति प्रजनन कर रही है।
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आईयूसीएन रेड लिस्ट में शामिल रस्टी-स्पॉटेड कैट अपने एकांतप्रिय स्वभाव और कम संख्या के कारण बहुत कम दिखाई देती है। शोधकर्ता तेजवीर मावी ने बताया कि इसके लगभग 75 प्रतिशत प्राकृतिक आवास पर शहरीकरण और कृषि विस्तार का खतरा मंडरा रहा है।



उन्होंने बताया कि यह बिल्ली आमतौर पर घने और शांत जंगलों में पाई जाती है, लेकिन अरावली में इसे शहरों के बेहद करीब देखा जाना इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्र अब भी संवेदनशील वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है। इससे पहले सितंबर 2023 में गुरुग्राम के मंगर बानी और भोंडसी क्षेत्र में इसका प्रत्यक्ष अवलोकन हुआ था। हाल ही में टिकरी क्षेत्र में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है।




अध्ययन में यह भी सामने आया कि यह प्रजाति पूरी तरह मानव गतिविधियों से दूर नहीं रहती, बल्कि शहरी परिवेश के साथ खुद को ढाल रही है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इसकी गतिविधियां गर्मियों में शाम 7:30 बजे के बाद और सुबह चार बजे के आसपास अधिक दर्ज की गईं। शोध पत्र में अरावली पर्वतमाला के पारिस्थितिक महत्व पर जोर देते हुए संरक्षण योजनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है।
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