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Faridabad News: तिलपत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शुरू नहीं हो पाया कमरों का निर्माण
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। तिलपत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में आठ नए कमरों के निर्माण का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब 61 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इन कमरों का प्रस्ताव लंबे समय से फाइलों में ही अटका हुआ है। निर्माण कार्य में देरी के कारण नए शैक्षणिक सत्र में भी छात्रों को राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में इस समय केवल 12 कमरे हैं, जिनमें सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र में बड़ी संख्या में नए छात्रों के प्रवेश की उम्मीद है। ऐसे में कमरों की कमी के कारण विद्यालय परिसर में जगह की समस्या और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो आसपास के क्षेत्रों से इस विद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं।
इसके अलावा जिले के कई विद्यालयों में भवन या कमरों का निर्माण कार्य बेहद ही धीमी गति से चल रहा है। अध्यापकों ने भी निर्माण कार्य में हो रही देरी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भवन निर्माण समय पर नहीं होने से पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कमरों की कमी के कारण कई कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाना पड़ता है, जिससे छात्रों को भी असुविधा होती है।
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फरीदाबाद। तिलपत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में आठ नए कमरों के निर्माण का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। करीब 61 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इन कमरों का प्रस्ताव लंबे समय से फाइलों में ही अटका हुआ है। निर्माण कार्य में देरी के कारण नए शैक्षणिक सत्र में भी छात्रों को राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में इस समय केवल 12 कमरे हैं, जिनमें सभी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र में बड़ी संख्या में नए छात्रों के प्रवेश की उम्मीद है। ऐसे में कमरों की कमी के कारण विद्यालय परिसर में जगह की समस्या और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो आसपास के क्षेत्रों से इस विद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं।
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इसके अलावा जिले के कई विद्यालयों में भवन या कमरों का निर्माण कार्य बेहद ही धीमी गति से चल रहा है। अध्यापकों ने भी निर्माण कार्य में हो रही देरी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भवन निर्माण समय पर नहीं होने से पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कमरों की कमी के कारण कई कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाना पड़ता है, जिससे छात्रों को भी असुविधा होती है।
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