मौन होता बचपन: मोबाइल और टीवी की आवाज बच्चों को कर रही खामोश, आप न करें अपने 'भविष्य' के साथ ये खिलवाड़
माता पिता दो से पांच साल के बच्चों को समय दें, बातचीत करने के लिए बच्चों को उत्साहित करें, बच्चों की सारी बातें को ध्यान से सुनें, उन्हें व्यस्त करने के लिए मोबाइल फोन न दें, टीवी न दिखाएं।
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आजकल दो से पांच साल के बच्चे अपना अधिकतर समय मोबाइल और टीवी पर कार्टून देखने में बिता रहे हैं। इससे उनको देर से बोलने (डिले स्पीच) की समस्या हो रही है। इस दौरान बच्चे किसी से बात ही नहीं करते हैं, साथ ही उनको गुस्सा भी अधिक रहता है। वहीं, बीके अस्पताल और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन वाक चिकित्सा (स्पीच थेरेपी) के लिए करीब 25 से 30 बच्चे आते हैं। इसमें जन्म के बाद दो साल से अधिक समय के बाद बोलना (देर से बोलना), तुतलाना और हकलाने जैसी समस्या होती हैं। बीके अस्पताल और निजी अस्पतालों में हर महीने में इस तरह के आने वाले बच्चों की संख्या करीब 500 से 600 तक है।
दो से ढ़ाई साल के बच्चे बोलना शुरू कर देता है। विभाग में अधिकतर अभिभावक दो से पांच साल के बच्चों के अंदर बोल न पाने, शब्दों का सही उच्चारण न करना और हकलाने की शिकायत लेकर आते हैं। विभाग में प्रतिदिन करीब 10 से 12 बच्चे आते हैं। जिनको बोल न पाने की समस्या होती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के देर से बोलने का पहला कारण सही तरह से एक्सपोजर न मिलना है। विभाग में हर महीने आने वाले करीब 250 बच्चे में से करीब 130 से अधिक बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने जन्म के बाद मम्मी और पापा तक नहीं बोला है। इन करीब 130 बच्चों में से अधिकतर बच्चे मोबाइल की लत के कारण खुद में बिजी रहने की वजह से बोल नहीं पा रहे हैं। -डॉ. अर्जुन गुर्जर, ऑडियोलॉजिस्ट, बीके अस्पताल
अस्पताल में स्पीच थेरेपी के लिए प्रतिदिन करीब 15 से 16 बच्चे आते हैं। जिनको बोलने की समस्या होती है। यह समस्या कोरोना काल के बाद से अधिकतर बच्चों में देखी जा रही है। बच्चे 5 से 6 घंटे मोबाइल व टीवी देखने में व्यस्त रहते हैं। इस समय काम करने वाले अधिकतर माता पिता बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं। जिससे बच्चे मोबाइल और टीवी में कार्टून देखते रहते हैं और किसी से बात नहीं करते हैं। इससे बच्चों का स्क्रीन समय बढ़ जाता है। बच्चों में न बोल पाने का मुख्य कारण मोबाइल है क्योंकि मोबाइल देखते से बच्चे किसी की बात पर ध्यान नहीं देते, बात कम करते हैं और गुस्सा होना जैसी लक्षण से ग्रस्त हो जाते हैं। इस दौरान बच्चे में डिले स्पीच की समस्या होती है। - डॉ. खुशबू राघव, स्पीचथेरेपिस्ट, एशियन अस्पताल
इन कारणों से भी बच्चों को बोलने में हो सकते हैं देरी
बच्चों में यह समस्या संकोच के कारण, काम करने वाले माता पिता की ओर से बच्चों को समय न देने के कारण और जन्मजात भी हो सकती है। वहीं, कभी-कभी नवजात बच्चों को कम सुनाई देने के कारण भी बच्चे देरी से बोलते हैं। माता पिता को जन्म के समय बच्चों के कान की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही माता पिता को इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा।
बचाव के लिए इन बातों का रखे ध्यान
माता पिता दो से पांच साल के बच्चों को समय दें, बातचीत करने के लिए बच्चों को उत्साहित करें, बच्चों की सारी बातें को ध्यान से सुनें, उन्हें व्यस्त करने के लिए मोबाइल फोन न दें, टीवी न दिखाएं। वहीं अगर किसी भी प्रकार की कोई समस्या हो जाए तो ईएनटी विभाग के डॉक्टर से परामर्श लें।