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Faridabad News: महापंचायत में पुनर्वास के बिना तोड़फोड़ रोकने की उठी मांग

Mon, 08 Jun 2026 12:38 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 12:38 AM IST
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Demand raised in the Mahapanchayat to stop demolition without rehabilitation
फरीदाबाद में नगर निगम द्वारा नेहरू कॉलोनी में तोड़फोड़ का विरोध करते हुए इकट्ठा हुए कॉलोनी वासी
चेतावनी... यदि प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली कूच भी किया जाएगा
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चार घंटे तक धूप में डटे रहे लोग, पुलिस ने धरना स्थल से हटाया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नेहरू कॉलोनी में प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई के विरोध ने अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। रविवार को आयोजित महापंचायत में स्थानीय लोगों, कांग्रेस नेताओं, सामाजिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने एक मंच पर आकर पुनर्वास से पहले किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ रोकने की मांग की। सभा में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी तो आंदोलन को शहर से बाहर प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली कूच भी किया जाएगा।

करीब चार घंटे तक तपती धूप में बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे रहे। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को धरना स्थल से हटाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
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पुनर्वास बनाम विकास का मुद्दा बना आंदोलन का केंद्र

महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं है लेकिन हजारों परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि वर्षों से यहां रह रहे लोगों के सामने अब आवास और रोजगार दोनों का संकट खड़ा हो गया है। सभा में मौजूद लोगों ने प्रशासन से मांग की कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों से बातचीत की जाए और पुनर्वास की स्पष्ट नीति सार्वजनिक की जाए। उनका कहना था कि बिना ठोस योजना के कार्रवाई सामाजिक संकट पैदा कर सकती है।
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डीपीआर सार्वजनिक करने की उठी मांग

पंयायत में कांग्रेस नेता विजय प्रताप ने आरोप लगाया कि 30 मई से शुरू हुई कार्रवाई लगातार विस्तार ले रही है जबकि अब तक संबंधित परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और नक्शा सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में सीमित क्षेत्र की बात कही गई थी लेकिन अब कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में सार्वजनिक परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता है तो कॉलोनीवासी सहयोग करने को तैयार हैं लेकिन पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि अनंगपुर की तरह नेहरू कॉलोनी को भी बचा लिया जाएगा। इसके लिए लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। किसान आंदोलन भी लंबे समय तक चला था तब जाकर तीन काले कानून वापस हुए थे।

अन्य कॉलोनियों में भी बढ़ी चिंता

धरने में नगर निगम यूनियन, विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिक मंचों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। वक्ताओं का कहना था कि नेहरू कॉलोनी का मामला केवल एक बस्ती तक सीमित नहीं है बल्कि शहर की अन्य अनधिकृत और विवादित कॉलोनियों के लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना था कि यदि पुनर्वास की व्यवस्था के बिना इस प्रकार की कार्रवाई होती है तो भविष्य में अन्य क्षेत्रों के हजारों परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे शहर में असंतोष का माहौल पैदा होगा।

संघर्ष समिति तय करेगी आंदोलन की अगली दिशा

विजय प्रताप ने बताया कि कॉलोनीवासियों की एक संघर्ष समिति गठित की जाएगी, जिसकी सहमति से आंदोलन की आगामी रणनीति तय होगी। अगले सप्ताह सरकार को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास और तोड़फोड़ रोकने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो अनंगपुर की तर्ज पर और बड़ी महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जाएगा। साथ ही प्रभावित परिवारों की ओर से कानूनी लड़ाई भी जारी रहेगी क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है। महापंचायत में पहुंचे पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनके समर्थन का भरोसा दिया।

धारा-163 के बीच हुई महापंचायत

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पहले ही क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर रखी थी, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। महापंचायत को देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और पूरे इलाके में निगरानी रखी गई। प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।


यह है पूरा मामला

नेहरू कॉलोनी में भूमि और अतिक्रमण विवाद को लेकर प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। प्रशासन का दावा है कि संबंधित भूमि सरकारी है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय निवासी वर्षों से यहां निवास करने और पुनर्वास के अधिकार का दावा कर रहे हैं। इसी विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और रविवार की महापंचायत को आंदोलन के अब तक के सबसे महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।
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