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Faridabad News: सिगरेट की लत जला रही युवाओं के फेफड़े
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। धूम्रपान सेवन करने वाले युवाओं के फेफड़े जल्द खराब हो रहे हैं। अस्पतालों में लंबे समय तक फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचने में रुकावट (सीओपीडी) का शिकार युवा भी आ रहे हैं। एम्स शाखा की ओपीडी में इनमें उम्र 20 से 32 वर्ष के प्रतिदिन करीब 40 प्रतिशत युवा उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं।
युवाओं में नशा करने की लत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कुछ युवा दोस्तों की देखादेखी में नशे का सेवन कर रहे हैं। वह इन दिनों फेफड़ों की इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। एम्स शाखा के सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. वीसाई सुशांक ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें 20 वर्ष से लेकर 32 वर्ष के करीब 40 प्रतिशत मरीज युवा हैं।
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वायु प्रदूषण कर रहा दोहरा नुकसानवायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से सीओपीडी के मरीजों को दोहरा नुकसान हो रहा है। युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों को भी सांस लेने में परेशानी हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों जो मरीज अस्थमा पंप का इस्तेमाल नहीं करते थे। वह भी दिन भी एक बार अस्थमा पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, जो मरीज पंप का इस्तेमाल करते थे। उनकी दवाई को बढ़ा दिया गया है।
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सैर करना किया बंद
वायु प्रदूषण की वजह से सीओपीडी के मरीज घर से निकलने में परहेज कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को चिकित्सक घर के अंदर कमरे में ही सैर करने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा मरीज को बहुत जरूरी कार्य होने पर ही घर से बाहर जाने की सलाह दी जा रही है। वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से मरीजों के साथ-साथ सामान्य लोग भी घर के अंदर भी मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्हें गरम पानी के सेवन की सलाह दी जाती है, ताकि उन्हें खांसी की समस्या से जूझना ना पड़े।
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22 नंबर कमरे में होती है जांच
आरएमओ डॉ. रोहित गौड़ ने बताया कि बीके अस्पताल के कमरा नंबर 22 में सीओपीडी के मरीजों की जांच की जाती है। जिसमें बीपी, शुगर, वजन आदि की जांच होती है। उसके बाद मरीजों को डॉक्टर के पास उपचार के लिए भेजा जाता है।
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इन बातों का रखें खास ध्यान
- सिगरेट पीना क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
- इससे खांसी हो सकती है और अंत में सांस फूल सकती है।
- तुरंत छाती के एक्स-रे और फेफड़ों के फंक्शन का टेस्ट कराएं।
- धूम्रपान बंद करना और वायु मार्ग को खुला रखने में मदद करने वाली दवा का सेवन करें।
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बल्लभगढ़। धूम्रपान सेवन करने वाले युवाओं के फेफड़े जल्द खराब हो रहे हैं। अस्पतालों में लंबे समय तक फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचने में रुकावट (सीओपीडी) का शिकार युवा भी आ रहे हैं। एम्स शाखा की ओपीडी में इनमें उम्र 20 से 32 वर्ष के प्रतिदिन करीब 40 प्रतिशत युवा उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं।
युवाओं में नशा करने की लत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कुछ युवा दोस्तों की देखादेखी में नशे का सेवन कर रहे हैं। वह इन दिनों फेफड़ों की इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। एम्स शाखा के सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. वीसाई सुशांक ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें 20 वर्ष से लेकर 32 वर्ष के करीब 40 प्रतिशत मरीज युवा हैं।
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वायु प्रदूषण कर रहा दोहरा नुकसानवायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से सीओपीडी के मरीजों को दोहरा नुकसान हो रहा है। युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों को भी सांस लेने में परेशानी हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों जो मरीज अस्थमा पंप का इस्तेमाल नहीं करते थे। वह भी दिन भी एक बार अस्थमा पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, जो मरीज पंप का इस्तेमाल करते थे। उनकी दवाई को बढ़ा दिया गया है।
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सैर करना किया बंद
वायु प्रदूषण की वजह से सीओपीडी के मरीज घर से निकलने में परहेज कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को चिकित्सक घर के अंदर कमरे में ही सैर करने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा मरीज को बहुत जरूरी कार्य होने पर ही घर से बाहर जाने की सलाह दी जा रही है। वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने की वजह से मरीजों के साथ-साथ सामान्य लोग भी घर के अंदर भी मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्हें गरम पानी के सेवन की सलाह दी जाती है, ताकि उन्हें खांसी की समस्या से जूझना ना पड़े।
22 नंबर कमरे में होती है जांच
आरएमओ डॉ. रोहित गौड़ ने बताया कि बीके अस्पताल के कमरा नंबर 22 में सीओपीडी के मरीजों की जांच की जाती है। जिसमें बीपी, शुगर, वजन आदि की जांच होती है। उसके बाद मरीजों को डॉक्टर के पास उपचार के लिए भेजा जाता है।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- सिगरेट पीना क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
- इससे खांसी हो सकती है और अंत में सांस फूल सकती है।
- तुरंत छाती के एक्स-रे और फेफड़ों के फंक्शन का टेस्ट कराएं।
- धूम्रपान बंद करना और वायु मार्ग को खुला रखने में मदद करने वाली दवा का सेवन करें।