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Faridabad News: शारीरिक अक्षमता को नहीं बनने दिया बाधा, अच्छे नंबर हासिल किए

Fri, 17 Apr 2026 11:47 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:47 PM IST
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Did not let physical disability become a hindrance, scored good marks
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से पाया मुकाम
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सूरज कुमार

फरीदाबाद। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के परिणामों ने इस बार एक नई मिसाल पेश की है। जिले के कुछ स्पेशल चाइल्ड (विशेष आवश्यकता वाले बच्चे) ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से साबित कर दिया है कि शारीरिक अक्षमता या चुनौतियां कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। इन छात्रों ने न केवल परीक्षा उत्तीर्ण की, बल्कि बेहतरीन अंक भी हासिल किए।

सेक्टर-14 स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल के छात्र निपुण सभरवाल के लिए पढ़ना-लिखना एक कठिन चुनौती थी। लेकिन निपुण ने हार मानने के बजाय लगातार अभ्यास का रास्ता चुना और 83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सबको गौरवान्वित किया।
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वहीं, राही अग्रवाल ने अपनी कमजोरी को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया। अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन और कठोर परिश्रम के दम पर उन्होंने 81.3 प्रतिशत अंक अर्जित किए।
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इस बार सबसे प्रेरणादायक कहानी ध्रुव कुमार मंगला की रही। परीक्षा से ठीक चार महीने पहले ध्रुव की घुटने की सर्जरी हुई थी। दर्द और शारीरिक तकलीफों के बावजूद ध्रुव ने फिजियोथेरेपी जारी रखी और अपनी पढ़ाई से ध्यान नहीं भटकने दिया। लिखने में समस्या होने के बावजूद उन्होंने 96 प्रतिशत अंक लाकर एक अद्भुत मिसाल पेश की है।

इसी तरह, राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नंगला गुजरान के मोहित ने भी अपनी शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हुए परीक्षा में सफलता का परचम लहराया।


अभिभावकों का अटूट विश्वास

इन बच्चों की सफलता के पीछे उनके अभिभावकों का भी बड़ा योगदान है। अभिभावकों का कहना है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अन्य गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर पाते हैं।
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बातचीत
मेरे परिवार ने हमेशा सपोर्ट किया। मुझे ह्यूमैनिटी सब्जेक्ट पसंद है। पढ़ाई के बाद मैं फुटबॉल खेलता हूं। - निपुण
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मेरे परिवार ने कभी मुझे कमजोर महसूस नहीं होने दिया। इसी का नतीजा है कि मैंने एग्जाम में अच्छा स्कोर किया। - राही अग्रवाल
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बोर्ड एग्जाम लिखने के लिए मुझे मदद लेनी पड़ी। मैंने बोर्ड एग्जाम के समय बहुत मेहनत की। इसके अलावा परिवार ने हमेशा सपोर्ट किया। - ध्रुव कुमार मंगला
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मैंने खुद को कभी कमजोर महसूस नहीं किया। प्रत्येक दिन स्कूल जाना और पढ़ाई करना, बोर्ड एग्जाम से पहले यही मेरा रूटीन था। - मोहित
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