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Faridabad News: डॉक्टर को मनी लॉंड्रिंग का खौफ दिखा 10 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 2.23 करोड़ ठगे
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-साइबर ठगों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर दिया ठगी को अंजाम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। साइबर ठगों ने एक डॉक्टर को मनी लॉंड्रिंग का डर दिखा डिजिटल अरेस्ट (आभासी रूप से अपह्रत) कर 2.23 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। जालसाजों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर डॉक्टर को ठगी का शिकार बनाया। ठगों ने इन 10 दिनों में डॉक्टर को खूब धमकाया। 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहने से डॉक्टर सदमे में है। सेंट्रल थाना साइबर पुलिस ने केस दर्ज करके जांच कर रही है।
सेक्टर-29 निवासी डाॅ. अरुप कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने घर के पास ही मैडिनोवा नामक क्लीनिक चलाते हैं। साथ ही दिल्ली के एक निजी अस्पताल में फिजीशियन के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। 26 जून को उनके पास व्हाट्सएप पर एक कॉल आया।
फोन करने वालों ने खुद को सिद्धार्थ घोस, प्रताप सिंह सब इंस्पेक्टर, अजय सिंह नाम से क्राइम ब्रांच मुंबई के अलग-अलग पुलिस अधिकारी बताया। ठग ने कहा कि उनके खाते में मनी लॉंड्रिंग का पैसा आया है। उसकी जांच हमारी क्राइम ब्रांच पुलिस टीम कर रही है। हमें उनके नाम से खुले सभी बैंक खातों की जांच करनी है। आपके बैंक खातों में मनी लॉंडरिंग का रुपया आया है या नहीं ।
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मनी लॉंड्रिंग का नाम सुनते ही डॉ. अरुप के हाेश उड़ गए। वह यह बात किसी और को बता पाते उससे पहले उनके पास एक बार फिर ठग का फोन आ गया। उसने डॉक्टर को तुंरत सभी बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा। बार-बार फोन करने से वह बहुत ज्यादा डर गए और डॉक्टर ने अपने दो खातों की जानकारी ठग को दे दी। इसके बाद ठग ने उन्हें नहीं छोड़ा। दो दिन बाद फिर ठगों ने फोन किया। उसने कहा कि उनके दोनों खातों में मनी लॉंड्रिंग का पैसा आया है। अब उनको जेल में जाना पड़ेगा या सर्वोच्च न्यायालय से 50 लाख रुपये की जमानत लेनी पड़ेगी।
डॉक्टर पर दबाव बनाने के लिए भेजा सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस
ठग ने उनके व्हाट्सएप नंबर पर फर्जी तरीके से बनाया हुआ सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी वारंट भी भेज दिया। इसके बाद तो डॉक्टर पूरी तरह से खौफ में आ गए। हालत यह थी वह इस बात को किसी से शेयर भी नहीं कर पा रहे थे।
गिरफ्तारी से बचने के लिए 1.30 करोड़ किए ट्रांसफर
ठग ने कहा कि अगर गिरफ्तारी से बचना चाहते हो तो एक करोड़ 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दो। डॉक्टर ने डर की वजह से खाते में सेक्टर-16 के बैंक से पैसे ट्रांसफर कर दिए, लेकिन ठग इतनी रकम लेने के बाद भी नहीं माने। उन्होंने दोबारा डाॅक्टर को फोन किया और कहा कि केस बहुुत बड़ा है। इसको निपटाने के लिए और पैसे लगेंगे। उन्होंने डाॅक्टर को दो अलग-अलग बैंक के खाते दिए। एक खाते में 39 लाख और दूसरे खाते में 20 लाख रुपये डालने को कहा। डाॅक्टर ने डर की वजह दोनों खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद ठग ने फोन करके कहा कि उनको पूरे मामले को रफा दफा करने के लिए 34 लाख रुपये और देने होंगे। इसके बाद डाॅक्टर ने 34 लाख रुपये और भेज दिए। डाॅ. अरुप के अनुसार ठग ने उनको डराकर करीब 2.23 करोड़ रुपये ठगे। सेंट्रल थाना पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डॉक्टर को कॉल किए नंबरों से को ट्रेस पर लगा दिया है।
पिछले कुछ माह में सामने आए मामले
- 9 जून 2024: धोखाधड़ी के मामले में फंसाने की धमकी देकर एक बुजुर्ग को ठगों ने कई घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा।
- 2 नवंबर 2023: भारत मंडपम में अपना सहयोग दे चुकी 23 वर्षीय युवती को साइबर ठगों ने 17 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर ढाई लाख की ठगी की।
