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Faridabad News: कंपनियों का केमिकल औद्योगिक क्षेत्र के भूजल को बना रहा जहरीला
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फरीदाबाद। सेक्टर 58 की कंपनियों से निकलने वाला केमिकल पानी औद्योगिक क्षेत्र के भूजल को जहरीला बना रहा है। यहां करीब 15 एकड़ में फैले पार्क में कूड़े के ढेर लगे हैं। सीवर का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इससे कैंसर जैसी बीमारियों फैलने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से चार वर्ष पहले 24 कंपनियों के पानी के सैंपल भरने के साथ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद कार्रवाई खानापूर्ति तक सीमित रह गई। हालत अब भी जस की तस बनी हुई है। वहीं, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) 25 वर्ष बाद भी सेक्टर को पूरी तरह विकसित नहीं कर सका है।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छोटी-बड़ी करीब 28 हजार कंपनियां हैं। इनमें से सेक्टर-58 में करीब 1500 से अधिक कंपनियां चल रही हैं। डाइंग, केमिकल, गारमेंट आदि इंडस्ट्रीज में पानी का इस्तेमाल किया जाता है। कई उद्योग इस्तेमाल किए हुए पानी को शोधित किए बिना ही यहां करीब 15 एकड़ में बने खाली प्लाट में छोड़ देते हैं। मंगलवार को भी पार्क में टैंकरों से सीवर का पानी छोड़ते देखा गया। यह दूषित पानी जल चक्र में शामिल हो जाता है। इसमें मिले घातक रसायन सीवरेज के साथ भूजल में मिलकर उसे भी दूषित करते हैं। दूषित पानी से कैंसर सहित अन्य खतरनाक बीमारियां होती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार वर्ष पहले सर्वे किया गया था। बोर्ड की टीमों ने अलग-अलग इलाके में करीब 300 उद्योगों की जांच की थी और 24 कंपनियों के पानी का सैंपल भरे थे। यह कंपनियां सेक्टर 24, 25, सरुरपुर और सेक्टर 58 इलाके में चल रही हैं। इस दौरान कई कंपनियों के सैंपल रिपोर्ट जांच में फेल पाई आई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट के आधार पर कंपनियों को नोटिस जारी कर जल्द स्थिति सुधारने के आदेश दिए थे लेकिन, चार वर्ष बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। कंपनियों द्वारा लगातार खाली प्लाट में सीवर और केमिकल का पानी छोड़ा जा रहा है। पार्क में कूड़ा फेंका जा रहा है। इससे पार्क में कूड़े के ढेर लगे हैं। इससे उठती दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिकारियों को भी शिकायत दी गई। फिर भी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है।
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क्या कहते हैं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष
सेक्टर-58 इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद गर्ग ने कहा कि सेक्टर में गंदगी की समस्या से काफी परेशान है। कुछ लोग पार्क में सीवर का पानी भी छोड़ते हैं। इसके समाधान के लिए कई बार एचएसवीपी अधिकारियों को शिकायत की गई। उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपा गया। ग्रीवेंस कमेटी में मामला उठाया। एचएसवीपी प्रशासक डॉ. गरिमा मित्तल ने टीम के साथ सेक्टर का दौरा भी किया था। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है। सरकार से हमारी मांग है कि 15 एकड़ में खाली पड़े प्लाट को सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया जाए। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो ठेके पर दे दिया जाए। इससे गंदगी की समस्या दूर हो सके।
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कूड़े में कर्मचारी लगा देते हैं आग
सेक्टर-58 औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण नगर निगम के सफाई कर्मचारी सफाई की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। उद्योगों के सफाई कर्मचारी अपने-अपने संस्थान की सफाई करने के बाद कूड़े को खुले में डाल देते हैं। जब भी एक स्थान पर खुले प्लॉट में कूड़ा ज्यादा एकत्रित हो जाता है तो वहां कर्मचारी आग लगा देते हैं। यही स्थिति मंगलवार को देखने को मिली। ये आग धीरे-धीरे कूड़े को जलाती रहती है। कूड़े में काफी मात्रा में तेल के गंदे कपड़े होने से काला धुआं पूरे दिन निकलता रहा। धुआं से यहां पर रहने वाले लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया।
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ऐसे दूषित हो रहा भूजल
शहर में जल प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ गया है। इसका सीधा संबंध पानी की उपलब्धता कम होने से है। सेक्टर-58 के साथ ही अरावली की पहाड़ियों में अवैध फैक्टरियां रही हैं। जिनका केमिकल सीधे धरती के अंदर भेज दिया जाता है और पानी दूषित हो जाता है। पर्यावरण संरक्षक जितेंद्र भड़ाना ने बताया कि जल के दूषित होने से पाली, भांखरी, मोहब्ताबाद, डबुआ कॉलोनी, नंगला, नवादा, अनखीर गांवों में लगभग 40 लोग कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं। जल प्रदूषण को लेकर हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे ऐसी फैक्टरियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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वर्जन
