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Faridabad News: एक्सपोर्ट कारोबारियों के घर पर ईडी ने मारा छापा
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फर्जी इनवॉयस से आईटीसी लेने का आरोप, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटा रही टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरीदाबाद के सेक्टर-15 में छापा मारा। प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीमों ने फरीदाबाद के अलावा दिल्ली, यूपी के मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद सहित नौ ठिकानों पर कार्रवाई की।
सुबह से शुरू हुई छापेमारी घंटों तक चलती रही। अभी तक बरामदगी का कुछ ब्यौरा पता नहीं चल सका है। फरीदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय की टीम सुबह करीब 6 बजे सेक्टर-15 के मकान नंबर 972 में रहने वाले उमंग अग्रवाल की तलाशी ली। उमंग अग्रवाल दवा का कारोबारी बताया जा रहा है। उसकी फर्म दिल्ली में पंजीकृत बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय दस्तावेजों, कारोबारी रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी अलग-अलग जानकारी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। सेक्टर-15 में छापेमारी के वक्त मौजूद मिले लोगों ने बताया कि कारोबारी यहां कभी-कभार आते हैं। वे कानपुर में रहते हैं। यहां पर उनके घरेलू सहायक ही रहते हैं। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के भी सदस्य हैं। सेक्टर-15 में छापेमारी से पहले यह टीम सेक्टर-आठ में विनोद अग्रवाल के यहां पहुंची थी। वहां से जानकारी मिलने के बाद टीम सेक्टर-15 पहुंची। सूत्रों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच मेसर्स जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क को लेकर है। जांच एजेंसी के अनुसार नेटवर्क में फर्जी इनवॉयस और ई-वे बिल तैयार किए गए और वास्तविक माल की आवाजाही के बिना आईटीसी हासिल करने तथा उसे आगे दूसरी इकाइयों को पास करने का आरोप है। जांच में जीएसटी अधिकारियों के स्तर पर करीब 9.63 करोड़ रुपये के आईटीसी का कथित तौर पर गलत तरीके से लाभ लेने की बात सामने आई है। वहीं करीब 10.28 करोड़ रुपये के आईटीसी को आगे पास किए जाने की जानकारी भी जांच एजेंसी की ओर से दी गई है।
फर्जी कंपनियों के जरिए रकम घुमाने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक कथित नेटवर्क में कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर लेनदेन, रकम की लेयरिंग और नकद निकासी किए जाने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय अब इन वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी आईटीसी से जुड़ी रकम किन व्यक्तियों और कंपनियों तक पहुंची। तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित रकम की मनी ट्रेल का पता लगाना, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की पहचान करना तथा दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्य जुटाना है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल सोमवार को हुई कार्रवाई के संबंध में किसी गिरफ्तारी या किसी विशेष बरामदगी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगालने में जुटी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरीदाबाद के सेक्टर-15 में छापा मारा। प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीमों ने फरीदाबाद के अलावा दिल्ली, यूपी के मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद सहित नौ ठिकानों पर कार्रवाई की।
सुबह से शुरू हुई छापेमारी घंटों तक चलती रही। अभी तक बरामदगी का कुछ ब्यौरा पता नहीं चल सका है। फरीदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय की टीम सुबह करीब 6 बजे सेक्टर-15 के मकान नंबर 972 में रहने वाले उमंग अग्रवाल की तलाशी ली। उमंग अग्रवाल दवा का कारोबारी बताया जा रहा है। उसकी फर्म दिल्ली में पंजीकृत बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय दस्तावेजों, कारोबारी रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी अलग-अलग जानकारी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। सेक्टर-15 में छापेमारी के वक्त मौजूद मिले लोगों ने बताया कि कारोबारी यहां कभी-कभार आते हैं। वे कानपुर में रहते हैं। यहां पर उनके घरेलू सहायक ही रहते हैं। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के भी सदस्य हैं। सेक्टर-15 में छापेमारी से पहले यह टीम सेक्टर-आठ में विनोद अग्रवाल के यहां पहुंची थी। वहां से जानकारी मिलने के बाद टीम सेक्टर-15 पहुंची। सूत्रों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच मेसर्स जंबूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स लिमिटेड से जुड़े कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क को लेकर है। जांच एजेंसी के अनुसार नेटवर्क में फर्जी इनवॉयस और ई-वे बिल तैयार किए गए और वास्तविक माल की आवाजाही के बिना आईटीसी हासिल करने तथा उसे आगे दूसरी इकाइयों को पास करने का आरोप है। जांच में जीएसटी अधिकारियों के स्तर पर करीब 9.63 करोड़ रुपये के आईटीसी का कथित तौर पर गलत तरीके से लाभ लेने की बात सामने आई है। वहीं करीब 10.28 करोड़ रुपये के आईटीसी को आगे पास किए जाने की जानकारी भी जांच एजेंसी की ओर से दी गई है।
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फर्जी कंपनियों के जरिए रकम घुमाने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक कथित नेटवर्क में कई फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के माध्यम से सर्कुलर लेनदेन, रकम की लेयरिंग और नकद निकासी किए जाने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय अब इन वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर फर्जी आईटीसी से जुड़ी रकम किन व्यक्तियों और कंपनियों तक पहुंची। तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित रकम की मनी ट्रेल का पता लगाना, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं की पहचान करना तथा दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्य जुटाना है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल सोमवार को हुई कार्रवाई के संबंध में किसी गिरफ्तारी या किसी विशेष बरामदगी की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर कथित फर्जी आईटीसी नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगालने में जुटी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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