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Faridabad News: समझौते के बावजूद दुष्कर्म मामले में आरोपी को नहीं मिली जमानत
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सूरजकुंड थाना में 30 सितंबर 2025 को दर्ज हुई थी एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। 25 साल की युवती से दुष्कर्म और मारपीट के मामले में आरोपी मोहम्मद आसिफ को जिला अदालत से राहत नहीं मिली। दिल्ली बवाना के रहने वाले मोहम्मद आसिफ के अधिवक्ता की ओर से जमानत याचिका दायर कर दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने समझौता कर लिया है। हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए भी याचिका दायर की हुई है। ये 11 अक्तूबर 2025 से हिरासत में है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि हालात में कोई बदलाव नहीं है और याचिका खारिज होनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने कहा कि एफआईआर के अनुसार ये गंभीर अपराध है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश हो चुका है। शिकायतकर्ता युवती ने अपने बयान दिए हैं जिसमें उसने आरोपी को जमानत मिलने से कोई आपत्ति नहीं होना बताया है। युवती ने कहा है कि वो आरोपी से परिचित है और उससे शादी करना चाहती है। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार, किसी मुखबिर को गंभीर और जघन्य प्रकृति के गैर-समझौते योग्य अपराध की शिकायत वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है, जिसका समाज पर असर पड़ता है। ये कहते हुए जिला अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। सूरजकुंड थाने में ये एफआईआर 30 सितंबर 2025 को दर्ज हुई।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। 25 साल की युवती से दुष्कर्म और मारपीट के मामले में आरोपी मोहम्मद आसिफ को जिला अदालत से राहत नहीं मिली। दिल्ली बवाना के रहने वाले मोहम्मद आसिफ के अधिवक्ता की ओर से जमानत याचिका दायर कर दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने समझौता कर लिया है। हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए भी याचिका दायर की हुई है। ये 11 अक्तूबर 2025 से हिरासत में है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि हालात में कोई बदलाव नहीं है और याचिका खारिज होनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने कहा कि एफआईआर के अनुसार ये गंभीर अपराध है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश हो चुका है। शिकायतकर्ता युवती ने अपने बयान दिए हैं जिसमें उसने आरोपी को जमानत मिलने से कोई आपत्ति नहीं होना बताया है। युवती ने कहा है कि वो आरोपी से परिचित है और उससे शादी करना चाहती है। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार, किसी मुखबिर को गंभीर और जघन्य प्रकृति के गैर-समझौते योग्य अपराध की शिकायत वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है, जिसका समाज पर असर पड़ता है। ये कहते हुए जिला अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। सूरजकुंड थाने में ये एफआईआर 30 सितंबर 2025 को दर्ज हुई।
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