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दिल्ली-मुंबई के सबसे व्यस्त ट्रैक पर शार्टकट के लिए जान जोखिम में डाल रहे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 28 May 2016 10:34 AM IST
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ट्रैक पार करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-फरीदाबाद सेक्शन से होकर प्रतिदिन सैकड़ों गाडिय़ां मुंबई और दक्षिण भारत की ओर जाती हैं। अब निजामुद्दीन से आगरा के बीच देश की पहली गतिमान एक्सप्रेस ट्रेन भी दौडने लगी है। हर पांच मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। ऐसे में यह दिल्ली-मुंबई के बीच सबसे व्यस्ततम ट्रैक बन गया है।
लापरवाही के चलते हर दिन लोगों की जान जा रही है। बावजूद लोग लापरवाही करने से बाज नहीं आते। शार्ट कट के चक्कर में अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। ओल्ड स्टेशन, न्यूटाउन, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशन पर ऐसे नजारे को आसानी से देखा जा सकता है। अमर उजाला के एक सुधी पाठन ने एक ऐसी तस्वीर भेजी है जिसमें एक बुजुर्ग खड़ी मालगाड़ी को पारकर दूसरी ओर जाने का प्रयास कर रहा है
न उम्र का ख्याल न शरीर का :
उक्त स्टेशनों पर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को निकालने के लिए मालगाडिय़ों को स्टेशन पर रोक लिया जाता है। ऐसे में यात्री गाडिय़ों से उतरने वाले लोग शार्टकट के चक्कर में रेलवे ट्रैक पार करने से बाज नहीं आते।
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कई बार तो खड़ी मालगाड़ी के दो डिब्बों के बीच से निकलने से गुजेर नहीं करते। इनमें युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे में यदि ट्रेन चल जाए तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। ये हाल तब है जबकि हर साल 350 से अधिक लोग ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गवां रहे हैं।
फु ट ओवरब्रिज की कमी है प्रमुख कारण:
यात्रियों की संख्या को देखते हुए स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज की कमी है। ओल्ड, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशन पर बने ओवरब्रिज भीड़ के हिसाब से बेहद सकरा है। यदि एक शटल स्टेशन पर आ जाए तो उसकी पूरी सवारियों को आसानी से इस पार से उस पर जाना किसी जंग लडने से कम नहीं होता। यदि आपको ट्रेन पकडनी है तो उसे पकड़ पाना मुश्किल होता है। इसी भीड़ से बचने के लिए यात्री जान जोखिम में डाल रहे हैं।
लापरवाही बरतती है आरपीएफ व जीआरपी:
कहने को तो स्टेशनों पर आरपीएफ और जीआरपी गश्त करती है लेकिन ट्रैक पार करने वालों के खिलाफ सिर्फ खानापूर्ति करती है। यानि 10-20 यात्रियों का ट्रैक पार करने के आरोप में चालान कर पल्ला झाड़ लेती है। इसके बाद पूरे दिन अनदेखी करते रहते हैं। न्यूटाउन, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशनों पर तो किसी का चालान तक नहीं किया जाता।
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लापरवाही के चलते हर दिन लोगों की जान जा रही है। बावजूद लोग लापरवाही करने से बाज नहीं आते। शार्ट कट के चक्कर में अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। ओल्ड स्टेशन, न्यूटाउन, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशन पर ऐसे नजारे को आसानी से देखा जा सकता है। अमर उजाला के एक सुधी पाठन ने एक ऐसी तस्वीर भेजी है जिसमें एक बुजुर्ग खड़ी मालगाड़ी को पारकर दूसरी ओर जाने का प्रयास कर रहा है
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न उम्र का ख्याल न शरीर का :
उक्त स्टेशनों पर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को निकालने के लिए मालगाडिय़ों को स्टेशन पर रोक लिया जाता है। ऐसे में यात्री गाडिय़ों से उतरने वाले लोग शार्टकट के चक्कर में रेलवे ट्रैक पार करने से बाज नहीं आते।
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कई बार तो खड़ी मालगाड़ी के दो डिब्बों के बीच से निकलने से गुजेर नहीं करते। इनमें युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे में यदि ट्रेन चल जाए तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। ये हाल तब है जबकि हर साल 350 से अधिक लोग ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गवां रहे हैं।
फु ट ओवरब्रिज की कमी है प्रमुख कारण:
यात्रियों की संख्या को देखते हुए स्टेशनों पर फुट ओवरब्रिज की कमी है। ओल्ड, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशन पर बने ओवरब्रिज भीड़ के हिसाब से बेहद सकरा है। यदि एक शटल स्टेशन पर आ जाए तो उसकी पूरी सवारियों को आसानी से इस पार से उस पर जाना किसी जंग लडने से कम नहीं होता। यदि आपको ट्रेन पकडनी है तो उसे पकड़ पाना मुश्किल होता है। इसी भीड़ से बचने के लिए यात्री जान जोखिम में डाल रहे हैं।
लापरवाही बरतती है आरपीएफ व जीआरपी:
कहने को तो स्टेशनों पर आरपीएफ और जीआरपी गश्त करती है लेकिन ट्रैक पार करने वालों के खिलाफ सिर्फ खानापूर्ति करती है। यानि 10-20 यात्रियों का ट्रैक पार करने के आरोप में चालान कर पल्ला झाड़ लेती है। इसके बाद पूरे दिन अनदेखी करते रहते हैं। न्यूटाउन, बल्लभगढ़ और पलवल स्टेशनों पर तो किसी का चालान तक नहीं किया जाता।