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Faridabad News: ईपीएफओ ने 50 बड़ी कंपनी मालिकों के खिलाफ जारी किए अरेस्ट वारंट
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धनंजय चौहान
फरीदाबाद। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से कर्मचारियों का लंबे समय से पीएफ जमा नहीं करने वाले 696 संस्थानों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू की है। इन पर 29.74 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके साथ ही 50 बड़ी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए है। इसे जिला पुलिस आयुक्त कार्यालय में कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।
औद्योगिक नगरी छोटी-बड़ी करीब 28 हजार कंपनियां हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत कंपनियों को हर माह कर्मचारी के वेतन का 12 फीसदी हिस्सा ईपीएफओ में जमा करना होता है। इतना ही पैसा कंपनी की तरफ से भी उसी खाते में जमा किया जाता है। वर्तमान दौर में ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण विभाग अब लगातार कंपनियों पर नजर रख रही है। पिछले दिनों ईपीएफओ की जांच में सामने आया कि शहर में 696 कंपनियों ने पीएफ की राशि कर्मचारी के वेतन से काट ली, लेकिन वह पीएफ खाते में नहीं डाली गई।
कई मामलों में ऐसा देखा गया कि कर्मचारी का अंशदान जमा कर दिया गया और नियोक्ता का अंशदान जमा नहीं किया गया है। कंपनी द्वारा पीएफ खाते में पैसा जमा करते ही कर्मचारी के फोन पर एसएमएस मिलता है, लेकिन पिछले करीब कई माह से उन्हें अपने पीएफ खातों की जानकारी नहीं मिल रही है। पिछले दिनों ऐसे कई मामले भी सामने आए। जिसमें कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनका पीएफ काटा है, लेकिन जमा नहीं किया है। इसे लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया था।
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कोरोना काल में अनेक कंपनियों ने कर्मचारियों का अंशदान नहीं किया जमा
ईपीएफओ के सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कोरोना काल में अनेक कंपनियों ने कर्मचारियों का अंशदान नहीं भरा। इस कारण बकायेदारों की संख्या काफी बढ़ गई। अब पीएफ कार्यालय द्वारा रिकवरी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अंशदाताओं के पैसे की रिकवरी की जा सके और उसे कर्मचारी के खाते में दोबारा डाले जा सके। वर्ष 2022 में 12 कंपनियों ने कर्मचारियों के 6.28 करोड़ रुपये जमा नहीं किए थे। यह आंकड़ा 2023 में 144 रहा। इन कंपनियों पर कर्मचारियों का 9.29 करोड़ रुपये बकाया है। इस प्रकार कंपनियों ने छह करीब छह साल में 29.74 करोड़ रुपये कर्मचारियों जमा नहीं किए हैं।
जिले की टॉप पांच डिफॉल्टर कंपनियां
फ्रेंड्स ऑटो 42 लाख, गोल्ड फील्ड अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर 40 लाख, पैंथर सिक्योरिटी 32 लाख, ओम इंटरनेशनल 23 लाख, ओएसएम प्रोजेक्ट्स कंपनी पर 20 लाख रुपये की राशि बकाया है। इन सभी कंपनियों को विभाग की ओर से कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन हर बार नोटिस को अनदेखा कर दिया।
रिकवरी अधिकारी को हैं गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकारी
कंपनियों की ओर से कर्मियों के खाते में भविष्य निधि की रकम न जमा होने पर रिकवरी अधिकारी को सेक्शन-8 बी से 8-जी के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार है। इसके बाद पुलिस आयुक्त कार्यालय को इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। स्थानीय पुलिस द्वारा अमल में लाया जाता है। इसमें पुलिस नियोक्ता कंपनी के अधिकारी को गिरफ्तार करके जेल भी भेजती है।
भुगतान किया तो जेल से मिलेगी छूट नहीं तो कोर्ट की फीस भी पड़ेगी चुकानी
गिरफ्तारी वारंट और पुलिस की कार्रवाई के बीच लगभग एक माह का समय होता है। यदि नियोक्ता कंपनी इस बीच कर्मियों को भविष्य निधि का भुगतान कर देती है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाता है। यदि कंपनी इसके बाद भी नहीं मानती तो अधिकारियों को सीधे जेल भेज दिया जाता है।
कर्मचारियों के लौटाए जाएंगे पैसे
विभागीय जांच में 696 कंपनियों ऐसी पाई गई जो करीब छह साल से कर्मचारियों के पीएफ का पैसा जमा नहीं कर रही थी। इनके खिलाफ रिकवरी अभियान शुरू कर दिया गया है। इसके साथ 50 बड़ी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। सभी कंपनियों के वसूली कर कर्मचारियों के खाते में पैसे डाले जाएंगे।
