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स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार रोगियों को गोद में लेकर पहुंचे आपातकालीन कक्ष
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फरीदाबाद बीके नागरिक अस्पताल में मरीज को ले जाते तीमारदार।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में कार्यरत अनुबंध कर्मियों के हड़ताल पर जाने से लगातार व्यवस्था चौपट हो रही है। इसका सबसे अधिक खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार को गंभीर मरीजों को इमरजेंसी कक्ष तक पहुंचाने के लिए तीमारदार जूझते नजर आए। तीमारदार महिलाएं घायल पुरुषों को गोद में लेकर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परेशान दिखीं। इसी तरह दुर्घटनाग्रस्त, चोटिल मरीजों को भी स्ट्रेचर आदि की सुविधाएं नहीं मिलीं।
मोहना से आए रामकृष्ण ने बताया कि उनके दोनों हाथ और पैर में चोट लग गई। घर से उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने वाला कोई नहीं था। घर की महिला तीमारदार उन्हें उपचार के लिए बीके नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची। इस बीच अस्पताल में भी कोई सहायक ऐसा नहीं मिला, जो उन्हें इमरजेंसी में इलाज के लिए भर्ती कर सके। ऐसे में महिला तीमारदार ने ही गोद में लेकर उन्हें जैसे-तैसे इमरजेंसी तक पहुंचाया। इसी तरह प्लास्टर चढ़े पैर से इमरजेंसी कक्ष में पहुंचे सुरेश के परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में करीब एक घंटे तक इमरजेंसी कक्ष के बाहर बैठने पर भी स्ट्रेचर नहीं मिला। ऐसे में उम्र दराज तीमारदारों ने ही उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया। ऐसा ही हाल अस्पताल ओपीडी का नजर आया।
200 कर्मचारियों की कमी से काम रहा प्रभावित
हड़ताल पर गए करीब दो सौ कर्मचारियों की कमी से अस्पताल में कार्ड बनाने, पंजीकरण करने और जांच रिपोर्ट देने जैसे काम काफी धीमे हुए। हालांकि सप्ताह के आखिर दिन होने के कारण औसतन कम मरीज ही अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे। इसके बावजूद दोपहर एक बजे तक पंजीकरण केंद्र पर मरीजों की लाइन लगी रही। केंद्र पर मरीजों को दवा देने के लिए महज तीन कर्मचारी मौजूद रहे। इसमें से दवा वितरण काउंटर पर केवल दो ही सक्रिय दिखे।
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करीब 200 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस कारण समस्या है। हालांकि, फौरी प्रबंध कर काम संभाला जा रहा है। हड़ताल लंबी चली तो परेशानी बढ़ सकती है।
- डॉ. सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, बीके अस्पताल
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मोहना से आए रामकृष्ण ने बताया कि उनके दोनों हाथ और पैर में चोट लग गई। घर से उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने वाला कोई नहीं था। घर की महिला तीमारदार उन्हें उपचार के लिए बीके नागरिक अस्पताल लेकर पहुंची। इस बीच अस्पताल में भी कोई सहायक ऐसा नहीं मिला, जो उन्हें इमरजेंसी में इलाज के लिए भर्ती कर सके। ऐसे में महिला तीमारदार ने ही गोद में लेकर उन्हें जैसे-तैसे इमरजेंसी तक पहुंचाया। इसी तरह प्लास्टर चढ़े पैर से इमरजेंसी कक्ष में पहुंचे सुरेश के परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में करीब एक घंटे तक इमरजेंसी कक्ष के बाहर बैठने पर भी स्ट्रेचर नहीं मिला। ऐसे में उम्र दराज तीमारदारों ने ही उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया। ऐसा ही हाल अस्पताल ओपीडी का नजर आया।
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200 कर्मचारियों की कमी से काम रहा प्रभावित
हड़ताल पर गए करीब दो सौ कर्मचारियों की कमी से अस्पताल में कार्ड बनाने, पंजीकरण करने और जांच रिपोर्ट देने जैसे काम काफी धीमे हुए। हालांकि सप्ताह के आखिर दिन होने के कारण औसतन कम मरीज ही अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे। इसके बावजूद दोपहर एक बजे तक पंजीकरण केंद्र पर मरीजों की लाइन लगी रही। केंद्र पर मरीजों को दवा देने के लिए महज तीन कर्मचारी मौजूद रहे। इसमें से दवा वितरण काउंटर पर केवल दो ही सक्रिय दिखे।
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करीब 200 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस कारण समस्या है। हालांकि, फौरी प्रबंध कर काम संभाला जा रहा है। हड़ताल लंबी चली तो परेशानी बढ़ सकती है।
- डॉ. सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, बीके अस्पताल