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Faridabad News: मेडिकल कॉलेज में मेस शुल्क पर विवाद गहराया, छात्रों ने किया विरोध
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बिना मेस सुविधा लिए भी 600 रुपये प्रतिमाह अनिवार्य करने के फैसले से नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हॉस्टल में रहने वाले एमबीबीएस छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच मेस शुल्क को लेकर विवाद गहरा गया है। बिना मेस सुविधा लिए भी 600 रुपये प्रतिमाह शुल्क अनिवार्य करने के फैसले से छात्रों में भारी नाराजगी है। छात्र परिषद ने इस निर्णय के खिलाफ डीन को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है।
मामले की शुरुआत मुख्य वार्डन डॉ. अजय आर नेने द्वारा जारी सर्कुलर से हुई, जिसमें हॉस्टल में रहने वाले सभी छात्रों के लिए 600 रुपये मासिक प्रशासनिक शुल्क लागू किया गया है। यह शुल्क 1 अप्रैल 2021 से पूर्व प्रभाव से लागू किया गया है। खास बात यह है कि यह शुल्क उन छात्रों से भी लिया जा रहा है जो मेस सुविधा का उपयोग नहीं करते, जिससे छात्रों में असंतोष और बढ़ गया है।
सर्कुलर के अनुसार, यह राशि जमा किए बिना छात्रों के नो ड्यूज पर हस्ताक्षर नहीं होंगे। वहीं, नो ड्यूज के बिना एमबीबीएस की डिग्री जारी नहीं की जाएगी, जिससे छात्र पीजी नीट के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे। 28 महीनों के हिसाब से यह राशि प्रति छात्र 16,800 रुपये तक पहुंच रही है, जो कई छात्रों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रही है।
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छात्र परिषद ने इसे अनुचित आर्थिक बोझ बताते हुए कहा है कि जो छात्र मेस का उपयोग नहीं करते, उनसे शुल्क लेना तर्कसंगत नहीं है। परिषद के प्रतिनिधि रितेश कुमार, हार्दिक मखीजा और सौरव वर्मा ने कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव डालता है। कई छात्रों ने पत्र पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
वहीं, सर्कुलर में मेस से छुट्टी के नियम भी कड़े कर दिए गए हैं। अब 5 या उससे अधिक दिनों की छुट्टी पर ही रियायत मिलेगी, जबकि पहले 3 दिन की छुट्टी मान्य थी। छात्रों का कहना है कि इससे उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों में भी कठिनाई बढ़ेगी।
छात्रों ने डीन से हस्तक्षेप कर शुल्क वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उधर, भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार ने भी मामले को छात्रों के साथ अन्याय बताया है और जल्द समाधान के प्रयास की बात कही है। उन्होंने प्रशासन से संवाद के जरिए निष्पक्ष समाधान निकालने की अपील की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हॉस्टल में रहने वाले एमबीबीएस छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच मेस शुल्क को लेकर विवाद गहरा गया है। बिना मेस सुविधा लिए भी 600 रुपये प्रतिमाह शुल्क अनिवार्य करने के फैसले से छात्रों में भारी नाराजगी है। छात्र परिषद ने इस निर्णय के खिलाफ डीन को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है।
मामले की शुरुआत मुख्य वार्डन डॉ. अजय आर नेने द्वारा जारी सर्कुलर से हुई, जिसमें हॉस्टल में रहने वाले सभी छात्रों के लिए 600 रुपये मासिक प्रशासनिक शुल्क लागू किया गया है। यह शुल्क 1 अप्रैल 2021 से पूर्व प्रभाव से लागू किया गया है। खास बात यह है कि यह शुल्क उन छात्रों से भी लिया जा रहा है जो मेस सुविधा का उपयोग नहीं करते, जिससे छात्रों में असंतोष और बढ़ गया है।
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सर्कुलर के अनुसार, यह राशि जमा किए बिना छात्रों के नो ड्यूज पर हस्ताक्षर नहीं होंगे। वहीं, नो ड्यूज के बिना एमबीबीएस की डिग्री जारी नहीं की जाएगी, जिससे छात्र पीजी नीट के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे। 28 महीनों के हिसाब से यह राशि प्रति छात्र 16,800 रुपये तक पहुंच रही है, जो कई छात्रों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल साबित हो रही है।
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छात्र परिषद ने इसे अनुचित आर्थिक बोझ बताते हुए कहा है कि जो छात्र मेस का उपयोग नहीं करते, उनसे शुल्क लेना तर्कसंगत नहीं है। परिषद के प्रतिनिधि रितेश कुमार, हार्दिक मखीजा और सौरव वर्मा ने कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव डालता है। कई छात्रों ने पत्र पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है।
वहीं, सर्कुलर में मेस से छुट्टी के नियम भी कड़े कर दिए गए हैं। अब 5 या उससे अधिक दिनों की छुट्टी पर ही रियायत मिलेगी, जबकि पहले 3 दिन की छुट्टी मान्य थी। छात्रों का कहना है कि इससे उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों में भी कठिनाई बढ़ेगी।
छात्रों ने डीन से हस्तक्षेप कर शुल्क वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उधर, भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार ने भी मामले को छात्रों के साथ अन्याय बताया है और जल्द समाधान के प्रयास की बात कही है। उन्होंने प्रशासन से संवाद के जरिए निष्पक्ष समाधान निकालने की अपील की है।