औद्योगिक क्षेत्र में कई समस्याएं है। उनका जल्द समाधान कराया जाएगा। इसकी फाइल सरकार के पास भेजी गई है। मंजूरी के बाद काम शुरू किया जाएगा।
- डॉ. गरिमा मित्तल, प्रशासक, एचएसवीपी
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औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में छोटी-बड़ी करीब 28 हजार कंपनियां हैं। इनमें से सेक्टर-58 में करीब 1500 से अधिक कंपनियां चल रही हैं। डाइंग, केमिकल, गारमेंट आदि इंडस्ट्रीज में पानी का इस्तेमाल किया जाता है। कई उद्योग इस्तेमाल किए हुए पानी को शोधित किए बिना ही यहां करीब 15 एकड़ में बने खाली प्लाट में छोड़ देते हैं। मंगलवार को भी पार्क में टैंकरों से सीवर का पानी छोड़ते देखा गया। यह दूषित पानी जल चक्र में शामिल हो जाता है। इसमें मिले घातक रसायन सीवरेज के साथ भूजल में मिलकर उसे भी दूषित करते हैं। दूषित पानी से कैंसर सहित अन्य खतरनाक बीमारियां होती हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार वर्ष पहले सर्वे किया गया था। बोर्ड की टीमों ने अलग-अलग इलाके में करीब 300 उद्योगों की जांच की थी और 24 कंपनियों के पानी का सैंपल भरे थे। यह कंपनियां सेक्टर 24, 25, सरुरपुर और सेक्टर 58 इलाके में चल रही हैं। इस दौरान कई कंपनियों के सैंपल रिपोर्ट जांच में फेल पाई आई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट के आधार पर कंपनियों को नोटिस जारी कर जल्द स्थिति सुधारने के आदेश दिए थे लेकिन, चार वर्ष बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। कंपनियों द्वारा लगातार खाली प्लाट में सीवर और केमिकल का पानी छोड़ा जा रहा है। पार्क में कूड़ा फेंका जा रहा है। इससे पार्क में कूड़े के ढेर लगे हैं। इससे उठती दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिकारियों को भी शिकायत दी गई। फिर भी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है।
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क्या कहते हैं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष
सेक्टर-58 इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद गर्ग ने कहा कि सेक्टर में गंदगी की समस्या से काफी परेशान है। कुछ लोग पार्क में सीवर का पानी भी छोड़ते हैं। इसके समाधान के लिए कई बार एचएसवीपी अधिकारियों को शिकायत की गई। उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपा गया। ग्रीवेंस कमेटी में मामला उठाया। एचएसवीपी प्रशासक डॉ. गरिमा मित्तल ने टीम के साथ सेक्टर का दौरा भी किया था। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ है। सरकार से हमारी मांग है कि 15 एकड़ में खाली पड़े प्लाट को सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया जाए। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो ठेके पर दे दिया जाए। इससे गंदगी की समस्या दूर हो सके।
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कूड़े में कर्मचारी लगा देते हैं आग
सेक्टर-58 औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण नगर निगम के सफाई कर्मचारी सफाई की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। उद्योगों के सफाई कर्मचारी अपने-अपने संस्थान की सफाई करने के बाद कूड़े को खुले में डाल देते हैं। जब भी एक स्थान पर खुले प्लॉट में कूड़ा ज्यादा एकत्रित हो जाता है तो वहां कर्मचारी आग लगा देते हैं। यही स्थिति मंगलवार को देखने को मिली। ये आग धीरे-धीरे कूड़े को जलाती रहती है। कूड़े में काफी मात्रा में तेल के गंदे कपड़े होने से काला धुआं पूरे दिन निकलता रहा। धुआं से यहां पर रहने वाले लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया।
ऐसे दूषित हो रहा भूजल
शहर में जल प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ गया है। इसका सीधा संबंध पानी की उपलब्धता कम होने से है। सेक्टर-58 के साथ ही अरावली की पहाड़ियों में अवैध फैक्टरियां रही हैं। जिनका केमिकल सीधे धरती के अंदर भेज दिया जाता है और पानी दूषित हो जाता है। पर्यावरण संरक्षक जितेंद्र भड़ाना ने बताया कि जल के दूषित होने से पाली, भांखरी, मोहब्ताबाद, डबुआ कॉलोनी, नंगला, नवादा, अनखीर गांवों में लगभग 40 लोग कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं। जल प्रदूषण को लेकर हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे ऐसी फैक्टरियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
वर्जन
औद्योगिक क्षेत्र में कई समस्याएं है। उनका जल्द समाधान कराया जाएगा। इसकी फाइल सरकार के पास भेजी गई है। मंजूरी के बाद काम शुरू किया जाएगा।
- डॉ. गरिमा मित्तल, प्रशासक, एचएसवीपी