- 20 फरवरी 2024: कुसुम नामक महिला को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट (आभासी रूप से अपह्रत) कर चार लाख रुपये की ठगी कर ली।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। साइबर ठगों ने एक डॉक्टर को मनी लॉंड्रिंग का डर दिखा डिजिटल अरेस्ट (आभासी रूप से अपह्रत) कर 2.23 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। जालसाजों ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर डॉक्टर को ठगी का शिकार बनाया। ठगों ने इन 10 दिनों में डॉक्टर को खूब धमकाया। 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहने से डॉक्टर सदमे में है। सेंट्रल थाना साइबर पुलिस ने केस दर्ज करके जांच कर रही है।
सेक्टर-29 निवासी डाॅ. अरुप कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने घर के पास ही मैडिनोवा नामक क्लीनिक चलाते हैं। साथ ही दिल्ली के एक निजी अस्पताल में फिजीशियन के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। 26 जून को उनके पास व्हाट्सएप पर एक कॉल आया।
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फोन करने वालों ने खुद को सिद्धार्थ घोस, प्रताप सिंह सब इंस्पेक्टर, अजय सिंह नाम से क्राइम ब्रांच मुंबई के अलग-अलग पुलिस अधिकारी बताया। ठग ने कहा कि उनके खाते में मनी लॉंड्रिंग का पैसा आया है। उसकी जांच हमारी क्राइम ब्रांच पुलिस टीम कर रही है। हमें उनके नाम से खुले सभी बैंक खातों की जांच करनी है। आपके बैंक खातों में मनी लॉंडरिंग का रुपया आया है या नहीं ।
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मनी लॉंड्रिंग का नाम सुनते ही डॉ. अरुप के हाेश उड़ गए। वह यह बात किसी और को बता पाते उससे पहले उनके पास एक बार फिर ठग का फोन आ गया। उसने डॉक्टर को तुंरत सभी बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा। बार-बार फोन करने से वह बहुत ज्यादा डर गए और डॉक्टर ने अपने दो खातों की जानकारी ठग को दे दी। इसके बाद ठग ने उन्हें नहीं छोड़ा। दो दिन बाद फिर ठगों ने फोन किया। उसने कहा कि उनके दोनों खातों में मनी लॉंड्रिंग का पैसा आया है। अब उनको जेल में जाना पड़ेगा या सर्वोच्च न्यायालय से 50 लाख रुपये की जमानत लेनी पड़ेगी।
डॉक्टर पर दबाव बनाने के लिए भेजा सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस
ठग ने उनके व्हाट्सएप नंबर पर फर्जी तरीके से बनाया हुआ सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी वारंट भी भेज दिया। इसके बाद तो डॉक्टर पूरी तरह से खौफ में आ गए। हालत यह थी वह इस बात को किसी से शेयर भी नहीं कर पा रहे थे।
गिरफ्तारी से बचने के लिए 1.30 करोड़ किए ट्रांसफर
ठग ने कहा कि अगर गिरफ्तारी से बचना चाहते हो तो एक करोड़ 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दो। डॉक्टर ने डर की वजह से खाते में सेक्टर-16 के बैंक से पैसे ट्रांसफर कर दिए, लेकिन ठग इतनी रकम लेने के बाद भी नहीं माने। उन्होंने दोबारा डाॅक्टर को फोन किया और कहा कि केस बहुुत बड़ा है। इसको निपटाने के लिए और पैसे लगेंगे। उन्होंने डाॅक्टर को दो अलग-अलग बैंक के खाते दिए। एक खाते में 39 लाख और दूसरे खाते में 20 लाख रुपये डालने को कहा। डाॅक्टर ने डर की वजह दोनों खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद ठग ने फोन करके कहा कि उनको पूरे मामले को रफा दफा करने के लिए 34 लाख रुपये और देने होंगे। इसके बाद डाॅक्टर ने 34 लाख रुपये और भेज दिए। डाॅ. अरुप के अनुसार ठग ने उनको डराकर करीब 2.23 करोड़ रुपये ठगे। सेंट्रल थाना पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डॉक्टर को कॉल किए नंबरों से को ट्रेस पर लगा दिया है।
पिछले कुछ माह में सामने आए मामले
- 9 जून 2024: धोखाधड़ी के मामले में फंसाने की धमकी देकर एक बुजुर्ग को ठगों ने कई घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा।
- 2 नवंबर 2023: भारत मंडपम में अपना सहयोग दे चुकी 23 वर्षीय युवती को साइबर ठगों ने 17 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर ढाई लाख की ठगी की।
- 20 फरवरी 2024: कुसुम नामक महिला को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट (आभासी रूप से अपह्रत) कर चार लाख रुपये की ठगी कर ली।