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Faridabad News: चिरायु एक्सटेंशन से मोहभंग, आठ महीने में आधे रह गए कार्डधारक

Thu, 06 Aug 2026 12:02 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 12:02 AM IST
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Disillusionment with Chirayu Extension: Cardholders halved in eight months.
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1500 रुपये के वार्षिक शुल्क पर पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाली योजना से लाभार्थियों का भरोसा उठ रहा

921 सक्रिय कार्डधारक थे सितंबर 2025 में
461 रह गए कार्डधारक मई 2026 तक घटकर


अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। सरकार की चिरायु एक्सटेंशन योजना औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में दम तोड़ती नजर आ रही है। 1500 रुपये के वार्षिक शुल्क पर पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाली योजना से लाभार्थियों का भरोसा लगातार उठ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले आठ महीने में सक्रिय कार्डधारकों की संख्या 50 फीसदी से कम हो गई है। हालत यह है कि पुराने कार्डधारक नवीनीकरण नहीं करा रहे हैं।


स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में जिले में 921 सक्रिय कार्डधारक थे, जो मई 2026 तक घटकर केवल 461 रह गए। यानी आठ महीने में करीब 50 प्रतिशत लाभार्थियों ने योजना से किनारा कर लिया। सरकार ने मध्य आय वर्ग के परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से चिरायु एक्सटेंशन योजना शुरू की थी, लेकिन जिले में यह उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों का भरोसा इसलिए कम हो रहा है क्योंकि कार्ड होने के बावजूद जरूरत पड़ने पर मनचाहा इलाज नहीं मिल पाता। कई महत्वपूर्ण इलाज पैकेज केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में विकल्प सीमित रह जाते हैं।
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जिले में सात लाख से अधिक है आयुष्मान कार्ड धारक

गौरतलब है कि जिले में आयुष्मान-चिरायु और आयुष्मान वयोवंदना योजना के तहत 7.20 लाख से अधिक कार्डधारक हैं, लेकिन इनके इलाज के लिए केवल 44 अस्पताल ही सूचीबद्ध हैं। 25 लाख से अधिक आबादी वाले औद्योगिक जिले के लिए यह संख्या बेहद कम है। परिणामस्वरूप अधिकांश मरीज बादशाह खान नागरिक अस्पताल और ईएसआई मेडिकल कॉलेज जैसे सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं, जहां पहले से ही भारी भीड़ रहती है। स्वास्थ्य जानकारों का मानना है कि यदि अस्पतालों का नेटवर्क नहीं बढ़ाया गया, निजी अस्पतालों के क्लेम का समय पर भुगतान नहीं हुआ, इलाज प्रक्रिया सरल नहीं बनाई गई तो चिरायु एक्सटेंशन योजना में लोगों का भरोसा और कमजोर होगा। ऐसे में सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा का उद्देश्य भी अधूरा रह सकता है।
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