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टोक्यो पैरालंपिक: कोरोना रोक सका न पोलियो, मेडल जीत निभाया वादा

Tue, 31 Aug 2021 11:27 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 11:27 PM IST
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Corona could not stop, promised to win medal
फरीदाबाद उंचा गांव में टोक्यों पैरालंपिक में सिंहराज अधाना ने कास्य पदक जीतने की खुशी में घर पर न - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। टोक्यो पैरालंपिक में फरीदाबाद के तिगांव निवासी सिंहराज अधाना ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा एसएच-1 के फाइनल मुकाबले में कांस्य पदक जीतकर जहां पूरे देश का नाम रोशन किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किए अपने वादे को भी निभाया है। पीएम मोदी से हुए संवाद में अधाना ने इस बात का जिक्र किया था कि उन्होंने आर्थिक परेशानियां और कोरोना की दूसरी लहर का माहौल व खुद कोरोना संक्रमित होते हुए भी अपना संघर्ष जारी रखा है, और वह मेडल लाएंगे। आखिरकार सिंहराज ने अपना वादा निभाया।
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जन्म से पोलियोग्रस्त अधाना को प्रधानमंत्री ने मुश्किलों को पार कर इतिहास रचने के लिए बधाई दी है। अधाना मूलरूप से फरीदाबाद के तिगांव निवासी हैं। मौजूदा समय में उनका संयुक्त परिवार बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में रहता है। पैरालंपिक में जाने से पहले सिंहराज ने पीएम मोदी को पदक जीतने का आश्वासन दिया था। परिवार ने आर्थिक मुश्किलों का सामना कर इस मुकाम तक पहुंचाया है। अधाना के मुताबिक, वह ओलंपिक जीतने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। ऐसे में वह उस समय भी तैयारियों में जुटे रहे जब कोरोना की दूसरी लहर के कारण दुनिया थम गई थी। अधाना ने उस माहौल की मायूसी से निकलने के लिए घर में ही शूटिंग रेंज तैयार कर ली। अभ्यास जारी रखा। इससे उनका हौसला बना रहा। तैयारी कर जीत की जिद का जुनून उन्होंने बनाए रखा।
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पीएम मोदी से कहा था, सरकारी मदद से बढ़ते हैं हौसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैरालंपिक खेलों में जाने से पहले कुल दस खिलाड़ियों से बात कर सभी प्रतिभागियों की हौसलाअफजाई की थी। ऑनलाइन संवाद में सिंहराज से करीब छह मिनट तक बात की थी। इस दौरान पीएम ने खेल की चुनौती, सरकारी प्रोत्साहन और प्रेरणा पर बात की। सिंहराज ने पूरे परिवार के सहयोग से खेल में बने रहने की बात कही। शूटिंग खेल के अभ्यास में आने वाली समस्याओं में खर्च को बड़ा मसला बताया। बताया कि एक समय ऐसा आया कि पत्नी कविता ने अपने आभूषण गिरवी रखकर उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में अभ्यास पूरी तरह बंद हो गया था।
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अपने विदेशी खिलाड़ी दोस्तों से अभ्यास का तरीका पूछते थे। विदेशी दोस्त लगातार खेल अभ्यास कर रहे थे जबकि स्थानीय स्तर पर अभ्यास की छूट नहीं थी। ऐसे में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होते ही उन्होंने सबसे पहले 10 मीटर और 50 मीटर का शूटिंग रेंज बनवाया। इसके लिए वर्ष 2018 में एशियन गेम्स में प्रदेश सरकार से मिली इनामी राशि काम आई। ओलंपिक में इस्तेमाल होने वाले एमीनेशन से ही पैरालंपिक की तैयारी की। इससे हाल ही में यूएई में हुए विश्वकप में पदक हासिल किया था। इसके अलावा नेशनल राइफल शूटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से खेल को बल मिला।

हौसलों के दम पर जिंदगी
सिंहराज अधाना इस वर्ष मई माह में कोरोना ग्रस्त भी हुए। हालांकि, हौसलों के दम पर जिंदगी जीने वाले सिंहराज को न तो पोलियो रोक सका और न कोरोना। कोरोना संक्रमण ने पूरी दुनिया की रफ्तार को थाम दिया लेकिन अधाना उस समय भी नहीं रुके। उन्होंने लगातार अपना अभ्यास जारी रखा। परिवार के लोगों का कहना है कि होम आइसोलेशन में ही कोरोना को मात दी। इस दौरान अपने अभ्यास से समझौता नहीं किया। वह सेहत और खेल के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। अब परिवार को आस है कि चार सितंबर को होने वाले 50 मीटर पिस्टल एसएच-1 में गोल्ड जीत कर फिर से स्वर्णिम इतिहास रचें।
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