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बकाया भु्गतान न होने पर सोमवार से निगम के ठेकेदारों ने हड़ताल किया ऐलान
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फरीदाबाद। नगर निगम के क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य पर सोमवार से ब्रेक लग सकता है। नगर निगम ठेकेदार वेलफेयर एसोसिएशन ने शुक्रवार को नगर आयुक्त को लिखित पत्र देकर हड़ताल का ऐलान किया है। ठेकेदारों का कहना है कि अप्रैल 2018 से लेकर अब तक 150 से ज्यादा ठेकेदारों का 70 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान निगम की ओर से नहीं किया गया है। इस कारण ठेकेदार आगे काम नहीं कर पा रहे हैं। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक नगर निगम बकाया नहीं दे देता, तब तक शहर में जारी विकास कार्यों को बंद कर दिया जाएगा।
नगर निगम क्षेत्र में इस समय 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के विकास कार्य चल रहे हैं। इसमें सीएम घोषणा के काम सबसे अधिक हैं। इसके अलावा हर एक वार्ड में इंटरलॉकिंग टाइल, नालियां बनाना, सीवर लाइन, पानी की लाइन बिछाने का निर्माण कार्य चल रहा है। नगर निगम ठेकेदार वेलफेयर एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले सभी 150 से ज्यादा ठेकेदार काम कर रहे हैं। लेकिन इन ठेकेदारों की रकम अभी तक नहीं मिली है। एसोसिएशन के प्रधान गिरिराज ने बताया कि ठेकेदारों का अप्रैल 2018 से लेकर अब तक का भुगतान बाकी है। लॉकडाउन के बाद से लेकर अभी तक कोई रकम नहीं मिली है।
वैसे हाल में नगर निगम कमिश्नर की तरफ से 5 करोड़ रुपये के करीब रकम मिली है, जिसमें ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के नाम पर ठेकेदारों को भुगतान किया गया है। बाकी के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कोई रकम नहीं मिली है। ठेकेदारों के पास भी इतना पैसा नहीं है कि वह आगे काम जारी रख सकें। इसलिए जब तक बकाया 70 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो जाता ठेकेदार आगे कार्य नहीं करेंगे।
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अधिकारियों के कार्यालय के लगाने पड़ते हैं चक्कर
उन्होंने बताया कि ठेकेदारों की इस बार दिवाली भी काली मनी है। गिरिराज ने बताया कि पीडब्ल्यूडी नियम की मानें तो रकम के लिए फाइल जेई से एडीओ फिर एक्सईएन से पास होकर सीधे अकाउंट ब्रांच में जानी चाहिए। मगर नगर निगम में इस वक्त नियमों को बदल दिया गया है। इस वक्त भुगतान के लिए ठेकेदारों की फाइलों को जेई, एसडीओ, एक्सईएन के अलावा चीफ इंजीनियर और एडिशनल कमिश्नर तक भेजा जा रहा है। इससे ठेकेदारों को भुगतान में ज्यादा समय लग रहा है। इस पूरी कवायद के चलते सभी अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसलिए ये नियम भी बदलना चाहिए।
इन कामों पर पड़ेगा असर
1- इंटरलॉकिंग टाइल
2- नालियां
3- सीवर लाइन
4- पानी की पाइप लाइन
5- पार्कों की चारदीवारी
कोट
ठेकेदारों के हड़ताल की सूचना अब तक मेरे पास नहीं है लेकिन बकाया रकम की बात है तो जितना पैसा नगर निगम के पास होगा उसी हिसाब से ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा।
-डॉ. यश गर्ग, नगर आयुक्त, नगर निगम
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नगर निगम क्षेत्र में इस समय 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा के विकास कार्य चल रहे हैं। इसमें सीएम घोषणा के काम सबसे अधिक हैं। इसके अलावा हर एक वार्ड में इंटरलॉकिंग टाइल, नालियां बनाना, सीवर लाइन, पानी की लाइन बिछाने का निर्माण कार्य चल रहा है। नगर निगम ठेकेदार वेलफेयर एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले सभी 150 से ज्यादा ठेकेदार काम कर रहे हैं। लेकिन इन ठेकेदारों की रकम अभी तक नहीं मिली है। एसोसिएशन के प्रधान गिरिराज ने बताया कि ठेकेदारों का अप्रैल 2018 से लेकर अब तक का भुगतान बाकी है। लॉकडाउन के बाद से लेकर अभी तक कोई रकम नहीं मिली है।
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वैसे हाल में नगर निगम कमिश्नर की तरफ से 5 करोड़ रुपये के करीब रकम मिली है, जिसमें ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के नाम पर ठेकेदारों को भुगतान किया गया है। बाकी के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कोई रकम नहीं मिली है। ठेकेदारों के पास भी इतना पैसा नहीं है कि वह आगे काम जारी रख सकें। इसलिए जब तक बकाया 70 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो जाता ठेकेदार आगे कार्य नहीं करेंगे।
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अधिकारियों के कार्यालय के लगाने पड़ते हैं चक्कर
उन्होंने बताया कि ठेकेदारों की इस बार दिवाली भी काली मनी है। गिरिराज ने बताया कि पीडब्ल्यूडी नियम की मानें तो रकम के लिए फाइल जेई से एडीओ फिर एक्सईएन से पास होकर सीधे अकाउंट ब्रांच में जानी चाहिए। मगर नगर निगम में इस वक्त नियमों को बदल दिया गया है। इस वक्त भुगतान के लिए ठेकेदारों की फाइलों को जेई, एसडीओ, एक्सईएन के अलावा चीफ इंजीनियर और एडिशनल कमिश्नर तक भेजा जा रहा है। इससे ठेकेदारों को भुगतान में ज्यादा समय लग रहा है। इस पूरी कवायद के चलते सभी अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसलिए ये नियम भी बदलना चाहिए।
इन कामों पर पड़ेगा असर
1- इंटरलॉकिंग टाइल
2- नालियां
3- सीवर लाइन
4- पानी की पाइप लाइन
5- पार्कों की चारदीवारी
कोट
ठेकेदारों के हड़ताल की सूचना अब तक मेरे पास नहीं है लेकिन बकाया रकम की बात है तो जितना पैसा नगर निगम के पास होगा उसी हिसाब से ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा।
-डॉ. यश गर्ग, नगर आयुक्त, नगर निगम