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Faridabad News: कोर्ट अहलमद होमगार्ड के साथ मिल कर रहा था ट्रेफिक चालान में फर्जीवाड़ा, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Fri, 03 Oct 2025 12:16 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 03 Oct 2025 12:16 AM IST
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Court: Ahlmad, in connivance with Home Guard, was involved in fraudulent traffic challans, anticipatory bail plea rejected
सेंट्रल थाने में 13 सितंबर 2025 को दर्ज हुई थी एफआईआर, 25 ट्रैफिक चालान के डेटा की जांच हुई तो सामने आया मामला
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पुलिस के काटे चालान की धारा को कोर्ट के ऑनलाइन सिस्टम में बदलकर कम रुपयों में कराते थे सेटलमेंट


अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिला अदालत में कार्यरत कोर्ट अहलमद होमगार्ड जवान के साथ मिलकर ट्रेफिक चालान फर्जीवाड़ा कर रहा था। मामले में आरोपी अहलमद विरेंद्र को जिला अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिली। अहलमद के वकील की ओर से याचिका दायर कर दलील दी गई कि उसे केस में गलत फंसाया गया है। अहलमद के तौर पर इन्हें ट्रेफिक चालान शाखा से चालान की हार्ड कॉपी मिलती थी। ये चालान की हार्ड कॉपी व ऑनलाइन कॉपी के मिलान के लिए जिम्मेदार नहीं था।
वहीं अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि अहलमद विरेंद्र सह-आरोपी होमगार्ड शुभम के साथ मिलीभगत करके ट्रैफिक उल्लंघन के अपराधों की कम डिग्री का उल्लेख करके ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त ट्रैफिक चालानों में हेराफेरी करता था। होमगार्ड शुभम ने अलग-अलग तारीख पर यूपीआई के जरिये विरेंद्र के खाते में 44 हजार रुपये भेजे हैं। दोनों पक्षों को सुनकर अदालत ने विरेंद्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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मामले में सेंट्रल थाने में 13 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज हुई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पत्र के बाद प्रिंसिपल जज फेमिली कोर्ट-कम-नोडल ऑफिसर (कम्प्यूटराइजेशन ब्रांच) ने मामले में जांच की। जांच पूरी कर उन्होंने रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के अनुसार जिला अदालत की डाक ट्रैफिक चालान शाखा के औचक दौरे और जांच में पाया कि विपिन नामक पुलिसकर्मी, जिसे डाक ट्रैफिक चालान के पंजीकरण के उद्देश्य से इस शाखा में तैनात किया गया था, के पास बिना किसी अधिकार के मजिस्ट्रेट स्तर के विभिन्न न्यायिक न्यायालयों के कंप्यूटर सिस्टम की पूर्ण पहुंच थी। पूछने पर वह इसके लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इससे शाखा में ट्रैफिक चालान निपटान प्रक्रिया पर शक हुआ।
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रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भेजे गए डाक ट्रैफिक चालान की जांच करने पर पाया कि भारी मोटर वाहनों से संबंधित कुछ चालान कम गंभीर अपराधों के लिए जारी किए गए थे। इन चालानों की तुलना मूल चालानों से की गई तो सामने आया कि मूल रूप से जारी किए गए चालानों में उल्लेखित अपराधों का विवरण अदालत के उठाए जा रहे चालानों में उल्लेखित अपराधों के विवरण से मेल नहीं खा रहा था। यह सामने आया कि ट्रैफिक चालानों में उल्लेखित अपराधों के विवरण में गड़बड़ी व एडिटिंग की गई थी।

रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि एक वाहन के मालिक तिलपत की पॉप कॉलोनी निवासी सोनू बघेल से पूछताछ की गई तो उन्होंने कहा कि चालान के निपटान के लिए होमगार्ड संदीप से बात हुई और 10 हजार रुपये संदीप को यूपीआई व 1 हजार नकद दिए गए। होमगार्ड संदीप से पूछताछ में पता चला कि इस चालान के निपटान के लिए उसने पंकज को यूपीआई से 9500 रुपये दिए थे। पंकज ने बताया कि उसने होमगार्ड शुभम को 6500 रुपये यूपीआई व 1 हजार रुपये नकद देकर चालान का भुगतान किया। कुल 25 ट्रैफिक चालान की गड़बड़ी जांच में सामने आई। होमगार्ड शुभम आगे विरेंद्र को रुपये देकर चालान भुगतान कराता था। होमगार्ड शुभम को 16 सितंबर को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
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