- कृष्ण कुमार, सहायक आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
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फरीदाबाद। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से कर्मचारियों का लंबे समय से पीएफ जमा नहीं करने वाले 696 संस्थानों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू की है। इन पर 29.74 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके साथ ही 50 बड़ी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए है। इसे जिला पुलिस आयुक्त कार्यालय में कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।
औद्योगिक नगरी छोटी-बड़ी करीब 28 हजार कंपनियां हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत कंपनियों को हर माह कर्मचारी के वेतन का 12 फीसदी हिस्सा ईपीएफओ में जमा करना होता है। इतना ही पैसा कंपनी की तरफ से भी उसी खाते में जमा किया जाता है। वर्तमान दौर में ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण विभाग अब लगातार कंपनियों पर नजर रख रही है। पिछले दिनों ईपीएफओ की जांच में सामने आया कि शहर में 696 कंपनियों ने पीएफ की राशि कर्मचारी के वेतन से काट ली, लेकिन वह पीएफ खाते में नहीं डाली गई।
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कई मामलों में ऐसा देखा गया कि कर्मचारी का अंशदान जमा कर दिया गया और नियोक्ता का अंशदान जमा नहीं किया गया है। कंपनी द्वारा पीएफ खाते में पैसा जमा करते ही कर्मचारी के फोन पर एसएमएस मिलता है, लेकिन पिछले करीब कई माह से उन्हें अपने पीएफ खातों की जानकारी नहीं मिल रही है। पिछले दिनों ऐसे कई मामले भी सामने आए। जिसमें कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनका पीएफ काटा है, लेकिन जमा नहीं किया है। इसे लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया था।
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कोरोना काल में अनेक कंपनियों ने कर्मचारियों का अंशदान नहीं किया जमा
ईपीएफओ के सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कोरोना काल में अनेक कंपनियों ने कर्मचारियों का अंशदान नहीं भरा। इस कारण बकायेदारों की संख्या काफी बढ़ गई। अब पीएफ कार्यालय द्वारा रिकवरी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अंशदाताओं के पैसे की रिकवरी की जा सके और उसे कर्मचारी के खाते में दोबारा डाले जा सके। वर्ष 2022 में 12 कंपनियों ने कर्मचारियों के 6.28 करोड़ रुपये जमा नहीं किए थे। यह आंकड़ा 2023 में 144 रहा। इन कंपनियों पर कर्मचारियों का 9.29 करोड़ रुपये बकाया है। इस प्रकार कंपनियों ने छह करीब छह साल में 29.74 करोड़ रुपये कर्मचारियों जमा नहीं किए हैं।
जिले की टॉप पांच डिफॉल्टर कंपनियां
फ्रेंड्स ऑटो 42 लाख, गोल्ड फील्ड अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर 40 लाख, पैंथर सिक्योरिटी 32 लाख, ओम इंटरनेशनल 23 लाख, ओएसएम प्रोजेक्ट्स कंपनी पर 20 लाख रुपये की राशि बकाया है। इन सभी कंपनियों को विभाग की ओर से कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन हर बार नोटिस को अनदेखा कर दिया।
रिकवरी अधिकारी को हैं गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकारी
कंपनियों की ओर से कर्मियों के खाते में भविष्य निधि की रकम न जमा होने पर रिकवरी अधिकारी को सेक्शन-8 बी से 8-जी के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार है। इसके बाद पुलिस आयुक्त कार्यालय को इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। स्थानीय पुलिस द्वारा अमल में लाया जाता है। इसमें पुलिस नियोक्ता कंपनी के अधिकारी को गिरफ्तार करके जेल भी भेजती है।
भुगतान किया तो जेल से मिलेगी छूट नहीं तो कोर्ट की फीस भी पड़ेगी चुकानी
गिरफ्तारी वारंट और पुलिस की कार्रवाई के बीच लगभग एक माह का समय होता है। यदि नियोक्ता कंपनी इस बीच कर्मियों को भविष्य निधि का भुगतान कर देती है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाता है। यदि कंपनी इसके बाद भी नहीं मानती तो अधिकारियों को सीधे जेल भेज दिया जाता है।
कर्मचारियों के लौटाए जाएंगे पैसे
विभागीय जांच में 696 कंपनियों ऐसी पाई गई जो करीब छह साल से कर्मचारियों के पीएफ का पैसा जमा नहीं कर रही थी। इनके खिलाफ रिकवरी अभियान शुरू कर दिया गया है। इसके साथ 50 बड़ी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया। सभी कंपनियों के वसूली कर कर्मचारियों के खाते में पैसे डाले जाएंगे।
- कृष्ण कुमार, सहायक आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन