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लॉकडाउन की पीड़ा : प्रवासी मजदूर बोले- हमें तो रोटी देने के नाम पर भी किया शर्मिंदा

Sat, 17 Apr 2021 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा संदीप पाराशर, बल्लभगढ़
संदीप पाराशर, बल्लभगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 17 Apr 2021 05:10 AM IST
सार

  • मजदूर बोले लॉकडाउन लगा तो जी नहीं पाएंगे
  • लॉकडाउन लगने के डर से मजदूरों ने शुरू की घर वापसी
  • बोले-किसी भी तरह ट्रेनों-बसों में निकलना चाहते हैं

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Even embarrassed in the name of giving us bread said workers 
ओल्ड फरीदाबाद स्टेशन पर बैठे प्रवासी मजदूर... - फोटो : amar ujala

विस्तार

लॉकडाउन फिर से मजदूरों की कमर न तोड़ दे, इसका डर उनकी आंखों में साफ देखा जा सकता है। मजदूरों से बात करने पर पता चला कि लॉकडाउन के दौरान रोटी देने वालों ने फोटो खींच-खींचकर जो जिल्लत इन लोगों को दी, वो आज भी उन कड़वी यादों से उबर नहीं सके हैं। इस कारण वह न सिर्फ अपने घरों के लिए रवाना होने लगे हैं बल्कि किसी भी सूरत में उस मंजर को दोबारा देखने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में बड़ी तादाद में मजदूर घर वापसी करने लगे हैं।

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आलम यह है कि बिहार के लिए अगस्त तक की बुकिंग है। ट्रेनें फुल हैं। हर लंबे रूट की बस ठसाठस भरी हुई हैं। वहीं, टिकट काउंटर पर मजदूरों की भीड़ लगातार उमड़ रही है। गंतव्य तक पहुंचने वाली ट्रेनें न मिलने पर वह छोटे रूट ट्रेनों की टिकट बुक कर किसी तरह यहां से निकलना चाहते हैं। लोगों का मानना है कि लॉकडाउन में मदद कम तमाशा ज्यादा बना। ऐसे में जिल्लत और आफत झेलने से बेहतर है कि वह घर पर अपनों के बीच इस आपदा का सामना करें।
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परिवार संग घर वापसी कर रहे इन मजदूरों से बात करने पर पचा चला कि वह फिर से लॉकडाउन लगने के भय में हैं। यदि ऐसा हुआ तो रहने-खाने के लाले पड़ जाएंगे। कई मील पैदल सफर करना पड़ेगा। पैरों में छाले होंगे। पीने के पानी तक की परेशानी होगी। इस कारण लोगों के बीच रेल टिकट खरीदने की मारामारी है।
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अब रेल में जाने वाले लोगों के लिए 120 दिनों की अगस्त तक वेटिंग है। आलम यह है कि रेल टिकट खरीदने के लिए दो घंटे तक एक व्यक्ति अपने नंबर का इंतजार कर रहा है। रेलवे के अनुसार बल्लभगढ़ स्टेशन पर हर दिन करीब पांच सौ लोग लंबे रूट की टिकट खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं। गंतव्य तक यदि किसी को सीधे ट्रेन की टिकट नहीं मिल पा रही है तो जहां तक टिकट मिल रही है लोग घर जाने की प्रतिस्पर्धा में वहीं की टिकट ले रहे हैं।

ऐसे में सबसे अधिक बुकिंग वैशाली स्पेशल, दरभंगा, राजेंद्रनगर स्पेशल, इलाहाबाद, बनारस, शहंशाहा, मधुबनी ब्रह्मपुत्र व गोहाटी की टिकटों की बुकिंग की गई है। वहीं, कोविड नियमों का पालन कराने के लिए रोडवेज ने दिल्ली जाने वाली प्रत्येक बस में सवारियों की संख्या 26 तक सीमित कर दी है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर दिल्ली के लिए 14 बसें चलाई जा रही हैं।

लोगों ने फोटो खींचकर किया शर्मिँदा
पिछले साल फरीदाबाद में फंसे तो रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ा। जो खाने का पैकेट देता वह चार बार फोटो खींचता, इससे पेट के लिए हर दिन शर्मिँदगी उठानी पड़ी। ऐसी स्थिति किसी के जीवन में न आए, इसलिए अब दोबारा वो दौर नहीं देखना चाहते। घर जा रहे हैं। सरकार का कोई भरोसा नहीं, हम फंस जाएंगें।
-रानी, मजदूर निवासी दरभंगा

पिछले साल 200 किमी पैदल चला
मुझे हर हाल में घर पहुंचना है। पता नहीं कब लॉकडाउन लग जाए। पिछले वर्ष घर पहुंचने के लिए 200 किलोमीटर पैदल चला हूं, अबकि बार वह मेरे बस की बात नहीं, इसलिए समय से घर पहुंचना चाहता हूं।
-रामफल मिस्त्री, निवासी झांसी

ट्रेन का टिकट नहीं मिला तो दूसरे वाहन में जाएंगे
मैं यहां सब्जी बेचने का काम करता हूं, जैसे-जैसे कोरोना बीमारी बढ़ेगी हमें काम की दिक्कत आएगी। पिछली बार हमें अपने पहचान पत्र तक लोगों को दिखाने पड़े फिर भी सब्जी के ग्राहक नहीं मिलते थे। ऐसी स्थिति में घर जाना ही बेहतर है। अगर हमको ट्रेन का सीधा टिकट न मिला तो अन्य वाहनों का सहारा लेंगे।
-कुलदीप मंडल, निवासी भागलपुर, बिहार

रात में कर्फ्य लग गया है, बेहतर है कि घर निकलें
मैं यहां के एक गांव में रहता हूं, जहां मुझे काम पर जाकर पता चला कि कर्फ्यू शुरू हो गया है। अब मुझे लगने लगा है कि लॉकडाउन भी लग सकता है। बेहतरी इसी में है हमें अब लौट जाना चाहिए।
-सचिन, जमालपुर बिहार


फिलहाल अलीगढ़, आगरा जाने वाली बसों में भीड़ है, अगर सवारी अधिक होती है तो बसों की संख्या में इजाफा किया जाएगा लेकिन फिलहाल इन रूटों पर 17 बसें दौड़ रही हैं, जरूरत पड़ेगी तो बसों की संख्या को बढ़ाया जा सकता हैं।

-हरी सिंह, डिपो अधिकारी

पिछले सात आठ दिन में बिहार जाने वाली ट्रेनों में जगह नहीं है। वहीं कोरोना के भय से लोगों में घर पहुंचने की चिंता दिखाई दे रही है। इसके चलते यहां दिन में 400 से 500 लोग टिकट के लिए पहुंच रहे हैं।
- केपी मीणा, स्टेशन मास्टर, बल्लभगढ़

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