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Faridabad News: ईईएफआई के पत्र से खुला हड़ताल खत्म करने का रास्ता
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा में पैरलल लाइसेंस के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) की भूमिका अहम रही। ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि महासचिव सुदीप दत्ता की ओर से 21 अक्तूबर को मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र हड़ताल खत्म कराने में निर्णायक साबित हुआ।
पत्र में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत नीतिगत हस्तक्षेप कर गतिरोध दूर करने का सुझाव दिया गया था। लोगों का कहना है कि सरकार पहले पैरलल लाइसेंस के खिलाफ अपील करने का आश्वासन दे रही थी, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे पर्याप्त नहीं मान रहे थे। ईईएफआई का मत था कि सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार को अपनी नीतिगत शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
सुभाष लांबा ने बताया कि 21 अक्तूबर को संयुक्त संघर्ष मोर्चा केवल अपील के आश्वासन पर बातचीत के लिए तैयार नहीं था। ईईएफआई के पत्र के बाद बिजली मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर धारा 108 के तहत कार्रवाई की तत्परता जताई। इसके बाद मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री के साथ बैठक में पैरलल लाइसेंस पर रोक लगाने के संबंध में कार्रवाई का लिखित समझौता हुआ। इसके बाद 23 अक्तूबर को हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
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लांबा ने कहा कि हड़ताल खत्म होने के बाद अब सरकार को लिखित समझौते के अनुसार गुरुग्राम और नूंह में पैरलल लाइसेंस के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने हड़ताल में शामिल महम के कार्यकारी अभियंता को निलंबित किए जाने की निंदा करते हुए इसे समझौते की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने सरकार से निलंबन आदेश तुरंत वापस लेने की मांग की।
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फरीदाबाद। हरियाणा में पैरलल लाइसेंस के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) की भूमिका अहम रही। ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि महासचिव सुदीप दत्ता की ओर से 21 अक्तूबर को मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र हड़ताल खत्म कराने में निर्णायक साबित हुआ।
पत्र में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत नीतिगत हस्तक्षेप कर गतिरोध दूर करने का सुझाव दिया गया था। लोगों का कहना है कि सरकार पहले पैरलल लाइसेंस के खिलाफ अपील करने का आश्वासन दे रही थी, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे पर्याप्त नहीं मान रहे थे। ईईएफआई का मत था कि सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार को अपनी नीतिगत शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
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सुभाष लांबा ने बताया कि 21 अक्तूबर को संयुक्त संघर्ष मोर्चा केवल अपील के आश्वासन पर बातचीत के लिए तैयार नहीं था। ईईएफआई के पत्र के बाद बिजली मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर धारा 108 के तहत कार्रवाई की तत्परता जताई। इसके बाद मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री के साथ बैठक में पैरलल लाइसेंस पर रोक लगाने के संबंध में कार्रवाई का लिखित समझौता हुआ। इसके बाद 23 अक्तूबर को हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
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लांबा ने कहा कि हड़ताल खत्म होने के बाद अब सरकार को लिखित समझौते के अनुसार गुरुग्राम और नूंह में पैरलल लाइसेंस के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने हड़ताल में शामिल महम के कार्यकारी अभियंता को निलंबित किए जाने की निंदा करते हुए इसे समझौते की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने सरकार से निलंबन आदेश तुरंत वापस लेने की मांग की।